दिल्ली की झुग्गियों में सीवर लाइन बिछाने पर डीजेबी-डूसिब ने जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ा
दिल्ली की 675 झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में सीवर सुविधा नहीं है। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) और डूसिब (DUSIB) यमुना प्रदूषण मामले में एनजीटी के समक्ष एक-दूस ...और पढ़ें
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झुग्गियों में सीवर लाइन डालने के लिए डूसिब और डीजेबी जैसी एजेंसियां अपनी जिम्मेदारी को मानने को तैयार नहीं।
HighLights
दिल्ली की 675 झुग्गियां सीवर सुविधा से वंचित।
डीजेबी-डूसिब सीवर लाइन बिछाने की जिम्मेदारी से मुकरे।
एनजीटी में यमुना प्रदूषण मामले पर सुनवाई जारी।
विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। दिल्ली की 675 झुग्गी-झोपड़ी बस्तियां भले ही आज भी सीवर की सुविधा से वंचित हो, लेकिन दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डूसिब) और दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) जैसी एजेंसियां अपनी जिम्मेदारी को मानने को तैयार नहीं है। यमुना प्रदूषण से जुड़े एक मामले में डूसिब और डीजेबी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में हलफनामा दाखिल कर सीवर लाइन बिछाने की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
डीजेबी व डूसिब ने सीवर बिछाने की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाल दी। एक तरफ डूसिब ने कहा कि सीवर लाइन बिछाना डीजेबी का काम है, वहीं डीजेबी का कहना है कि डूसिब द्वारा सीवर लाइन बिछाए बिना वह इन क्षेत्रों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बना सकता।
डूसिब और डीजेबी ने उक्त जवाब निजामुद्दीन वेस्ट एसाेसिएशन के आवेदन पर दाखिल किया। इस मामले पर एनजीटी चेयरमैन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई कर रही है। इसमें डिफेंस कालोनी नाले और बारापुल्ला पुल से यमुना में बहने वाले सीवेज का पता लगाया जा रहा है।
डूसिब के मुख्य अभियंता वीएस फोनिया के हस्ताक्षर के साथ दाखिल हलफनामा में कहा गया है कि झुग्गी-झोपड़ी सीवर लाइनें या पाइप बिछाने का काम उनके दायरे में नहीं आता है और यह काम डीजेबी को करना है। डूसिब का काम फुटपाथ, बरसाती पानी की नालियों और सार्वजनिक शौचालय परिसरों तक सीमित है।
वहीं, डीजेबी ने अपने हलफनामा में कहा कि नालियों से सीवेज को पूरी तरह खत्म करना तब तक मुमकिन नहीं है, जब तक डूसिब पहले पाइप लाइन न बिछा दे।
घरों से निकलने वाले सीवेज के लिए कहीं कोई जगह नहीं
डूसिब के डिवीजन-वार डेटा के अनुसार उसके सभी 12 डिवीजनों के 675 झुग्गी शामिल हैं और इसमें बताया गया है कि सीवेज कहां जाता है। डूसिब के देखरेख वाले 680 सार्वजनिक शौचालय परिसरों से निकलने वाला सीवेज डीजेबी की मौजूद सीवर लाइनों में चला जाता है; और जहां लाइनें नहीं हैं, वहां सेप्टिक टैंक में जमा होता है। इन झुग्गियों में रहने वाले लोगों के घरों से निकलने वाले सीवेज के लिए कहीं कोई जगह नहीं है।
एनजीटी ने अगस्त 2025 में मामले में डूसिब को पक्षकार बनाते हुए जवाब मांगा था। हालांकि, जवाब नहीं देने पर एनजीटी ने उस पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया था। डीजेबी की रिपाेर्ट में कहा गया कि पहचान की गई 43 नालियों में से 17 को सफलतापूर्वक रोककर दूसरी तरफ मोड़ दिया गया है और 22 नालियों पर काम चल रहा है।
एक अप्रैल से शुरू होगा डिफेंस नाले से गाद निकालने का काम
वहीं, डिफेंस कालोनी के खुले और ढ़के हुए नालों की सफाई के संबंध में दिल्ली नगर निगम ने एनजीटी में ताजा हलफनामा दाखिल किया। एमसीडी ने कहा कि नालों की सफाई के संबंध में निविदा जारी की गई थी। गाद निकालने का काम एक अप्रैल से शुरू हो जाएगा और यह काम 15 जून तक पूरा कर लिया जाएगा। ताकि, विभिन्न इलाके में जलजमाव और नालों के उफनने की समस्या काे रोका जा सके।
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सभी 77 नालों की सफाई कार्य हो जाएगा पूरा
बाढ़ एवं सिंचाई विभाग ने एक अन्य मामले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश पर दाखिल हलफनामा में कहा कि उसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले 77 नालों की सफाई और गाद उठाने का काम मानसून आने से पहले 31 मई तक पूरा कर लिया जाएगा। विभाग ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि मानसून आने से पहले नालों की सफाई को लेकर एक योजना बनाई गई और चरणबद्ध तरीके से काम पूरा कर लिया जाएगा।
विभाग ने बताया कि उसे कुल 28.57 लाख मैट्रिक टन गाद हटानी है। यह भी कहा कि विभाग द्वारा गाद निकालने व सफाई करने का काम विभिन्न चरण में किया जाएगा और 13 मार्च तक 6.58 लाख मैट्रिक टन निकाला जा चुका है और 23 प्रतिशत काम हो चुका है।