दिल्ली चिड़ियाघर में लौटेगी रौनक, 30 साल बाद दिखेगा 'माउस डियर' और 2,943 नए वन्यजीवों की होगी एंट्री
दिल्ली चिड़ियाघर में 109 नई प्रजातियों के 2,943 वन्यजीव लाने की योजना है, जिससे कुल प्रजातियां 201 हो जाएंगी। केंद्र सरकार की 3.78 करोड़ रुपये की आधुन ...और पढ़ें

दिल्ली के चिड़ियाघर में कई नई प्रजातियां आने वाली हैं। फोटो: एआई जनरेटेड
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। बीते कुछ वर्षों में वन्यजीवों की घटती संख्या और कई आकर्षक प्रजातियों के खत्म होने से फीका पड़ चुके चिड़ियाघर की रौनक लौटाने की तैयारी शुरू हो गई है।
केंद्र सरकार की प्रस्तावित आधुनिकीकरण योजना के तहत चिड़ियाघर में 109 नई प्रजातियों के 2,943 वन्यजीव लाने की योजना बनाई गई है। इसके बाद यहां वन्यजीवों की कुल प्रजातियां बढ़कर 201 हो जाएंगी।
109 नई प्रजातियां होंगी शामिल
चिड़ियाघर प्रशासन के अनुसार नई प्रजातियों में चीता, न्यू वर्ल्ड बंदर, माउस डियर (काकर) और तितलियां प्रमुख हैं। करीब 30 वर्ष बाद माउस डियर की दिल्ली चिड़ियाघर में वापसी होगी।
अधिकांश वन्यजीव देश के अन्य चिड़ियाघरों के साथ एक्सचेंज कार्यक्रम के जरिए लाए जाएंगे। इसके लिए संभावित चिड़ियाघरों की सूची भी तैयार की जा रही है।
घट रही थी वन्यजीवों की विविधता
दरअसल, पिछले तीन वर्षों में दिल्ली चिड़ियाघर में वन्यजीवों की विविधता लगातार घटी है। जहां पहले यहां 99 प्रजातियों के वन्यजीव थे, वहीं अब यह संख्या घटकर 92 रह गई है।
कुल वन्यजीवों की संख्या भी घटकर 1,255 पर पहुंच गई है। कई ऐसी प्रजातियां, जो कभी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र थीं, अब यहां मौजूद नहीं हैं।
कई प्रमुख प्रजातियां हो चुकी हैं खत्म
चिड़ियाघर ने वर्ष 2019 में अपना अंतिम चिंपैंजी खो दिया था। वर्ष 2013 से यहां जेब्रा नहीं हैं, जबकि वर्ष 2014 के बाद से जिराफ भी नहीं बचे।
वर्तमान में यहां अफ्रीकी हाथी भी नहीं है। नई योजना का उद्देश्य इन खाली स्थानों को भरने के साथ संरक्षण, प्रजनन और जन-जागरूकता को मजबूत करना है।
आधुनिकीकरण पर 3.78 करोड़ रुपये होंगे खर्च
केंद्र सरकार ने चिड़ियाघर के आधुनिकीकरण के लिए 3.78 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसके तहत नई प्रजातियों को शामिल करने के साथ संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रमों को भी मजबूत किया जाएगा।
नई प्रजातियों के शामिल होने से न केवल चिड़ियाघर की जैव विविधता बढ़ेगी, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, प्रजनन, शोध और पर्यावरण शिक्षा को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।