दिल्ली में मानसून के दौरान यमुना नदी में बढ़ता मौत का खतरा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
दिल्ली में यमुना नदी में डूबने की घटनाएं बढ़ रही हैं, खासकर मानसून के दौरान, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासनिक लापरवाही और लो ...और पढ़ें
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यमुना में बढ़ रहे डूबने के हादसे सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल रहे।
HighLights
दिल्ली में यमुना में डूबने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।
सुरक्षा इंतजामों की कमी से हादसे जानलेवा साबित हो रहे हैं।
पिछले वर्ष 110 शव बरामद, 34 लोगों के शव नहीं मिले।
मोहम्मद साकिब, नई दिल्ली। राजधानी में यमुना नदी और उससे जुड़े जलाशयों में डूबने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में अलीपुर में चार किशोरों की डूबने से हुई मौत ने एक बार फिर नदी किनारे सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है।
मानसून के दौरान जलस्तर बढ़ने और तेज बहाव के बावजूद कई संवेदनशील घाटों और यमुना किनारे चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग, लाइफगार्ड और बचाव उपकरणों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में प्रशासनिक लापरवाही और लोगों की असावधानी मिलकर जानलेवा साबित हो रही है।
हर वर्ष वर्षा के मौसम में यमुना का जलस्तर बढ़ने के साथ हादसों का खतरा भी बढ़ जाता है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग नदी में नहाने, मौज-मस्ती करने और गहरे पानी में उतरने से बाज नहीं आते। प्रशासन और पुलिस लगातार लोगों से नदी से दूर रहने की अपील करते हैं, लेकिन इसका असर सीमित ही दिखाई देता है। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से हादसों की आशंका और बढ़ जाती है।
110 शव किए गए बरामद
आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। पिछले वर्ष यमुना क्षेत्र से डूबने की 348 काल प्राप्त हुई थीं। इनमें 61 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि 110 शव बरामद किए गए। सबसे चिंताजनक तथ्य यह रहा कि डूबने वाले 34 लोगों के शव अब तक नहीं मिल सके।
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मौज मस्ती पर पड़ रही जान पर भारी
उत्तर दिल्ली के बुराड़ी, वजीराबाद, तिमारपुर और आसपास के क्षेत्रों में अक्सर युवाओं के समूह यमुना में नहाने और मौज-मस्ती के लिए पहुंचते हैं। कई बार तेज बहाव और गहराई का अंदाजा न लगने के कारण वे हादसे का शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा सिग्नेचर ब्रिज समेत अन्य स्थानों से यमुना में छलांग लगाकर आत्महत्या करने के मामले भी समय-समय पर सामने आते रहते हैं।
यमुना का बढ़ा जलस्तर
हिमाचल प्रदेश से यमुना में अधिक पानी आने के कारण हरियाणा के हथनी कुंड बैराज से पहले की तुलना में अधिक पानी छोड़ा जा रहा है। शुक्रवार को सुबह 10 बजे अधिकतम 38,379 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। रात में भी 30 हजार क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया, जिससे रविवार को दिल्ली में पुराना लोहा पुल के पास जलस्तर 204 मीटर ऊपर हो गया। 205.33 मीटर खतरे का निशान है।
यमुना में डूबने से होने वाले प्रमुख हादसे
- 13 जुलाई - हिरनकी गांव, अलीपुर (ठोकर-24) यमुना में नहाने के दौरान चार किशोर तेज बहाव में बह गए। चारों की मौत हो गई।
- 14 अप्रैल 2026 - सूर घाट, तिमारपुर से यमुना में नहाने गए दो 13 वर्षीय किशोर गहरे पानी में डूब गए। दोनों के शव बरामद किए गए।
- 25 जनवरी 2026 - मयूर विहार का 20 वर्षीय युवक मूर्ति विसर्जन के दौरान यमुना में डूब गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
- 14 सितंबर 2025 - वजीराबाद का 31 वर्षीय युवक यमुना में डूब गया। उसके साथ मौजूद एक बच्चे की तलाश के लिए भी बचाव अभियान चलाया गया।
- 8 जुलाई 2022 - चौहान पट्टी, बुराड़ी (ठोकर-7) से यमुना में नहाने गए चार बच्चों की डूबने से मौत हो गई। पुलिस को नदी किनारे उनके कपड़े और स्कूटी मिली थी।
- 13 अप्रैल 2022 - जैतपुर से यमुना में नहाने गए चार किशोर डूब गए। बचाव अभियान के दौरान सभी के शव बरामद किए गए।
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