दिल्ली यूनिवर्सिटी में लोकतंत्र पर हमला? एक महीने के लिए मीटिंग-प्रदर्शन पर रोक, छात्र संगठन भड़के
दिल्ली विश्वविद्यालय में सार्वजनिक प्रदर्शनों पर एक महीने के प्रतिबंध से छात्र संगठनों में रोष है। एबीवीपी, एनएसयूआई और वामपंथी छात्र संगठन, जो आमतौर ...और पढ़ें

दिल्ली विश्वविद्यालय में सार्वजनिक प्रदर्शनों पर एक महीने के प्रतिबंध से छात्र संगठनों में रोष है। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी कैंपस में पब्लिक प्रोटेस्ट पर एक महीने की रोक को लेकर स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन में गुस्सा बढ़ रहा है। अलग-अलग आइडियोलॉजी की वजह से अक्सर एक-दूसरे से अलग रहने वाले कई स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन अब इस मुद्दे पर एक साथ आ रहे हैं। स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन का कहना है कि यह फैसला स्टूडेंट्स के डेमोक्रेटिक अधिकारों को रोकता है।
जारी एक नोटिस में यूनिवर्सिटी ने क्या कहा?
17 फरवरी को जारी एक नोटिस में यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने एक महीने के लिए कैंपस के अंदर किसी भी तरह की मीटिंग, जुलूस, प्रदर्शन या पांच से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी थी। तब से कैंपस का माहौल बदला हुआ दिख रहा है और कई स्टूडेंट्स और टीचर इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।
नोटिस के बाद 19 फरवरी को जब कुछ स्टूडेंट्स ने आर्ट्स फैकल्टी के पीछे प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की कोशिश की तो सिक्योरिटी वालों ने उन्हें हटा दिया और सख्त एक्शन की चेतावनी दी। अब इस मुद्दे पर ABVP, NSUI और लेफ्ट विंग स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन कुछ टीचर के साथ मिलकर प्रोटेस्ट करने की तैयारी कर रहे हैं। स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन आर्ट्स फैकल्टी के बाहर जमा हुए हैं और वाइस चांसलर से सीधी बातचीत की मांग की है।
यूनिवर्सिटी की दूसरी एक्टिविटी पर भी असर
इस रोक का असर यूनिवर्सिटी की दूसरी एक्टिविटी पर भी पड़ा है। जीसस एंड मैरी कॉलेज, इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर विमेन और कमला नेहरू कॉलेज में होने वाले कुछ फेस्टिवल पोस्टपोन या कैंसिल कर दिए गए, जबकि यूनिवर्सिटी का सालाना फ्लावर शो भी लिमिटेड लेवल पर हुआ।
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हालांकि, 26 फरवरी को पोलो ग्राउंड में होली सेलिब्रेशन हुआ। DU स्टूडेंट्स यूनियन के वाइस प्रेसिडेंट राहुल झाझला ने कहा कि अलग-अलग स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन इस मुद्दे पर एडमिनिस्ट्रेशन से बात करेंगे और इसका सॉल्यूशन निकालने की कोशिश करेंगे। हालांकि, एडमिनिस्ट्रेशन ने कहा कि दिल्ली पुलिस के कैंपस में सेक्शन 144 लगाने के बाद यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया।