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    दिल्ली के 310 परिवारों को सरकारी अल्टीमेटम, 15 दिन में खाली करने होंगे घर; काशी की तर्ज पर संवरेंगे यमुना घाट

    Updated: Thu, 07 May 2026 02:05 PM (IST)

    दिल्ली सरकार काशी की तर्ज पर यमुना घाटों को भव्य बनाने की तैयारी में है, जिसके तहत यमुना बाजार के 30 घाटों के किनारे बसे पंडा परिवारों को 15 दिन में घ ...और पढ़ें

    दिल्ली सरकार काशी की तर्ज पर यमुना घाटों के पुनर्विकास में तेजी ला रही है। इमेज एआई

    दिल्ली सरकार काशी की तर्ज पर यमुना घाटों के पुनर्विकास में तेजी ला रही है। इमेज एआई

    HighLights

    1. दिल्ली सरकार यमुना घाटों को काशी की तर्ज पर संवारेगी।

    2. यमुना बाजार के 310 पंडा परिवारों को बेदखली नोटिस।

    3. परिवारों ने आजीविका और पुनर्वास की मांग उठाई।

    नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। काशी के गंगा घाटों की तर्ज पर दिल्ली में भी यमुना किनारे स्थित पक्के घाट दिव्य, भव्य व आस्था से परिपूर्ण हाेंगे। दिल्ली सरकार ने उस दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं।

    उसके तहत यमुना बाजार स्थित पक्के 30 घाटों के किनारे के पंडों (तीर्थ पुरोहित) की बसावट को हटाने के आदेश दिए हैं। उससे संबंधित नोटिस जिला प्रशासन ने मंगलवार को जारी किया है, जिसमें, 15 दिन की अवधि दी गई है।

    हालांकि, इस प्रयास के साथ दशकाें से कई छह से सात पीढ़ियों से रहते पंडा परिवारों की चिंता बढ़ गई है। वे यमुना से जुड़ाव, आजीविका, कर्मकांड व धार्मिक आस्था का हवाला देकर घाट से 300 मीटर के दायरे में उन्हें रहने के लिए जगह तथा कर्मकांड के लिए घाटों पर उचित स्थान देने की मांग की है।

    पक्के घाट पांडव कालीन माने जाते हैं

    ये पक्के घाट पांडव कालीन माने जाते हैं। प्रमाणिक उल्लेख 100 वर्ष से कुछ अधिक का है। उन्हें पुरानी दिल्ली के धनाढ्य व धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों द्वारा तकरीबन 100 वर्ष पूर्व बनवाए गए हैं। जबकि, घाट ऊपर पंडों के पुराने मकान है, जो एक चौड़ी मोटी दीवार तक विस्तार लिए हुए हैं। कई घाटों की पंडे महिलाएं हैं।

    पंडा सुरेश चंद शर्मा कहते हैं कि उन्हें घाटों के पुनर्विकास से आपत्ति नहीं है। पर उसमें हाई कोर्ट के आदेश का पालन होना चाहिए और घाट के नजदीक ही पुर्नवास होना चाहिए।

    यहां पंडों का करीब 60 परिवार रहता है। जिनके 310 घराें को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने डीडीए कानून के तहत खाली करने का नोटिस भेजा है।

    पंडे उर्मिला शर्मा बताती हैं कि वर्ष 2006 में भी दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने घाट खाली कराने की कोशिश की थी। तब कुछ लोग मान गए और बवाना में आवंटित जमीन ले ली थी। लेकिन अधिकांश पंडों ने यमुना छोड़ना स्वीकार नहीं किया। मामला हाई कोर्ट में गया, तब कोर्ट ने उन लोगों को घाट के 300 मीटर के दायरे में रहने के लिए स्थान उपलब्ध कराने का आदेश डीडीए को दिया था, 20 वर्ष बाद भी उस निर्णय का पालन नहीं हुआ है।

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    सरकार की श्रद्धा, घाटों किनारे आस्था

    दिल्ली में भाजपा की सरकार बनने पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यमुना पर अगाध श्रद्धा व्यक्त की है। जीत के बाद उन्होंने यमुना आरती कर पदभार ग्रहण किया। पूर्व राज्यपाल वीके सक्सेना का भी यमुना की सफाई व सुंदरता पर पूरा जोर रहा। कश्मीरी गेट स्थित कुदेशिया घाट को नया व भव्य रूप देकर वासुदेव घाट बनाया गया है। उसी तरह की कोशिश यमुना बाजार के 30 घाटों को लेकर भी है। बसावट खाली कर वहां हरियाली, भक्तों के लिए सुविधा और स्वच्छ वातावरण विकसित करने पर है।

    50 से अधिक मंदिरों को लेकर संशय

    घाटों पर 50 से अधिक मंदिर और यज्ञशाला स्थापित है। उसे लेकर अभी तस्वीर स्पष्ट नहीं है। इस संबंध में पूछे जाने पर जिला प्रशासन ने कहा कि वर्तमान में कुछ तय नहीं किया गया है। पर उचित प्रबंध होगा। यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि, काशी में घाटों के पुनर्विकास के दौरान और घाट तक सड़कोंं के चौड़ीकरण में मंदिरों को हटाने का मामला विवादों में रहा था।

    डीडीएमए कानून के तहत नोटिस पर उठा रहे निवासी सवाल

    डीएमए कानून के तहत नोटिस में डीडीएमए ने कहा कि ''ओ जाेन'' क्षेत्र में स्थित यह बसावट प्रत्येक वर्ष बाढ़ से प्रभावित होता है, जिससे जान माल की हानि होती है। ऐसे में इस ''अवैध निर्माण'' को 15 दिन में खाली कर दें। उसके बाद उसे कभी भी गिराया जा सकता है। वहीं, स्थानीय निवासी नितिन शर्मा कहते हैं कि डीएमए कानून में किसी का घर गिराए जाने का प्रविधान नहीं है।

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