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जलवायु संकट से लड़ने के लिए विकासशील देशों को चाहिए 305 अरब डॉलर, मिल रही 31.7 अरब की मदद

Published: Fri, 06 Nov 2026 03:09 PM (IST)

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की रिपोर्ट के अनुसार, विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए 2035 तक सालाना 305 अरब डॉलर की आवश्यकता है।

जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों के बावजूद विकासशील देशों को मिल रही आर्थिक मदद जरूरत के मुकाबले बेहद कम है। एआई इमेज

जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों के बावजूद विकासशील देशों को मिल रही आर्थिक मदद जरूरत के मुकाबले बेहद कम है। एआई इमेज

HighLights

  1. विकासशील देशों को जलवायु अनुकूलन हेतु 305 अरब डॉलर लगेंगे।

  2. वर्तमान में केवल 31.7 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता उपलब्ध।

  3. अनुकूलन वित्तपोषण में भारी कमी, कमजोर देशों पर खतरा।

संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की नई एडॉप्टेशन गैप रिपोर्ट 2026 के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों के बावजूद विकासशील देशों को मिल रही आर्थिक मदद जरूरत के मुकाबले बेहद कम है।

रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि विकासशील देशों को 2035 तक हर साल करीब 305 अरब डॉलर की जरूरत होगी।

हालांकि, 2024 में विकसित देशों की ओर से अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक मदद के रूप में केवल 28.2 से 31.7 अरब डॉलर ही उपलब्ध कराए गए, जो कि पिछले वर्ष की तुलना में महज एक अरब डॉलर की वृद्धि दर्शाता है।

तीन गुना वित्त भी जरूरत का एक-तिहाई पूरा करने में असमर्थ

ब्राजील में आयोजित सीओपी30 सम्मेलन के दौरान 'ग्लोबल मुतिराओ' निर्णय के तहत 2035 तक अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक अनुकूलन वित्त को कम से कम तीन गुना करने पर सहमति बनी थी।

यूएनईपी की रिपोर्ट बताती है कि यदि यह लक्ष्य हासिल भी हो जाता है, तो अनुकूलन वित्त सालाना 85 से 120 अरब डॉलर तक पहुंचेगा।

इसके बावजूद, यह राशि विकासशील देशों की अनुमानित 305 अरब डॉलर की वार्षिक जरूरत का केवल 20 से 29 फीसदी हिस्सा ही पूरा कर पाएगी।

बहुपक्षीय बैंकों की मदद में बढ़ोतरी

  • विकासशील देशों का परस्पर सहयोग: बहुपक्षीय विकास बैंकों और दक्षिण-दक्षिण सहयोग के माध्यम से मिलने वाली वित्तीय सहायता 2019 के 3.8 अरब डॉलर से बढ़कर 2024 में 9.6 अरब डॉलर हो गई है।
  • निजी वित्त की सीमाएं: निजी क्षेत्र का वित्त बढ़ रहा है, लेकिन इसका अधिकांश हिस्सा कंपनियों की अपनी जरूरतों में इस्तेमाल होता है। सार्वजनिक अनुकूलन के अंतर को भरने में इसकी क्षमता केवल 15 से 20 फीसदी तक ही सीमित है।
  • ग्लासगो लक्ष्य: बहुपक्षीय विकास बैंक 2025 तक अनुकूलन वित्त को दोगुना कर 40 अरब डॉलर करने के ग्लासगो क्लाइमेट पैक्ट के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में अग्रसर हैं।

संस्थागत क्षमता और नीतियों को मजबूत करने पर बल

यूएनईपी का कहना है कि सिर्फ बजट का प्रावधान पर्याप्त नहीं है; इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मजबूत संस्थागत व्यवस्था अनिवार्य है। वर्तमान में कई सरकारें ढांचागत कानून बना रही हैं। विभिन्न विभागों में समन्वय स्थापित कर रही हैं।

जलवायु वित्त प्रबंधन के लिए समर्पित प्रणालियों का निर्माण कर रही हैं। योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद समुदायों तक पहुंचाने के लिए प्रशासनिक क्षमता का होना बेहद जरूरी है।

नुकसान और क्षति की खाई हुई चौड़ी

जलवायु आपदाओं से हो रहे ऐसे नुकसान, जिन्हें अनुकूलन उपायों से नहीं रोका जा सकता, उनके लिए वित्तीय संसाधनों की अत्यधिक कमी है। फंड के पहले चरण में प्रभावित देशों ने 2.8 अरब डॉलर की सहायता की मांग की थी, जबकि प्रारंभिक आवंटन मात्र 342 मिलियन डॉलर ही स्वीकृत हो सका।

यूएनईपी की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन के अनुसार, यदि दुनिया 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि की सीमा को पार करती है, तो बिना पर्याप्त वित्तीय सहायता के कमजोर देशों और समुदायों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी।

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