दिल्ली में जल्द दौड़ेंगी 2 हाइड्रोजन बसें, DTC का प्लान तैयार; प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में सरकार का बड़ा कदम
दिल्ली सरकार स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन के लिए राष्ट्रीय राजधानी में दो हाइड्रोजन-चालित बसें चलाने की योजना बना रही है। यह पहल डीटीसी और ए ...और पढ़ें

दिल्ली में जल्द ही दो हाइड्राजन बस चलाने की तैयारी। फोटो: आर्काइव
HighLights
दिल्ली में दो हाइड्रोजन-चालित बसें चलाने की योजना
डीटीसी और एनटीपीसी लिमिटेड के बीच सहयोग से संभव
स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन का लक्ष्य
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के तहत दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी में दो हाइड्रोजन-चालित बसें चलाने की योजना बना रही है।
दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) एनटीपीसी लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर काम कर रहा है, जो अपनी कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहल के तहत बसें उपलब्ध कराएगा।
परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि दिल्ली स्वच्छ, भविष्य के लिए तैयार सार्वजनिक परिवहन समाधानों की ओर लगातार बढ़ रही है। हाइड्रोजन ईंधन प्रौद्योगिकी टिकाऊ और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार परिवहन प्रणालियों की दिशा में हमारी यात्रा का एक महत्वपूर्ण कदम है।'
45 रुपये प्रति किलोमीटर से अधिक का जीसीसी
प्रस्तावित परिचालन ढांचे के तहत, एनटीपीसी के समन्वय से हाइड्रोजन ईंधन सेल बसों की प्रारंभिक तैनाती की जा रही है। ये बसें सकल लागत अनुबंध (जीसीसी) माॅडल के तहत संचालित की जाएंगी।
जिसमें डीटीसी परिचालन तैनाती में सहायता करेगी। अधिकारियों के अनुसार, स्वीकृत जीसीसी दर 45 रुपये प्रति किलोमीटर से अधिक की लागत एनटीपीसी द्वारा वहन की जाएगी।
मंत्री ने कहा, 'प्रस्तावित व्यवस्था के तहत स्वीकृत जीसीसी दरों पर परिचालन व्यय डीटीसी द्वारा वहन किया जाएगा, जबकि जीसीसी ढांचे से परे की लागतों के लिए एनटीपीसी के सीएसआर तंत्र के माध्यम से सहायता के विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।'
तकनीक को भी शामिल करने पर जोर
सिंह ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन तंत्र में उन्नत हाइड्रोजन ईंधन सेल प्रौद्योगिकी को शामिल करना है, जो शहर के चल रहे स्वच्छ गतिशीलता परिवर्तन और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ परिवहन समाधानों का पूरक होगा।
उन्होंने आगे कहा, 'एनटीपीसी जैसे संगठनों के सहयोग से, हम शून्य-उत्सर्जन प्रौद्योगिकियों को लागू करने के लिए नवीन रास्ते तलाश रहे हैं जो दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को मजबूत कर सकें। साथ ही स्वच्छ हवा और हरित भविष्य में योगदान दे सकें।'