DU Admission 2026: सीट आवंटन के बाद डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन शुरू, एक छोटी सी गलती से रद हो सकता है आपका आवेदन
दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक दाखिले के लिए दस्तावेज सत्यापन एक महत्वपूर्ण चरण है, जिसमें छात्र अक्सर गलतियां करते हैं। धुंधले दस्तावेज़, नाम में अं ...और पढ़ें

दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक दाखिले के लिए दस्तावेज सत्यापन एक महत्वपूर्ण चरण है। फाइल फोटो
लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। डीयू में स्नातक दाखिले के पहले चरण की सीट आवंटन सूची जारी होने के बाद अब विद्यार्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण दस्तावेज सत्यापन का है। हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं के दाखिले में देरी या आवेदन निरस्त होने की वजह दस्तावेजों में छोटी-छोटी गलतियां होती हैं। ऐसे में अभ्यर्थियों को सभी प्रमाणपत्रों की सावधानीपूर्वक जांच कर ही उन्हें अपलोड करना चाहिए।
दस्तावेज सत्यापन के दौरान सबसे आम गलती गलत या धुंधले दस्तावेज अपलोड करना है। कई विद्यार्थी मोबाइल से जल्दबाजी में फोटो खींचकर अपलोड कर देते हैं, जिससे विवरण स्पष्ट नहीं दिखता। इसके अलावा नाम, जन्मतिथि या माता-पिता के नाम में दसवीं की अंकतालिका और अन्य प्रमाणपत्रों के बीच अंतर होने पर भी समस्या आ सकती है।
जाति, ईडब्ल्यूएस और ओबीसी-एनसीएल श्रेणी के विद्यार्थियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका प्रमाणपत्र निर्धारित प्रारूप और वैध अवधि का हो। कई बार राज्य सरकार का प्रमाणपत्र या पुराना प्रमाणपत्र अपलोड करने से सत्यापन अटक जाता है। इसी तरह आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के अभ्यर्थियों को भी नवीनतम प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना चाहिए।
विद्यार्थियों को अपने सीयूईटी आवेदन और डीयू के सीएसएएस पोर्टल पर भरी गई जानकारी का मिलान भी कर लेना चाहिए। विषय, श्रेणी या व्यक्तिगत विवरण में अंतर मिलने पर कालेज अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांग सकता है। कई छात्र आवश्यक दस्तावेज जैसे चरित्र प्रमाणपत्र, पासपोर्ट आकार का फोटो, हस्ताक्षर या माइग्रेशन प्रमाणपत्र समय पर तैयार नहीं रखते, जिससे प्रक्रिया प्रभावित होती है।
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डीयू प्रवेश डीन हनीत गांधी का कहना है कि विद्यार्थी प्रवेश पोर्टल पर नियमित रूप से अपडेट देखते रहें और कालेज से मिलने वाले प्रत्येक संदेश पर समय रहते कार्रवाई करें। थोड़ी-सी सावधानी से दाखिले की पूरी प्रक्रिया बिना किसी परेशानी के पूरी की जा सकती है।
दस्तावेज सत्यापन में होने वाली 10 बड़ी गलतियां
- धुंधले या अधूरे दस्तावेज अपलोड करना।
- नाम, जन्मतिथि या अन्य विवरण में अंतर होना।
- गलत श्रेणी का प्रमाणपत्र अपलोड करना।
- पुराने या अमान्य ओबीसी-एनसीएल-ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र का उपयोग।
- सीयूईटी और सीएसएएस में अलग-अलग जानकारी भरना।
- आवश्यक प्रमाणपत्र समय पर उपलब्ध न रखना।
- गलत प्रारूप या निर्धारित आकार से अलग फाइल अपलोड करना।
- कॉलेज की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण का समय पर जवाब नहीं देना।
- निर्धारित समय सीमा के भीतर दस्तावेज सत्यापन पूरा न करना।
- सत्यापन के बाद समय पर फीस जमा न करना।
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