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    अगर मानी होती सुप्रीम कोर्ट की बात तो नहीं जाती 29 लोगों की जान, MCD की बड़ी लापरवाही आई सामने

    Updated: Sun, 07 Jun 2026 08:41 PM (GMT+05:30)

    दिल्ली में सैदुलाजाब इमारत ढहने और हौजरानी आग लगने की घटनाओं में 28 लोगों की मौत हुई, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट के अवैध निर्माण पर निर्देशों का पालन करने ...और पढ़ें

    सैदुलाजाब में इमारत गिरने और हौजरनी में आग लगने की दो दुर्घटनाओं में 28 लोगों की जान चली गई।

    सैदुलाजाब में इमारत गिरने और हौजरनी में आग लगने की दो दुर्घटनाओं में 28 लोगों की जान चली गई।

    HighLights

    1. दिल्ली में दो घटनाओं में 28 लोगों की मौत।

    2. सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की एमसीडी ने की अनदेखी।

    3. आवासीय संपत्तियों का व्यावसायिक उपयोग बना कारण।

    निहाल सिंह, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में एक के बाद एक 30 मई को सैदुलाजाब में इमारत गिरने और 3 जून को हौजरनी में आग लगने की दो दुर्घटनाओं में 28 लोगों की जान चली गई। अगर, एमसीडी ने सुप्रीम कोर्ट की बात मानी होती तो इन दुर्घनाओं को रोका जा सकता था। लेकिन, मिलीभगत व राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण अवैध निर्माण, नियमों का उल्लंघन करके चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक नहीं लग सकी।

    जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 25 मार्च के अपने आर्डर में दिल्ली समेत सभी राज्यों को स्पष्ट कहां था कि जो भी व्यावसायिक गतिविधिय संपत्ति का दुरुपयोग करके चलाई जा रही है उनकी पहचान करके जानकारी दी जाए। लेकिन, वह पहचान अभी तक नहीं हो पाई है। हालांकि इसके लिए कागजी कार्रवाई जरुर पूरी हुई है।

    सुप्रीम कोर्ट के आर्डर के बाद एमसीडी आयुक्त 20 अप्रैल को आदेश निकालकर सभी जोन उपायुक्त को एक सप्ताह के भीतर यह सर्वे करने के निर्देश दिए। जिसमें सभी जोन में उन संपत्तियों की पहचान करने के लिए कहा गया था जो हैं तो रिहायशी लेकिन उपयोग उनका व्यावसायिक हो रहा है।

    इसके बाद सर्वे होने की सुगबुगहाट शुरू हुई तो कई जगह पर इसका विरोध होने लगा। साथ ही जनप्रतिनिधियों के ऊपर भी दवाब बनने लगा। पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर में तो रातों रात रिहायशी क्षेत्र में बनी दुकानो के शटर हटाकर दीवारें बनाई जाने लगी। हालांकि स्थानीय पार्षद संजीव सिंह समेत स्थानीय विधायक इसका विरोध किया तो यहां पर भी सीलिंग की कार्रवाई नहीं हुई।

    सर्वे रिपोर्ट में कोर्ट ने जताई थी नाराजगी अब देनी है एक्शन टेकन रिपोर्ट

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एमसीडी ने हलफनाना दायर करते कहा कि मास्टर प्लान में संपत्तियों के विभिन्न उपयोग की अनुमति है। 25 मई की इस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई और रिपोर्ट न देने कोर्ट ने यहां तक टिप्पणी की एमसीडी और अवैध निर्माण व दुरुपयोग करने वालों के साथ मौन सहमति हो सकती है।

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    इसलिए कोर्ट ने एमसीडी को अगली सुनवाई में एक्शन टेकन रिपोर्ट देने को कहा है। कोर्ट में यह भी बताया गया कि सरोजनी नगर और लाजपत नगर में तय सीमा से ज्यादा निर्माण हो रहे हैं। अदालत ने इसे संभावित बड़ी दुर्घटना का कारण भी बताया।

    घटना वाली दोनों ही संपत्तियों का हो रहा था दुरुपयोग

    सैदुलाजाब में इमारत गिरने की घटना हो या फिर हौजरानी में आग लगने की घटना हो। एमसीडी ने अगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सर्वे किया होता तो दोनों संपत्तियों के चिह्नित होने पर दुर्घटना शायद न होती। क्योंकि दोनों ही संपत्तियों का दुरुपयोग किया जा रहा था। दोनोें ही संपत्ति रिहायशी श्रेणी में थी और इसका व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था।

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