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    दिल्ली विश्वविद्यालय में अब कर्मचारियों को समय पर आना होगा अनिवार्य, 9:30 के बाद आने पर कटेगी छुट्टी

    Updated: Sun, 12 Apr 2026 06:33 PM (IST)

    डीयू प्रशासन ने कर्मचारियों के लिए नई हाजिरी व्यवस्था लागू की है, जिसका उद्देश्य कार्य संस्कृति में अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाना है। ...और पढ़ें

    डीयू प्रशासन ने कर्मचारियों के लिए नई हाजिरी व्यवस्था लागू की है। फाइल फोटो

    डीयू प्रशासन ने कर्मचारियों के लिए नई हाजिरी व्यवस्था लागू की है। फाइल फोटो

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) प्रशासन ने कार्य संस्कृति में अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए कर्मचारियों की उपस्थिति और समय पालन को लेकर नई हाजिरी व्यवस्था लागू कर दी है।

    विश्वविद्यालय द्वारा जारी नोटिस में कार्यालय समय, उपस्थिति और देर से आने पर कार्रवाई से जुड़े नियमों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। हालांकि, नोटिस के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह व्यवस्था शिक्षकों विशेषकर प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर पर भी लागू होगी या केवल गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों तक सीमित रहेगी। इस संबंध में फिलहाल स्पष्टीकरण की प्रतीक्षा है।

    नए दिशा-निर्देशों के अनुसार विश्वविद्यालय का कार्यालय समय सुबह 9 बजे से शाम 5:30 बजे तक निर्धारित किया गया है। सभी कर्मचारियों को प्रतिदिन 8 घंटे 30 मिनट कार्य करना अनिवार्य होगा, जिसमें आधे घंटे का लंच ब्रेक शामिल रहेगा।

    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुबह 9:10 बजे तक पहुंचने वाले कर्मचारियों को समय पर उपस्थित माना जाएगा, लेकिन 9:10 से 9:30 बजे के बीच आने वालों को उतना अतिरिक्त समय कार्यालय में रुककर कार्य करना होगा।

    यदि कोई कर्मचारी सुबह 9:30 बजे के बाद कार्यालय पहुंचता है, तो उसके खिलाफ आधे दिन अथवा पूरे दिन की छुट्टी काटने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य कार्यकुशलता बढ़ाना, विभागीय संचालन को व्यवस्थित करना और संस्थान में अनुशासन सुनिश्चित करना है।

    इसके साथ ही प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि समय पालन को लेकर किसी प्रकार की ढील नहीं दी जाएगी। देर से आने, समय से पहले जाने अथवा हाजिरी नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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    हर महीने उपस्थिति की समीक्षा रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिससे अधिकारियों और कर्मचारियों की समयबद्धता की निगरानी की जा सके। विश्वविद्यालय के इस कदम को प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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