दिल्ली में दूषित पानी बना 'साइलेंट किलर': 2024 में 24% मौतें संक्रामक रोगों से, अस्पतालों में बढ़े जलजनित रोग
राजधानी दिल्ली में दूषित पानी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन गया है, जिससे संक्रामक रोगों से होने वाली मौतें बढ़ रही हैं। 2024 में कुल मौतों का ...और पढ़ें

फाइल फोटो
HighLights
2024 में 24% मौतें दूषित पानी से संबंधित संक्रामक रोगों से हुईं।
अस्पतालों में जलजनित बीमारियों के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
रोकथाम, पानी की गुणवत्ता जांच और प्रशासनिक सुधार आवश्यक हैं।
मुहम्मद रईस, दक्षिणी दिल्ली। राजधानी दिल्ली के कई इलाकों में दूषित पानी के सप्लाई की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। इससे न केवल लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है, बल्कि यह मौतों की भी बड़ी वजह बन रहा है। दूषित पानी में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए सबसे अधिक खतरनाक साबित हो रहा हैं।
बार-बार होने वाला दस्त बच्चों में कुपोषण और शारीरिक विकास में बाधा बन सकता है, जबकि बुज़ुर्गों में यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो सकती है। इसके अलावा रासायनिक तत्व भी पानी को दूषित कर जनस्वास्थ्य के लिए खतरे बढ़ा रहे हैं। पानी में केवल जीवाणु ही नहीं, बल्कि फ्लोराइड, नाइट्रेट और आर्सेनिक जैसे रसायन भी गंभीर खतरा पैदा कर रहे हैं।
दिल्ली सरकार के आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2024 में कुल 90,833 मौतें दर्ज की गईं। इनमें से 21,427 मौतें यानी लगभग 24 प्रतिशत सीधे तौर संक्रामक और परजीवी रोग के चलते हुई है। वर्ष 2023 में यह आंकड़ा 28.66 प्रतिशत तो वहीं 2022 में 26.39 प्रतिशत रहा। यानी दूषित पेयजल अब केवल किसी एक इलाके की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह तेजी से एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप लेती जा रही है।
शहर के सरकारी और निजी बड़े अस्पतालों में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिनकी बीमारी की मुख्य वजह दूषित पानी का सेवन है। यदि समय रहते ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है। अस्पतालों की ओपीडी और इमरजेंसी में डायरिया, उल्टी-दस्त, टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए और ई, पेट के संक्रमण तथा बच्चों में डिहाइड्रेशन के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
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कुल ओपीडी मरीजों में लगभग पांच से सात प्रतिशत मरीज सीधे तौर पर दूषित पानी से होने वाली बीमारियों से पीड़ित होते हैं। बरसात और गर्मी के मौसम में यह आंकड़ा और भी बढ़ जाता है। कई बार एक ही इलाके से एक साथ दर्जनों मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि समस्या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि जल आपूर्ति से जुड़ी सामूहिक है।
यथार्थ हाॅस्पिटल में सीनियर डायरेक्टर-इंटरनल मेडिसिन के डाॅ. संजय गुप्ता के मुताबिक लंबे समय तक दूषित पानी का सेवन लिवर, किडनी और हड्डियों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। कई मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं, जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है।
इलाज से ज्यादा जरूरी है रोकथाम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जल-जनित बीमारियां पूरी तरह रोकी जा सकती हैं। इसके लिए इलाज से ज्यादा जरूरी है रोकथाम और पानी की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी। इसके लिए जिन इलाकों में पानी गंदा आ रहा है, वहीं घरेलू स्तर पर सावधानी बरतनी जरूरी है।
- पीने के पानी को उबालकर या फिल्टर करके ही इस्तेमाल करें।
- पानी को साफ और ढके हुए बर्तनों में रखें।
- हाथ धोने और स्वच्छता की आदत अपनाएं।
- बच्चों में दस्त या उल्टी के लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
स्थायी समाधान में प्रशासनिक भूमिका अहम
