दिल्ली के वोटरों के लिए जरूरी खबर, SIR अभियान में फॉर्म जमा कराने के लिए बचे सिर्फ 8 दिन
दिल्ली में एसआइआर अभियान के तहत मतदाता फॉर्म डिजिटलीकरण में धीमी गति बनी हुई है, जबकि प्रक्रिया पूरी करने के लिए केवल आठ दिन शेष हैं। ...और पढ़ें

दिल्ली में एसआइआर अभियान के तहत मतदाता फॉर्म डिजिटलीकरण में धीमी गति बनी हुई है।
HighLights
एसआइआर अभियान के लिए केवल आठ दिन शेष।
लगभग आधे मतदाता फॉर्म ही डिजिटाइज हो पाए।
बीएलओ को फॉर्म में गलतियों से जूझना पड़ रहा।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में एसआइआर अभियान का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अब केवल आठ दिनों का समय शेष बचा है। हालांकि, जमीनी स्तर पर अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है क्योंकि करीब आधे ही मतदाताओं के फॉर्म डिजिटलाइज हो पाए हैं।
बीएलओ मतदाताओं से भरे हुए फार्म लेकर जमा कर रहे है। अभियान के इस अंतिम चरण में बीएलओ घर-घर जाकर फार्म लेने के साथ ही बंद घरों के लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाने में लगे है।
आंकड़ों के नजरिए से देखें तो दिल्ली में अब तक 99.91 प्रतिशत फार्म बांटे जा चुके हैं, जो लगभग शत- प्रतिशत के आंकड़े को छू रहा है। इसके बावजूद डिजिटलीकरण की रफ्तार बहुत धीमी बनी हुई है। निर्वाचन विभाग के आंकड़ों के अनुसार बीएलओ 31 जुलाई तक महज 57.54 प्रतिशत फार्म का ही ऑनलाइन डिजिटलीकरण कर पाए है।
यही कारण है कि बचे हुए दिनों में फार्म वापस जमा कराने और उनकी तेजी से आनलाइन एंट्री करने पर जोर दिया जा रहा है। आने वाला रविवार को बीएलओ महत्वपूर्ण दिन मान रहे है। उनका कहना है इस दिन अधिकतर लोग घर पर रहेंगे तो अधिक से अधिक मतदाताओं से फॉर्म ले सकेंगे।
चुनाव कार्यालय द्वारा शुक्रवार देर शाम जारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में कुल मतदाताओं 1,45,10,298 में से अब तक 1,44,97,708 को फार्म वितरित हो चुके हैं। जबकि उसमें से कुल 83,48,761 फार्म का आनलाइन दस्तावेजीकरण हो चुका है।
वहीं, इस संबंध में पुरानी दिल्ली सदर विधानसभा के पहाड़ी धीरज क्षेत्र की निवासी मीना कुमारी का कहना है कि बीएलओ घर- घर फार्म लेने नहीं पहुंच रहे हैं। बीएलओ को फार्म जमा करने के लिए वह पिछले कई दिनों से फोन कर रही है। ऐसी ही शिकायत करोल बाग निवासी ओमप्रकाश शर्मा की भी है।
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वहीं, दूसरी तरफ स्थानीय बीएलओ का कहना है कि मतदाताओं ने फॉर्म में बहुत अधिक गलतियां की हुई है। इन गलतियों को सही करना उनके लिए बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस कारण वह मतदाताओं तक भरे हुए फॉर्म लेने नहीं पहुंच पा रहे हैं और डिजिटलीकरण प्रक्रिया भी बहुत धीमी गति से चल रही है।
कई मतदाताओं ने तो अपने दोनों मूल फार्म में गलत जानकारी भरकर उसे खराब कर दिया है। उनसे सहमति पत्र लिखवाकर उनके फॉर्म के साथ लगाकर चुनाव आयोग भेजा गया है ताकि नया फार्म मिल सकें। इन सब चुनौतियों के कारण परेशानी बनी हुई है।