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करीब डेढ़ दशक बाद भी अधूरे हैं दिल्ली की महिलाओं से किए वादे, फीडर बस से महिला मार्शल तक नहीं पहुंची सुरक्षा

Updated: Tue, 01 Sep 2026 07:17 AM (IST)

निर्भया कांड के बाद दिल्ली में महिला सुरक्षा के लिए किए गए कई वादे और योजनाएं, जैसे फीडर बसें और ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. मेट्रो फीडर बसें और डार्क स्पॉट खत्म करने के वादे अधूरे।

  2. बसों में मार्शल और महिला थाने खोलने की योजनाएं अधूरी रहीं।

  3. वन स्टॉप सेंटर और त्वरित सुनवाई के लक्ष्य भी पूरे नहीं हुए।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिसंबर 2012 में निर्भया कांड के बाद दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सरकार और पुलिस की ओर से कई बड़े सुधारों और योजनाओं की घोषणा की गई थी।

उद्देश्य था कि राजधानी में महिलाएं रात के समय भी खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें और पुलिस व्यवस्था से लेकर सार्वजनिक परिवहन तक में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों। हालांकि, करीब डेढ़ दशक बाद भी इनमें से कई घोषणाएं पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकीं। कई योजनाएं कागजों और दावों तक ही सीमित रह गईं।

निर्भया कांड के बाद रात दस बजे के बाद सभी मेट्रो रूटों पर फीडर बसों की सुविधा शुरू करने की बात कही गई थी। इसका उद्देश्य महिलाओं को मेट्रो स्टेशन से ऐसे सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना था, जहां से वे दूसरी सवारी लेकर आसानी से घर पहुंच सकें।

हालांकि, यह व्यवस्था राजधानी में व्यापक और प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो सकी। इसी तरह दिल्ली के सभी डार्क स्पाट खत्म करने का लक्ष्य भी तय किया गया था।

इसके लिए अंधेरे और सूनसान स्थानों पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा-व्यवस्था करने की बात कही गई थी, लेकिन आज भी राजधानी में कई ऐसे स्थान हैं जहां रात के समय पर्याप्त रोशनी और सुरक्षा व्यवस्था की कमी की शिकायतें सामने आती रहती हैं।

बस में मार्शल तैनात करने की योजना साबित हुई हवाहवाई

सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित बनाने के लिए टेंपो और बसों को अलग-अलग रंगों में करने की योजना भी प्रस्तावित थी, लेकिन इसे भी पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका। बसों में महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए हर बस में मार्शल तैनात करने का फैसला भी लंबे समय तक चर्चा में रहा, लेकिन सभी बसों में नियमित रूप से मार्शल की तैनाती सुनिश्चित नहीं हो सकी।

वहीं महिलाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई तेज करने के लिए दुष्कर्म के मामलों में 14 दिन के भीतर ट्रायल शुरू करने का लक्ष्य रखा गया था। व्यवहार में मुकदमों की जांच, चार्जशीट और न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले समय के कारण यह लक्ष्य भी पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया।

हर जिले में नहीं खुल सके महिला थाने

महिला सुरक्षा के लिए हर जिले में महिला थाना खोलने और सभी थानों में करीब 33 प्रतिशत महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी सुनिश्चित करने की घोषणा भी की गई थी। लेकिन दोनों लक्ष्य अब तक पूरी तरह हासिल नहीं हो सके हैं। वन स्टाप सेंटर की व्यवस्था भी लंबे समय से महिला सुरक्षा से जुड़ा अहम मुद्दा रही है।

पुलिस का कहना है कि पीड़ित महिलाओं को एक ही स्थान पर जरूरी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है, लेकिन निर्भया कांड के बाद जिस व्यापक और समर्पित वन स्टाप सेंटर व्यवस्था की परिकल्पना की गई थी, उसका लक्ष्य पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सका। ऐसे में निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा को लेकर किए गए कई बड़े वादे आज भी अधूरे नजर आते हैं।

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