पसीने से तरबतर दिल्ली-NCR, किन वजहों से मानसून के बीच थम गई बारिश?
उत्तर भारत, खासकर दिल्ली-एनसीआर में मानसून के लंबे ब्रेक के कारण भीषण गर्मी और असहनीय उमस का सामना करना पड़ रहा है। अल नीनो और पश्चिमी हवाओं के प्रभाव ...और पढ़ें
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उत्तर भारत, खासकर दिल्ली-एनसीआर में मानसून के लंबे ब्रेक के कारण भीषण गर्मी और असहनीय उमस का सामना करना पड़ रहा है।
HighLights
अल नीनो के कारण मानसून प्रवाह में 10-12 दिन का लंबा ठहराव।
शुष्क पश्चिमी हवाओं और हिमालय पर खिसकी कम दबाव रेखा।
रविवार रात से मौसम बदलेगा, अगले 3-4 दिन बारिश की उम्मीद।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। मानसून के इस सीजन में जहां पूरे उत्तर भारत में झमाझम वर्षा और थोड़ी ठंडक रहती है, वहीं इस बार मैदानी राज्यों का परिदृश्य विपरीत है। दिल्ली और एनसीआर सहित उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार इत्यादि राज्य भी भीषण गर्मी और असहनीय उमस की चपेट में हैं। तापमान में तपन और हवा में असामान्य नमी के इस असाधारण मेल से जनजीवन बेहाल है। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, इस अप्रत्याशित स्थिति के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े भौगोलिक कारण जिम्मेदार हैं।
पुरवइया थमी, पश्चिमी हवाएं सक्रिय
मौसम विभाग के अनुसार, सामान्य मानसूनी चक्र के दौरान भारतीय भूभाग पर 'पुरवइया' (पूर्वी हवाएं) प्रभावी रहती हैं। बंगाल की खाड़ी से आने वाली ये हवाएं अपने साथ प्रचुर नमी लाती हैं, जिससे बादल बनते हैं और वर्षा होती है। लेकिन, इस वर्ष प्रशांत महासागर में सक्रिय 'अल नीनो' के कारण मानसूनी परिस्थितियों पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।
इसके असर से मानसून के प्रवाह में करीब 10 से 12 दिनों का एक लंबा ठहराव आ गया है। इस लंबे अंतराल के कारण ठंडी पुरवइया हवाएं पूरी तरह रुक गई हैं और वायुमंडल में शुष्क व गर्म पश्चिमी हवाएं हावी हो गई हैं। थार मरुस्थल की ओर से आने वाली ये पश्चिमी हवाएं मैदानी क्षेत्रों में भारी तपन ला रही हैं।
हिमालय की चोटियों पर कम दबाव की रेखा
मौसम में आए इस बदलाव का दूसरा मुख्य कारण कम दबाव की रेखा का अपनी स्वाभाविक भौगोलिक स्थिति से खिसक जाना है। सामान्यतः बादलों की यह मानसूनी पट्टी देश के मैदानी राज्यों के ऊपर सक्रिय रहती है, जिससे यहाँ नियमित अंतराल पर वर्षा होती है। लेकिन 10- 12 दिनों से जारी ठहराव के कारण यह कम दबाव की रेखा मैदानी भागों से दूर उत्तर में हिमालय के पहाड़ों पर ऊंचाई की तरफ खिसक गई है।
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उमस का घातक तालमेल
कम दबाव की रेखा के पहाड़ों पर चले जाने से मैदानी क्षेत्रों में वर्षा पूरी तरह थम गई। दूसरी तरफ, निचले वायुमंडल में मौजूद पहले की नमी भी फंसी हुई थी। जब इस अत्यधिक नमी के ऊपर रेगिस्तानी इलाकों से आ रहीं शुष्क व गर्म पश्चिमी हवाओं का प्रभाव पड़ा, तो दोनों ने मिलकर असहनीय चिपचिपी उमस पैदा कर दी। यही कारण है कि बिना वर्षा के भी हवा में भारी उमस बनी हुई है।
रविवार रात से नीचे आएगी रेखा
स्काइमेट वेदर के उपाध्यक्ष (मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन) महेश पलावत के अनुसार, पहाड़ों पर गई कम दबाव की रेखा अब पुनः दक्षिण की ओर मैदानी इलाकों की तरफ खिसक रही है। इसके प्रभाव से रविवार रात से ही मौसम बदलने लगेगा। फिर सोमवार से अगले तीन से चार दिनों तक कई इलाकों में ठीक-ठाक वर्षा होने की संभावना है, जिससे यह असामान्य स्थिति समाप्त होगी।