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    Delhi SIR: नेपाली मूल के नागरिकों के लिए एसआईआर बनी चुनौती, पहले लेनी होगी भारतीय नागरिकता

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 07:11 AM (GMT+05:30)

    दिल्ली में एसआइआर प्रक्रिया के तहत विदेशी मूल के नागरिकों, खासकर नेपालियों को मतदाता सूची से नाम कटने का डर सता रहा है, क्योंकि वे अपने माता-पिता के भ ...और पढ़ें

    एआई जेनेरेटेड इमेज।

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    HighLights

    1. विदेशी मूल के नागरिकों को एसआइआर में दिक्कतें।

    2. माता-पिता के भारतीय नागरिक न होने से समस्या।

    3. गृह मंत्रालय से नागरिकता प्रमाण पत्र ही समाधान।

    शशि ठाकुर, नई दिल्ली। एसआइआर की प्रक्रिया में विदेशी मूल के नागरिक का पेंच भी फंस रहा है। दिल्ली में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक खासकर नेपाल के लोग है, जिनमें से कई तो दशकों से रह रहे हैं। इसी तरह, कुछ की बहुएं विवाह बाद वहां से आई है।

    सामान्य प्रक्रिया में वह आधार कार्ड या किसी अन्य माध्यमों से अपने नाम मतदाता सूची में जुड़वा लिए थे तथा मतदान भी कर रहे थे। लेकिन अब एसआइआर प्रक्रिया में पीढ़ियों के कालम में भरने के लिए उनके पास नाम नहीं है। अब उन्हें मतदाता सूची से नाम कट जाने की चिंता सता रही है।

    नेपाली नागरिकों को सता रहा नाम कटने का डर

    नेपाल से आकर बसने, रोजगार, शिक्षा में कोई रोकटोक नहींं है। इसलिए दिल्ली में नेपाल मूल के लोग बड़ी संख्या में हैं और पीछे के चुनावों में मतदान भी करते रहे हैं। लेकिन अब एसआइआर फार्म न भर पाने के चलते मतदाता सूची से नाम कटने का डर सता रहा है। क्योंकि, उनके माता-पिता भारत के मूल नागरिक नहीं थे और वर्ष 2002 के एसआइआर में उनका नाम नहीं है।

    चिंता की बात यह कि गलियों में लोगों का फार्म भरवा रहे बीएलओ को भी इस समस्या का समाधान नहीं पता है। प्रभावित निवासियों का कहना है कि जब वह इस समस्या को लेकर बीएलओ के पास जाते हैं, तो उन्हें वहां से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती।

    लक्ष्मी नगर के सरपंच वाडा की रहने वाली कमला देवी ने बताया कि वह अपनी बहू का एसआइआर फार्म नहीं भर पा रही है। क्योंकि, शादी से पहले उनकी बहू अपने माता-पिता के साथ नेपाल के काठमांडू में रहती थी।

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    विवाह के बाद से वह दिल्ली में अपने पत्नी के साथ रह रही है और यहां वोट भी डाल रही है। एसआइआर फार्म के नियमों के मुताबिक आवेदक को साल 2002 या उससे पहले के रिकार्ड में अपने माता-पिता में से किसी एक का नाम मतदाता के रूप में देना अनिवार्य है।

    अब समस्या यह है कि जिन लोगों के माता-पिता कभी भारत के नागरिक रहे ही नहीं, वे इस कालम में किसका नाम दर्ज करें। कमला देवी की बहू का यह अकेला मामला नहीं है। वह बताती है कि उन लोगों का नेपाल से रोटी-बेटी का संबंध है तो दिल्ली में उनके जानने वाले कई परिवार में नेपाल मूल की बहुएं हैं।

    विदेशी नागरिक ऐसे कर सकते हैं आवेदन

    वहीं, इस संबंध में चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि ऐसे नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। जिन लोगों के पास भारतीय नागरिकता का कोई पुराना पारिवारिक दस्तावेज नहीं है, वह केंद्रीय गृह मंत्रालय में नागरिकता प्रमाण पत्र के लिए औपचारिक आवेदन कर सकते हैं और मंत्रालय से प्रमाण पत्र प्राप्त करने के बाद वह भारत के नागरिक होने का वैध दावा पेश कर सकते हैं।

    यदि जांच में नागरिकों का यह दावा सही पाया जाता है, तो उन्हें तुरंत एसआइआर डेटाबेस में शामिल कर लिया जाएगा और उनका मतदान का अधिकार पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।

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