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सत्य निकेतन हादसा: भूकंप समझकर घरों से बाहर निकले लोग, सामने पड़ा था मलबे का पहाड़

By Gouri Edited By: Sonu Suman
Published: Sun, 06 Sep 2026 09:35 PM (IST)

दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन मार्केट में एक 80 साल पुरानी पीजी इमारत अचानक ढह गई, जिससे लोग भूकंप समझकर ...और पढ़ें

अचानक धमाके के साथ जमींदोज हो गई 80 साल पुरानी इमारत।

अचानक धमाके के साथ जमींदोज हो गई 80 साल पुरानी इमारत।

HighLights

  1. सत्य निकेतन में 80 साल पुरानी पीजी इमारत ढही।

  2. हादसे में कई छात्र दबे, एक छात्र राहुल की मौत।

  3. स्थानीय लोगों ने शुरू किया बचाव, फिर पहुंची टीमें।

गौर शर्मा, दक्षिणी दिल्ली। सत्य निकेतन मार्केट में कुछ सेकंड पहले तक सब कुछ सामान्य था। लोग अपने-अपने घरों में थे और आसपास रोज की तरह आवाजाही हो रही थी। अचानक जोरदार आवाज के साथ एक इमारत भरभराकर गिर गई।

धमाका इतना तेज था कि आसपास की कई इमारतें तक हिल गईं। पास में रहने वाले लोगों को पहले लगा कि शायद भूकंप आया है। लोग घबराकर घरों से बाहर निकले तो सामने का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। बगल की इमारत पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुकी थी।

हादसा ऐसा कि पूरे इलाके में धूल का छाया गुबार

स्थानीय निवासी हिमांशु ने बताया कि हादसा इतना अचानक हुआ कि कुछ पल के लिए कुछ समझ ही नहीं आया। जब वह बाहर निकले तो सामने धूल का गुबार था और इमारत का नामोनिशान तक नहीं था। बाद में पता चला कि इस इमारत में पीजी चलता था। हादसे के समय वहां निर्माण कार्य भी चल रहा था।

यह जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों की चिंता और बढ़ गई। उन्हें आशंका हुई कि इमारत के अंदर कई लोग फंसे हो सकते हैं। इसी बीच छात्र सक्षम यादव ने बताया कि उसके चार दोस्त भी मलबे के नीचे फंसे है। यह सुनते ही स्थानीय लोग बिना समय गंवाए मलबे की ओर दौड़ पड़े।

करीब 10 मिनट बाद पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं

किसी ने हाथों से मलबा हटाने की कोशिश की तो कोई अंदर फंसे लोगों की आवाज सुनने के लिए चुपचाप आसपास खड़ा रहा। लोगों की कोशिश थी कि बचाव दल के पहुंचने से पहले किसी तरह अंदर फंसे लोगों तक पहुंचा जा सके। हिमांशु ने बताया कि करीब 10 मिनट बाद पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं।

एंबुलेंस करीब 20 मिनट में पहुंच गई, जबकि एनडीआरएफ की टीम को आने में करीब 45 मिनट लगे। उन्होंने यह भी कहा कि बिल्डिंग करीब 80 साल पुरानी बताई जा रही है और पास की एक इमारत भी टेढ़ी हो चुकी है। इसके बावजूद आसपास चल रहे पीजी को खाली नहीं कराया गया था।

लोगोंं ने वहां पर छात्रों को रेस्क्यू करना शुरू कर दिया

वहीं प्रत्यक्षदर्शी तनिष्क ने बताया कि वह नागोरी चाय पर बैठे हुए थे तभी अचानक से पीजी की इमारत भरभराकर गिरी जिसको देखते ही वह लोग मौके पर पहुंचे। इसके तुरंत बाद उन्होंने पुलिस को फोन किया। मौके पर पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंची और वहां पर भीड़ पर नियंत्रण पाने की कोशिश की इसके साथ ही मौके पर मौजूद लोगोंं ने वहां पर छात्रों को रेस्क्यू करना शुरू कर दिया।

जिसके बाद एनडीआरएफ की टीम पहुंची उन्होने बताया कि उनका राहुल नाम का दोस्त इसी पीजी में रहता था जो दो दिन पहले ही उनसे इस बारे में चर्चा कर रहा था कि बिल्डिंग की हालात खराब है जिसको लेकर शिकायक की गई है लेकिन उन्होने को सुनवाई नहीं की है।

दो दिन पहले ही की थी दोस्त से बात

अनुराग ने बताया कि वह शुक्रवार को ही उसके दोस्त राहुल का काल आया था तो वह बता रहा था कि उसको नया पीजी देखना है क्योंकि यहां पर बहुत शोर रहता है। इसके अलावा बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर हो रखा है, जिसके कारण हादसे का डर बना हुआ है। उन्होने बताया कि बिल्डिंग का किराया भी अधिक है उसके बावजूद भी सुविधाएं बहुत कम है शुक्रवार को ही यह बात हो रही थी कि रविवार को करीब 2 बजे पता चला कि बिल्डिंग गिर गई है जिसमें दबने से मेरे दोस्त की मृत्यु हो गई है।

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