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    जो अधिकारी जनकपुरी हादसे का है जिम्मेदार उस पर लग चुका भ्रष्टाचार का आरोप, डीजेबी में किसने दिया बड़ा जिम्मा

    Updated: Sat, 07 Feb 2026 09:15 PM (IST)

    दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारी आजाद सिंह ग्रेवाल को जनकपुरी हादसे के बाद निलंबित किया गया है। उन पर पहले भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे, जिसमें सीईओ न ...और पढ़ें

    20 फीट गहरे इसी गड्ढे में गिरने से गई है 25 वर्षीय युवक की जान। फाइल फोटो

    20 फीट गहरे इसी गड्ढे में गिरने से गई है 25 वर्षीय युवक की जान। फाइल फोटो

    HighLights

    1. जनकपुरी हादसे के बाद डीजेबी अधिकारी निलंबित।

    2. निलंबित अधिकारी पर पहले भी भ्रष्टाचार के आरोप।

    3. तत्कालीन जल मंत्री ने बर्खास्तगी को पदावनति में बदला।

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के अधिकारियों की लापरवाही व भ्रष्टाचार के कारण दिल्ली में पेयजल आपूर्ति व सीवर से संबंधित समस्या होने के साथ ही दुर्घटना के कारण बन रहे हैं। आरोपित अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दे दी जाती है।

    जनकपुरी मामले में निलंबित अधिशासी अभियंता पर कुछ वर्ष पहले भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। जांच के बाद जल बोर्ड के मुख्य कार्याकारी अधिकारी (सीईओ) ने उनकी सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया था। हालांकि, बाद में तत्कालीन जल मंत्री सत्येंद्र जैन ने इसे बदलकर वेतनमान कम करने की सजा का आदेश जारी किया था।

    भुगतान के बदले रिश्वत लेने का आरोप

    जनकपुरी में जल बोर्ड द्वारा खोदे गए गड्ढे में गिरने से युवक की मौत के मामले में जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने शुक्रवार को अधिशासी अभियंता आजाद सिंह ग्रेवाल और सहायक अभियंता वंदना को निलंबित कर दिया था। ग्रेवाल पर वर्ष 2019 में अधिशासी अभियंता (सिविल) की जिम्मेदारी संभालते हुए टैंकर संचालक से बिल के भुगतान के बदले रिश्वत लेने का आरोप लगा था।

    बचाव में बोले-उधारी ले रहे थे वापिस

    विभागीय और सतर्कता आयोग की जांच में उन्हें दोषी ठहराया गया था। कहा गया था कि टैंकर संचालक से पैसे लेते हुए उनका वीडिया सतर्कता आयोग के पास है। बचाव में ग्रेवाल का कहना था कि वह टैंकर संचालक से उधार दिया हुआ पैसा वापस ले रहे थे।

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    जांच अधिकारी ने इस तर्क को खारिज कर दिया था। जल बोर्ड के तत्कालीन सीईओ निखिल कुमार जांच में आरोप को सही बताते हुए ग्रेवाल को सेवा से निष्कासन का आदेश दिया था।

    सीईओ के आदेश के खिलाफ दायर की अपील

    सीईओ के आदेश से असंतुष्ट होकर उन्होंने अपील दायर की थी। उनका पक्ष सुनने के बाद तत्कालीन जल मंत्री सत्येंद्र जैन ने बर्खास्तगी की सजा को पदावनति में बदल दिया था। उन्होंने कहा था कि ग्रेवाल की नियुक्ति जल बोर्ड में वर्ष 2005 में सीधे सहायक अभियंता (सिविल) के पद पर हुई थी।

    घटना के समय उनके पास अधिशासी अभियंता का अतिरिक्त कार्यभार था। उन्होंने सेवा से निष्कासन के आदेश पर रोक लगाकर वेतनमान में तीन पायदान नीचे करने का आदेश दिया था। इस तरह से ग्रेवाल की नौकरी बच गई थी। अब जनकपुरी की घटना के लिए जांच समिति ने उन्हें जिम्मेदार ठहराया है।

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