दूषित पेयजल की शिकायतें ज्यादातर उन इलाकों में आ रही हैं, जहां सीवर और पेयजल लाइन दशकों पुराने हैं। जगह-जगह से लाइन क्षतिग्रस्त होने या क्षमता कम होने पर सीवर ओवरफ्लो होते रहते हैं। टूटी पेयजल लाइन के जरिए ये गंदा पानी मेन सप्लाई से होता हुआ घरों में पहुंच रहा है। वहीं कूड़े के पहाड़ों और अवैध डाई फैक्ट्रियों की वजह से हानिकारक रसायन भूजल को प्रदूषित कर चुके हैं। इस समस्या का स्थायी समाधान प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाने से ही संभव है।
- पानी की नियमित गुणवत्ता जांच।
- पाइपलाइन लीकेज और सीवेज मिक्सिंग की तत्काल मरम्मत।
- पुराने जल आपूर्ति तंत्र का नवीनीकरण।
- प्रभावित इलाकों में समय पर चेतावनी और जन-जागरूकता अभियान।
लिवर व किडनी डैमेज कर देते हैं हैवी मेटल
शरीर के हर अंग पर भूजल में घुलित हैवी मेटल का भी दुष्प्रभाव पड़ता है। मैंगनींज, कोबाल्ट, क्रोमियम, लेड, मर्करी जैसे हैवी मेटल से लिवर व किडनी डैमेज होने का खतरा रहता है। हृदय से संबंधित बीमारियों के साथ ही त्वचा पर चकत्ते भी पड़ सकते हैं। इतनी ही नहीं ये हैवी मेटल मानक से अधिक मात्रा में शरीर में लंबे समय तक पहुंचते रहे तो कैंसर जैसी घातक बीमारी की भी वजह बन सकते हैं। सोडियम की अधिक मात्रा से हाई बीपी की समस्या होती है। पोटैशियम की अधिकता किडनी फंक्शन और हृदय रोग की वजह बनता है।/B-डा. संजय राय, सामुदायिक चिकित्सा विभाग-एम्स दिल्ली।
"दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियां न केवल अस्पतालों पर बोझ बढ़ा रही हैं, बल्कि समाज की स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति को भी कमजोर कर रही हैं। स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल कोई सुविधा नहीं, बल्कि हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है। इसके लिए प्रशासन, स्वास्थ्य तंत्र और आम जनता सभी को मिलकर जिम्मेदारी निभानी होगी।"
-डाॅ. संजय गुप्ता, सीनियर डायरेक्टर-इंटरनल मेडिसिन (यथार्थ हाॅस्पिटल-मॉडल टाउन)
पेट संबंधी बीमारियों के हर दिन पहुंच रहे 15 प्रतिशत मरीज
अपोलो स्पेक्ट्रा हाॅस्पिटल के इंटर्नल मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट डा. संचयन रॉय ने बताया कि पिछले कुछ समय में अस्पताल में आने वाले मरीजों में दूषित पानी से होने वाली बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। हर दिन ओपीडी में 10 से 15 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं, जिनकी शिकायतें सीधे तौर पर गंदा या संक्रमित पानी पीने से जुड़ी होती हैं।
इनमें डायरिया, उल्टी-दस्त, पेट में तेज दर्द, बुखार, टाइफाइड और हेपेटाइटिस-ए जैसे मामले सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। यदि इसे महीने के हिसाब से देखें तो 20 से 25 मरीज केवल पानी जनित बीमारियों के कारण इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं, जबकि साल भर में यह संख्या हजारों तक पहुंच जाती है।
बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में इन संक्रमणों का असर ज्यादा गंभीर देखा जा रहा है और कई मामलों में मरीजों को भर्ती करने की भी जरूरत पड़ती है।
वर्ष 2024 में हुईं कुल 90,833 मौतें
रोग | मृत्यु | प्रतिशत |
संक्रामक व परजीवी रोग | 10,574 | 11.63 |
| टीबी | 4,416 | 4.86 |
| लिवर रोग | 3,827 | 4.21 |
| किडनी रोग | 2,319 | 2.55 |
| मस्तिष्कावरण शोथ (मेनिंजाइटिस) | 291 | 0.32 |
(स्रोत-दिल्ली सरकार)
वर्ष 2023 में हुईं कुल 88,628 मौतें
रोग | मृत्यु | प्रतिशत |
संक्रामक व परजीवी रोग 15,332 17.30 | ||
| टीबी 3,904 4.40 | ||
| लिवर रो 4,193 4.73 | ||
| किडनी रोग 1,847 2.08 | ||
| मस्तिष्कावरण शोथ (मेनिंजाइटिस) 133 0.15 |
(स्रोत-दिल्ली सरकार)
वर्ष 2022 में हुईं कुल 81,630 मौतें
रोग | मृत्यु | प्रतिशत |
| संक्रामक व परजीवी रोग | 12,125 | 14.85 |
| टीबी | 3,537 | 4.33 |
| लिवर रोग | 3,614 | 4.43 |
| किडनी रोग | 1,812 | 2.22 |
| मस्तिष्कावरण शोथ (मेनिंजाइटिस) | 459 | 0.56 |
(स्रोत-दिल्ली सरकार)