दिल्ली में छात्रों की भीड़, लेकिन रहने की जगह सीमित... सत्य निकेतन हादसे के बाद क्यों उठ रहे हैं सवाल
दिल्ली उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं का बड़ा केंद्र है, लेकिन छात्रों के लिए छात्रावास सुविधाओं की भारी कमी है। ...और पढ़ें

दिल्ली में छात्रों के रहने के लिए होती है बड़ी समस्या। (एआई जेनरेटेड इमेज)
HighLights
दिल्ली में छात्रों के लिए छात्रावास सुविधाओं की भारी कमी।
हजारों छात्र महंगे पीजी और किराये के कमरों में रहने को मजबूर।
सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे विद्यार्थी।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। देशभर के युवाओं के लिए दिल्ली उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बड़ा केंद्र है। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), जामिया मिल्लिया इस्लामिया, आइआइटी दिल्ली और दिल्ली टेक्नोलाजिकल यूनिवर्सिटी (डीटीयू) समेत कई संस्थानों में हर वर्ष दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र आते हैं।
इसके अलावा यूपीएससी, एसएससी, बैंकिंग, जेईई और नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी देशभर से छात्र दिल्ली पहुंचते हैं। लेकिन छात्रों की संख्या के मुकाबले छात्रावास की सुविधा बेहद सीमित है। ऐसे में अधिकांश छात्रों को महंगे और घटिया पीजी, किराये के कमरे या साझा फ्लैट में तमाम दिक्कतों के बीच असुरक्षा का जोखिम उठाकर रहना पड़ता है।
डीयू में 72 हजार नए दाखिले, छात्रावास सीटें करीब छह हजार
डीयू के नियमित कॉलेजों में करीब 3.6 लाख छात्र हैं और हर वर्ष स्नातक में करीब 72 हजार नए दाखिले होते हैं। कई लोकप्रिय कालेजों में बाहर के राज्यों से आने वाले छात्रों की संख्या 50 से 70 प्रतिशत तक बताई जाती है। इसके मुकाबले डीयू में करीब 20 छात्रावासों में लगभग छह सीटें हैं। इनमें कई सीटें परास्नातक और शोध छात्रों के लिए होती हैं। इससे स्नातक छात्रों के लिए उपलब्ध सीटें और कम हो जाती हैं।
जेएनयू में करीब 18 छात्रावास और विवाहित छात्रों के लिए आवासीय परिसर हैं, जिनकी क्षमता लगभग 5,500 बताई जाती है। जामिया में लड़कों के लिए करीब 2,220 और लड़कियों के लिए लगभग 1,900 सीटें हैं। डीटीयू में भी करीब 2,500 से 2,700 छात्रावास सीटें हैं। इसके बावजूद मांग के मुकाबले संस्थागत आवास कम पड़ रहा है।
12 से 20 हजार रुपये तक पीजी का किराया
छात्रावास नहीं मिलने पर छात्रों का रुख नार्थ कैंपस, साउथ कैंपस, मुखर्जी नगर, गांधी विहार, नेहरू विहार और सत्य निकेतन जैसे इलाकों की ओर होता है। यहां भोजन समेत पीजी का किराया करीब 12 हजार से 20 हजार रुपये या इससे अधिक तक पहुंच जाता है। कई छात्र खर्च घटाने के लिए कमरे और फ्लैट साझा करते हैं। कम जगह, साफ-सफाई, हवा की पर्याप्त निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी भी छात्रों की परेशानी और असुरक्षा बढ़ाती है।
कोचिंग के लिए आने वाले छात्रों से भी बढ़ा दबाव
दिल्ली में आवास संकट विवि छात्रों तक सीमित नहीं है। मुखर्जी नगर, ओल्ड राजेंद्र नगर, करोल बाग, लक्ष्मी नगर और कालू सराय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के प्रमुख केंद्र हैं। विभिन्न रिपोर्टों और उद्योग अनुमानों में कोचिंग के लिए दिल्ली आने वाले छात्रों की संख्या पांच लाख से 10 लाख तक बताई गई है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्रों के लिए संस्थागत छात्रावास की सुविधा लगभग नहीं है। उन्हें भी निजी पीजी, किराये के कमरे और साझा फ्लैट पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे पढ़ाई के साथ रहने का खर्च भी बड़ी चुनौती बन गया है। बढ़ती छात्र आबादी और सीमित छात्रावास क्षमता के बीच यह अंतर दिल्ली के शिक्षा केंद्र के सामने गंभीर आवासीय संकट को दिखाता है।
