57.3 MM बारिश में जब दिल्ली डूबी तो जिम्मेदार कौन? खुले नाले, गड्ढे और जलभराव ने बढ़ाया जान का खतरा
दिल्ली में दिनभर हुई भारी वर्षा से जलभराव और यातायात जाम की समस्या उत्पन्न हो गई, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। ...और पढ़ें

द्वारका सेक्टर-2 में सड़क पर वर्षा से हुए जलभराव के बीच गुजरते वाहन । हरीश कुमार
HighLights
भारी वर्षा से दिल्ली में व्यापक जलभराव और यातायात जाम।
एजेंसियों की लापरवाही से खुले नाले, स्वास्थ्य जोखिम बढ़े।
जगतपुर में बच्चों के नाले में गिरने जैसी घटनाएँ हुईं।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राजधानी में शुक्रवार को दिनभर वर्षा हुई, जहां एजेंसियों की लापरवाही के कारण रिहायशी इलाकों से लेकर प्रमुख सड़कों तक जलभराव हो गया। सुबह जैसे-तैसे बच्चे स्कूल गए। कोई स्कूली बच्चा रेनकोट पहनकर स्कूल पहुंचा तो कोई ऑटो व दूसरों का सहारा लेकर स्कूल पहुंचा।
इसके बाद भी कई लोग भीग गए। जबकि सड़कों और गलियों में जलभराव होने की वजह से बच्चे गंदे पानी के बीच होकर गुजरते हुए दिखाई दिए। इसी प्रकार नागरिक, जो दफ्तर या अपने जरूरी कार्यों से जाना चाहते थे, उन्हें जलभराव के कारण काफी समस्या हुई। अपने निजी वाहनों से निकले लोगों को यातायात जाम ने परेशान किया।

दिल्ली में शुक्रवार को 57.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। ऐसे में जल निकासी की व्यवस्था सही न होने की वजह से लोगों को जलभराव से जूझना पड़ा। वहीं, सड़कों पर पड़ी गंदगी जलभराव के कारण पानी में मिल गई। इसकी वजह से जब लोग इस पानी के बीच से गुजर रहे हैं तो उन पर चर्म रोग होने का खतरा बढ़ गया है। क्योंकि गंदगी के कारण लोग खुजली और अन्य तरह के त्वचा रोगों के शिकार हो सकते हैं।
मध्य दिल्ली की बात करें तो आईटीओ, बाबा खड़क सिंह मार्ग, पहाड़गंज का मुल्तानी ढांडा, देशबंधु गुप्ता रोड में जलभराव की काफी समस्या देखी गई। इसकी वजह से लोगों को काफी दिक्कत हुई। कई गाड़ियां भी जलभराव के कारण खराब हो गईं। यहां व्यापारी से लेकर रोज अपने-अपने दैनिक कार्यों पर जाने वाले लोग जलभराव के कारण परेशान हुए।
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उत्तरी बाहरी दिल्लीः जगतपुर गांव में अब भी खुली हैं नालियां, प्रशासन ने मूंद रखी हैं आंखें
बुराड़ी के जगतपुर गांव में वैसे तो वर्षा से पहले ही नालियों और नालों पर स्लैब रखे जाने चाहिए थे, लेकिन एमसीडी और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने आंखें बंद कर लीं, जिसका खामियाजा वर्षा के दौरान लोगों को भुगतना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को निगम स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे जलभराव के कारण नाले में बह गए, क्योंकि जलभराव होने पर बच्चों को सड़क और नाले में अंतर समझ में नहीं आया।

इसकी वजह से वे बह गए। गनीमत रही कि वहां मौजूद ऑटो चालक व स्थानीय लोगों ने उन्हें देख लिया और समय रहते बचा लिया। हालांकि घटना के बाद अभी तक एमसीडी से लेकर बाढ़ नियंत्रण विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की है। घटनास्थल पर तो बैरिकेडिंग कर दी गई है, लेकिन इस इलाके में कई ऐसे नाले हैं, जो पांच से छह फीट तक गहरे हैं और उन पर स्लैब तक नहीं है। इससे वर्षा के दौरान जलभराव होने पर लोगों की जान पर खतरा बना हुआ है।
हालांकि स्थानीय पार्षद गगन चौधरी का दावा है कि मानसून से पूर्व एमसीडी से लेकर पीडब्ल्यूडी, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को शिकायत और जानकारी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस घटना के लिए एमसीडी और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग जिम्मेदार हैं।

