द्वारका हादसा: 'नाबालिग आरोपी को पछतावा नहीं', JJB ने अंतरिम जमानत सुनवाई के दौरान की टिप्पणी
द्वारका हादसे में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपित नाबालिग को जीवन की कीमत का बोध न होने और पश्चाताप न करने पर चिंता जताई। ...और पढ़ें

द्वारका हादसे में जान गंवाने वाले साहिल की फाइल फोटो।

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जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। द्वारका हादसे के मामले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड (जेजेबी) ने हादसे के आरोपित नाबालिग से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए कई टिप्पणियां की थी।
बोर्ड ने अपनी जांच में पाया था कि आरोपित नाबालिग को किसी व्यक्ति के जीवन की कीमत का पूर्ण रूप से बोध नहीं है और न ही किशोर से पूछताछ के बाद यह प्रतीत होता है कि अपने उस कृत्य को लेकर कोई पश्चाताप नहीं है।

साहिल की मां।
बोर्ड ने किशोर के व्यवहार पर जताई चिंता
बोर्ड ने मामले की सुनवाई के दौरान आरोपित किशोर के व्यवहार पर गहरी चिंता व्यक्त की थी। वहीं, दूसरी ओर कोर्ट ने बोर्ड परीक्षाओं का हवाला देते हुए आरोपित को कुछ शर्तों के साथ अंतरिम राहत प्रदान की थी। इस फैसले के बाद ही पीड़ित परिवार, विशेषकर साहिल की मां की न्याय की गुहार और तेज हो गई है।
9 मार्च तक के लिए है अंतरिम जमानत
सुनवाई के दौरान आरोपित के पक्ष ने दलील दी थी कि यह घटना केवल एक हादसा थी। आरोपित का दावा किया था कि यह घटना शुद्ध रूप से आकस्मिक थी और किसी को चोट पहुंचाने या मारने का कोई इरादा नहीं था। बचाव पक्ष की याचिका में कहा गया कि आरोपित ने स्वयं पुलिस को सूचित किया और शुरुआत से ही जांच में पूर्ण सहयोग दिया।
तमाम दलीलों और टिप्पणियों के बीच, बोर्ड ने आरोपित की शैक्षणिक स्थिति को देखते हुए उसे 10 फरवरी को राहत दी थी। इसमें आरोपित को कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी और पेपर के मद्देनजर 9 मार्च तक के लिए अंतरिम जमानत दी गई।
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इसमें आरोपित को 10 हजार के निजी मुचलके और एक जमानतदार पर छोड़ा गया है। इस दौरान वह अपने पिता की कस्टडी में रहेगा। बोर्ड ने अपने आदेश में साफ किया है कि यह राहत अंतरिम है और इसे मिसाल के तौर पर नहीं देखा जाएगा। नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई बाद में होगी।