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नियमों की धज्जियां उड़ाकर चल रहा था PG: सत्य निकेतन में ढाई की जगह बना दी 5 मंजिल; फायर एनओसी तक नहीं

By Rais Rais Edited By: Sonu Suman
Published: Sun, 06 Sep 2026 10:31 PM (IST)

दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में ढही पांच मंजिला इमारत अवैध रूप से पीजी के तौर पर संचालित हो रही ...और पढ़ें

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HighLights

  1. सत्य निकेतन में ढही पांच मंजिला इमारत अवैध थी।

  2. बेसमेंट में पानी भरने से नींव कमजोर हुई थी।

  3. नियमों के विपरीत पीजी का संचालन हो रहा था।

मुहम्मद रईस, दक्षिणी दिल्ली। सत्य निकेतन में ढही पांच मंजिला इमारत पूरी तरह अवैध थी, जिसमें नियमों के विपरीत पीजी का भी संचालन हो रहा था। छात्रों की आवाजाही को देखते हुए भवन स्वामी ने फायर एनओसी भी नहीं ली थी। स्थानीय लोगों के मुताबिक लगभग 40 वर्ष पुरानी इस इमारत में मूल रूप से बीम का मजबूत ढांचा नहीं था और यह पहले दो मंजिला थी।

बाद के वर्षों में इमारत पर तीन और मंजिलों का निर्माण कराया गया। लगातार बारिश के दौरान बेसमेंट में पानी भरने और हाल में वहां चल रहे निर्माण कार्य के कारण इमारत की नींव कमजोर होकर खिसक गई, जिसके बाद पूरी इमारत ढह गई।

स्थानीय के मुताबिक इमारत के निचले हिस्से में पहले दुकानें थीं। एक दुकान को लेकर मालिक और दुकानदार के बीच लंबे समय तक विवाद भी चला था। विवाद खत्म होने और दुकान खाली होने के बाद इमारत को लीज पर देने की तैयारी शुरू की गई।

पीजी चलाने वाली कंपनी हॉस्टल डेज ने इमारत लीज पर दिया

लोगों का आरोप है कि इसी दौरान निर्माण कार्य कराकर पुरानी दो मंजिला इमारत पर बिना पर्याप्त संरचनात्मक मजबूती के अन्य मंजिलें तैयार कर दी गईं। इमारत के मालिक ने इसे इलाके में पीजी चलाने वाली कंपनी हॉस्टल डेज को लीज पर दिया था। दो साल पहले यहां पीजी शुरू किया गया।

इमारत के बेसमेंट में लगभग हर वर्ष बारिश के दौरान पानी भर जाता था। इस बार भी बेसमेंट में पानी भर गया था। करीब डेढ़ माह पहले पानी निकालने के बाद वहां निर्माण और मरम्मत का काम शुरू किया गया था। बेसमेंट को दुरुस्त करने के साथ ही भविष्य में पानी भरने से रोकने के लिए काम किया जा रहा था।

लंबे समय से पानी के संपर्क में रहने के कारण नींव पहले ही कमजोर हो चुकी थी। ऐसे में नींव के आसपास निर्माण कार्य शुरू होने के दौरान उसका दीवार खिसक गई और इमारत अचानक ढह गई। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।

साउथ कैंपस के नजदीक पांच कंपनियों ने बना दिया पीजी का गढ़

दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक होने के कारण सत्य निकेतन लंबे समय से छात्रों का प्रमुख ठिकाना रहा है। बड़ी संख्या में बाहर से आने वाले छात्रों की आवासीय जरूरतों को देखते हुए यहां पीजी कारोबार तेजी से बढ़ा है। ब्लूम स्टे, येश पीजी, स्टेंजा और हॉस्टल डेज समेत कई कंपनियों ने स्थानीय मकान और इमारतें किराए या लीज पर लेकर उन्हें पीजी में बदल दिया है।

सूत्रों के अनुसार, हादसे का शिकार हुई इमारत में हॉस्टल डेज पीजी संचालित कर रही थी और कंपनी के इसी इलाके में चार अन्य पीजी भी मौजूद हैं। हादसे के बाद अब पुरानी इमारतों में चल रहे पीजी और उनकी संरचनात्मक सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

कैसे अवैध है यह पीजी

नियमानुसार पीजी रिहायशी इलाकों में नहीं चल सकता है। नए मास्टर प्लान में भी व्यावासियक इलाकों से साथ मिक्स लैंडयूज वाली जमीन पर पीजी चलाने का नियम है। वहीं, रिहायशी इलाकों में एजेंसियों की मंजूरी के साथ इसे संचालित किया जा सकता है।

पहले यह पीजी इसलिए अवैध है कि यह रिहायशी इलाके में चल रहा था। साथ ही इमारत पांच मंजिला थी तो और इसमें 20 से अधिक लोगों की आवाजाही थी इसलिए ऐसी इमारत में फायर एनओसी की जरुरत होती है। जो कि नहीं थी। इसलिए यह पीजी भी अवैध था।

कैसे अवैध है यह इमारत

वैसे इस इमारत का निर्माण 1990 में हुआ। जिसे एक मानक नक्शे के हिसाब से ढाई मंजिल तक ही निर्मित होना चाहिए था। फिर भी इसे पांच मंजिल तक बनाया गया। हालांकि केंद्र सरकार के स्पेशल प्रोविजन एक्ट के तहत इस अवैध निर्माण को संरक्षण प्राप्त था लेकिन जैसे ही इसमें ढांचागत बदलाव संबंधी कार्य शुरू हुआ वैसे ही इसका संरक्षण खत्म हो गया और यह पूरी इमारत ही अवैध हो गई।

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