चिड़ियाघरों में वन्यजीवों से मनुष्यों तक संक्रमण रोकने की तैयारी, भोपाल की निहसाद लैब में बनेगा ‘हेल्थ सेंटिनल’ सिस्टम
भोपाल के निहसाद में चिड़ियाघरों में वन्यजीवों से मनुष्यों में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों की निगरानी के लिए 'हेल्थ सेंटिनल' ...और पढ़ें

चिड़ियाघर में वन्यजीव। (प्रतीकात्मक चित्र)
HighLights
निहसाद भोपाल में 'हेल्थ सेंटिनल' सिस्टम विकसित होगा।
वन्यजीवों से मनुष्यों में संक्रमण की निगरानी होगी।
'वन हेल्थ' अवधारणा पर आधारित होगी यह व्यवस्था।
डिजिटल डेस्क, भोपाल। चिड़ियाघरों में रह रहे वन्यजीवों से मनुष्यों में या मनुष्यों से वन्यजीवों में फैलने वाली संक्रामक बीमारियों की निगरानी के लिए भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान (निहसाद) में ‘हेल्थ सेंटिनल’ सिस्टम विकसित किया जाएगा। केंद्र सरकार की इस परियोजना के तहत चिड़ियाघर के पिंजरों के आसपास, फीडिंग एरिया, केयरटेकर के आवागमन वाले स्थान और टच-जोन जैसे क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
नमूनों की नियमित अंतराल पर होगी जांच
वन्यजीवों, चिड़ियाघर के कर्मचारियों और आसपास के वातावरण से नियमित अंतराल पर नमूने लेकर उनकी जांच की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यहां किसी प्रकार के जूनोटिक (जानवरों से मनुष्यों में फैलने वाली) बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू, रेबीज जैसी किसी बीमारी के जीवाणु या विषाणु तो नहीं हैं।
'वन हेल्थ' की अवधारणा पर आधारित
यह पूरी व्यवस्था ‘वन हेल्थ’ की अवधारणा पर आधारित होगी, जिसमें मनुष्य, पशु और पर्यावरण की सेहत को एक साथ देखा जाता है। इससे वन्यजीवों में बीमारी की समय पर पहचान और उपचार के साथ चिड़ियाघर कर्मचारियों तथा दर्शकों की सुरक्षा में भी मदद मिलेगी। जूनोटिक बीमारियों की शुरुआती निगरानी से संक्रमण के बड़े प्रकोप की आशंका को कम किया जा सकेगा।
असामान्य लक्षण मिलने पर तुरंत जारी होगा अलर्ट
निहसाद के जनसंपर्क अधिकारी आरके शुक्ला ने बताया कि सिस्टम के तहत किसी जानवर या कर्मचारी में बीमारी के या असामान्य लक्षण मिलने पर शुरुआती स्तर पर अलर्ट जारी किया जाएगा। इससे संक्रमण फैलने से पहले आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलेगी। प्रत्येक चिड़ियाघर का स्वास्थ्य संबंधी डाटा केंद्रीय पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा, जिससे बीमारी के पैटर्न का विश्लेषण कर पहले से तैयारी की जा सकेगी।
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विशेषज्ञ देंगे प्रशिक्षण
वहीं, इस परियोजना के तहत निहसाद के विज्ञानी और विशेषज्ञ प्रशिक्षण भी देंगे। चिड़ियाघरों के डाक्टरों और वन्य जीवों की देखभाल से जुड़े कर्मचारियों को सैंपल कलेक्शन, बायो-सिक्योरिटी और संक्रमण से बचाव का तरीका सिखाया जाएगा।
