कैग ऑडिट के बिना दिल्ली डिस्कॉम को नहीं मिलेगा नियामक संपत्ति का भुगतान: ऊर्जा मंत्री आशीष सूद
दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया है कि बिजली वितरण कंपनियों को नियामक संपत्ति का भुगतान कैग ऑडिट के बिना नहीं किया जाएगा। ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि ल ...और पढ़ें

दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद।
HighLights
दिल्ली सरकार कैग ऑडिट के बिना भुगतान नहीं करेगी।
लगभग 38 हजार करोड़ की नियामक संपत्ति का मामला।
उपभोक्ताओं पर बोझ रोकने के लिए जांच आवश्यक।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को नियामक संपत्ति (रेगुलेटरी असेट्स) भुगतान को लेकर दिल्ली सरकार कानूनी लड़ाई को आगे बढ़ाएगी।
दिल्ली सरकार के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा है कि भुगतान से पहले डिस्कॉम के खातों की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) जांच आवश्यक है। इसके बिना लगभग 38 हजार करोड़ का भुगतान नहीं किया जाएगा क्योंकि इससे दिल्ली के उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ेगा।
कैग जांच से स्थिति स्पष्ट होगी कि नियामक संपत्ति को लेकर डिस्काम का दावा कितना सही है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष अगस्त में डिस्काम को नियामक संपत्ति का चार वर्षों में भुगतान और इनके खातों की जांच का आदेश दिया था।
डीईआरसी की अपील पर भुगतान की अवधि चार वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष
दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) की अपील पर भुगतान की अवधि चार वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष किया गया है। यह राशि उपभोक्ताओं से वसूला जाना है। बिजली नेटवर्क पर होने वाले खर्च को डिस्काम नियामक परिसंपत्ति के रूप में दावा करती हैं।
डीईआरसी ने कैग से जांच की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) ने पिछले माह इस पर रोक दी है। तीन महीने के अंदर स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करके जांच करने का निर्देश दिया गया है। उसके बाद डीईआरसी ने कैग द्वारा सूचीबद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंसी (सीए) फर्म द्वारा उनके खातों की जांच करने की प्रक्रिया शुरू की है।
दिल्ली सरकार के ऊर्जा मंत्री ने कहा कि कैग द्वारा सूचीबद्ध सीए फर्म से जांच मंजूर नहीं है। सीधे कैग से जांच होनी चाहिए। इससे पता चलेगा कि डिस्काम किस आधार पर इतना भारी-भरकम राशि का दावा कर रही है।
सरकार के पास आयोग को निर्देश देने का अधिकार
डीईआरसी द्वारा जांच प्रक्रिया शुरू करने पर उनका कहना है कि विद्युत अधिनियम के अनुसार सरकार के पास आयोग को निर्देश देने का अधिकार है। इस मामले में इस अधिकार का उपयोग किया जाएगा। फिर से सुप्रीम कोर्ट में सरकार जाएगी। कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। सरकार उपभोक्ताओं के हित की रक्षा करेगी।
जनवरी में डीईआरसी द्वारा विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण में दी गई जानकारी के अनुसार बिजली वितरण कंपनियों का बकाया नियामक परिसंपत्तिः
| कंपनी का नाम | राजस्व (करोड़ रुपये) |
|---|---|
| राजधानी पावर लिमिटेड (बीआरपीएल) | 19,174 |
| बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (बीवाईपीएल) | 12,333 |
| टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीएल) | 7,046 |
| कुल | 38,553 |
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