दोनों ही विभाग अपनी जिम्मेदारी लेने से बच रहे हैं। दोनों इस नाले की जिम्मेदारी एक-दूसरे की बता रहे हैं। इससे यह साबित होता है कि प्रशासन ने अब भी आंखें मूंद रखी हैं और बड़ी घटना होने का इंतजार कर रहा है। जगतपुर गांव के अलावा उत्तरी बाहरी दिल्ली के मुकरबा चौक पर जलभराव के कारण वाहनों की लंबी-लंबी कतार नजर आई।
मधुबन चौक, पीरागढ़ी चौक, मुंडका, कराला, किराड़ी, मंगोलपुरी वाई-ब्लॉक चौक, आजादपुर मंडी के सामने, सुल्तानपुरी टर्मिनल, कोहाट एन्क्लेव, नेताजी सुभाष प्लेस, ब्रिटानिया चौक सहित कई स्थानों पर वर्षा के बाद जलभराव देखा गया।
दक्षिणी दिल्लीः संगम विहार में चार-चार फीट पानी, खाने-पीने तक की बड़ी परेशानी
राजधानी दिल्ली में खासतौर पर दक्षिणी दिल्ली में पिछले चार दिनों से रुक-रुककर हो रही वर्षा के चलते कई इलाकों में जलभराव की समस्या बन गई है। जलभराव के कारण लोगों को खाने-पीने तक की परेशानी बढ़ गई है, क्योंकि लोग जलभराव के कारण राशन और सब्जी खरीदने तक नहीं जा पा रहे हैं। संगम विहार के रतिया मार्ग, शनि बाजार रोड और मंगल बाजार रोड पर तीन से चार फीट तक पानी भरा होने से जनजीवन प्रभावित है।
बच्चों को स्कूल जाने से लेकर नौकरीपेशा लोगों को दफ्तर जाने में खासी परेशानी हुई। संगम विहार में वर्षा जल निकासी के लिए नए सिरे से ड्रेन बनाने का दावा किया गया था, पर मानसून से पहले काम पूरा नहीं हो पाया। जलभराव की समस्या का निदान न होने से संगम विहार की लगभग तीन लाख की आबादी परेशानी झेल रही है।
इसके अलावा देवली, पुष्प विहार, फतेहपुर बेरी, कालका गढ़ी गांव, मीठापुर चौक आदि क्षेत्रों में भी वर्षा के चलते सड़कों से लेकर गलियों तक पानी भरा है। रोजमर्रा के कामों के लिए लोगों को घुटनों तक पानी में घुसकर जाना पड़ रहा है।
पूर्वी दिल्लीः एनएच-9 से लेकर रिहायशी इलाकों की सड़कें बनीं तालाब
सुबह से लगातार हो रही वर्षा ने यमुनापार की जल निकासी व्यवस्था की तैयारियों की पोल खोल दी। पटपड़गंज मार्ग, एनएच-9 के सर्विस रोड पर गाजीपुर के पास, गीता कॉलोनी के रिहायशी इलाकों, शकरपुर और मौजपुर सहित कई क्षेत्रों में सड़कों पर घंटों तक जलभराव बना रहा। सबसे अधिक परेशानी पटपड़गंज इंडस्ट्रियल एरिया में देखने को मिली, जहां पहले से टूटी सड़कें पानी में डूब गईं। गड्ढे दिखाई नहीं देने से वाहन चालकों को बेहद धीमी गति से गुजरना पड़ा और कई स्थानों पर लंबा जाम लग गया।
वर्षा से बेहाल द्वारका और आसपास के इलाके, अंदरूनी सड़कें बनीं तालाब, हादसों और जाम से जनता हलकानद्वारका के सेक्टर-6 व 7 कनेक्टिंग रोड, सेक्टर-12 मेट्रो स्टेशन मार्ग, सेक्टर-1-2 लिंक रोड और डाबरी-पालम की आंतरिक सड़कों पर घुटनों तक पानी भर गया।
यही हाल पश्चिमी दिल्ली का है, जहां जनकपुरी सी-ब्लॉक, उत्तम नगर की आर्य समाज रोड व हस्तसाल रोड, पश्चिम विहार की ब्लॉक सड़कों और तिलक नगर मार्केट की गलियों में जलभराव हो गया। जलभराव के कारण सड़कों पर छिपे गहरे गड्ढे और खुले नालों के ढक्कन जानलेवा साबित हो रहे हैं।