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दिल्ली Zoo में पक्षियों की चहचहाहट के बीच खास मेहमानों की दस्तक, 150 पेंटेड स्टार्क ने बनाया आशियाना

Published: Sun, 23 Aug 2026 10:41 PM (IST)

दिल्ली चिड़ियाघर में 150 से अधिक पेंटेड स्टार्क ने डेरा डाला है और घोंसले बनाना शुरू कर दिया है, जो ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

एआई जेनेरेटेड इमेज।

HighLights

  1. दिल्ली चिड़ियाघर में 150 से अधिक पेंटेड स्टार्क का आगमन।

  2. प्रवासी पक्षियों का घोंसला बनाना स्वस्थ आवास का संकेत।

  3. बर्ड वाक में 42 पक्षी प्रजातियाँ और 40 पेड़ दर्ज।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (जू) में इन दिनों पक्षियों की चहचहाहट के बीच एक खास नजारा देखने को मिल रहा है। चिड़ियाघर के तालाब क्षेत्र में 150 से अधिक पेंटेड स्टार्क ने डेरा डाल दिया है। अगस्त के दूसरे सप्ताह में पहुंचे इन प्रवासी पक्षियों ने आसपास के पेड़ों पर घोंसले बनाना शुरू कर दिया है।

बड़ी संख्या में पेंटेड स्टार्क का पहुंचना और प्रजनन गतिविधियां शुरू करना चिड़ियाघर के आर्द्र क्षेत्र और आसपास के प्राकृतिक आवास के स्वस्थ होने का संकेत माना जा रहा है।

रविवार को आयोजित दूसरे ट्री वाक और 11वें संडे बर्ड वाक के दौरान प्रतिभागियों ने इस जैव विविधता को करीब से देखा।

नागरिक विज्ञान पहल के तहत हुए कार्यक्रम में प्रकृति प्रेमियों, विद्यार्थियों, वन्यजीव फोटोग्राफरों, शोधकर्ताओं, इंटर्न और स्वयंसेवकों समेत 25 लोग शामिल हुए। वाक के दौरान 42 पक्षी प्रजातियों के 300 से अधिक पक्षी और 40 पेड़ प्रजातियां दर्ज की गईं।

चार साल से एक ही पेड़ पर लौट रहा ‘रिंगो’

बर्ड वाक में पक्षी विशेषज्ञ डा. पारितोष अहमद ने पक्षियों के व्यवहार और प्रजनन गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने ‘रिंगो’ नाम के नर पेंटेड स्टार्क का उदाहरण देते हुए बताया कि वह लगातार चार वर्षों से इसी क्षेत्र में घोंसला बना रहा है।

चिड़ियाघर के इंटर्न उसके व्यवहार और प्रजनन गतिविधियों का लगातार अध्ययन कर रहे हैं। विशेषज्ञों के लिए यह पक्षियों के आवास और उनके व्यवहार को समझने का महत्वपूर्ण अवसर है।

पेड़ों से जुड़ी पक्षियों की दुनिया

ट्री वाक के दौरान वैज्ञानिक-डी डा. सीआर मघेश ने पत्तियों, छाल, फूल, फल और पेड़ों की छतरी की बनावट के आधार पर प्रजातियों की पहचान करने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पेड़ केवल हरियाली का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि कार्बन अवशोषण, वायु शुद्धिकरण, तापमान नियंत्रण और मिट्टी संरक्षण के साथ पक्षियों व अन्य जीवों को आश्रय देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रीय प्राणी उद्यान के निदेशक ने कहा कि पेड़ स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र की आधारशिला हैं। ‘नेचर वाक’ जैसी गतिविधियां लोगों को जैव विविधता के दस्तावेजीकरण से जोड़ती हैं और प्रकृति संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करती हैं।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों और चिड़ियाघर अधिकारियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। अगला संडे नेचर वाक 30 अगस्त को होगा।

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