दिल्ली में बाढ़ का खतरा... पिछले 200 वर्षों में 68 प्रतिशत सिकुड़ गई यमुना, शोध में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
यमुना में गाद और अतिक्रमण के कारण जलधारण क्षमता घट गई है, जिससे हथनी कुंड से कम पानी छोड़ने पर भी जलस्तर चेतावनी स्तर के करीब पहुंच जाता है। ...और पढ़ें
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यमुना में गाद और अतिक्रमण के कारण जलधारण क्षमता घट गई है। फाइल फोटो
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। तलहटी में जमी गाद और डूब क्षेत्र में अतिक्रमण के कारण यमुना की जलधारण क्षमता कम होती जा रही है। यही कारण है कि मानसून के दिनों में हरियाणा के हथनी कुंड बैराज से पहले की तुलना में कम पानी छोड़े जाने के बाद भी इसका जलस्तर बढ़ जाता है।
इस वर्ष अभी तक वहां से बहुत अधिक पानी नहीं छोड़ा गया है। पिछले सप्ताह लगभग 38 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने से ही दिल्ली में लोहा पुल के पास नदी का जलस्तर चेतावनी स्तर 204.5 मीटर के करीब पहुंच गया था। इससे आने वाले दिनों में जलस्तर खतरे के निशान को पार कर सकता है और इससे आवासीय क्षेत्र में पानी भरने का खतरा है।

जुलाई, 2023 में दिल्ली में बाढ़ आने का भी गाद व अतिक्रमण प्रमुख कारण था। पिछले वर्ष भी यमुना खादर के साथ ही सिविल लाइंस तक पानी पहुंच गया था। उस समय भी इसकी सफाई का मुद्दा उठा था। नदी के उत्खनन के लिए एनजीटी से अनुमति लेने की बात कही गई थी। परंतु, इस वर्ष मानसून आने तक स्थिति में कोई सुधार नहीं है।

हथनी कुंड से सितंबर, 1978 में आठ लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था दिल्ली में लोहा पुल के पास यमुना का जलस्तर 207.49 मीटर पहुंचा था। वहीं, जुलाई, 2023 में मात्र 3.59 क्यूसेक पानी छोड़े जाने से जलस्तर 208.66 मीटर और पिछले वर्ष अगस्त में 3.29 क्यूसेक पानी छोड़ने से जलस्तर 207.88 मीटर तक पहुंच गया।
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इससे स्पष्ट है कि 1978 की तुलना में यमुना की जल-धारण क्षमता मात्र 50 प्रतिशत रह गई है। इसका मुख्य कारण नदी डूब क्षेत्र में अतिक्रमण व निर्माण और इसकी तलहटी पर गाद जमना है। वर्ष 2023 की बाढ़ के बाद दिल्ली सरकार सहित केंद्र सरकार द्वारा गठित समितियों की रिपोर्ट में इसे लेकर चिंता जताई गई है। इसके बाद भी समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये गए हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय और भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आइआइएसईआर) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार वर्ष 1799 की तुलना में 89 प्रतिशत और पिछले दो सौ वर्षों में यमुना की चौड़ाई 68 प्रतिशत तक कम हो गई है। वर्ष 1799 में दिल्ली में नदी की चौड़ाई 658 मीटर तक थी जो कम होकर 210 मीटर रह गई है। इससे अनुमानित जल प्रवाह 30 हजार घन मीटर प्रति सेकेंड से घटकर मात्र 3900 घन मीटर प्रति सेकेंड रह गया है।
साउथ एशिया नेटवर्क आन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल (संड्रप) के सहायक समन्वयक सबीएस रावत का कहना है कि मानसून के शुरू में हथनी कुंड से छोड़ा गया अधिक पानी दिल्ली पहुंचने में आम तौर पर 72 घंटे का समय लेता है। लेकिन 10 जुलाई को सुबह 10 बजे नदी में अधिकतम 38,379 क्यूसेक पानी छोड़ा गया और 48 घंटे में दिल्ली में जलस्तर 204.05 मीटर दर्ज किया गया।
इससे पता चलता है कि पानी के पहुंचने का समय काफी कम हो गया है। पिछले कुछ वर्षों में यमुना नदी के तल में बहुत ज़्यादा गाद जमा हो गई है, जिससे पानी ले जाने की उसकी क्षमता कम हो गई है।
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