यमुना से गाद हटाने में IIT दिल्ली करेगा सहयोग, बाढ़ और प्रदूषण से मिलेगी राहत
यमुना की तलहटी में जमी गाद के कारण जलधारण क्षमता कम हो गई है, जिससे मानसून में बाढ़ और बाद में पानी की कमी होती है। अब दिल्ली सरकार ने आईआईटी दिल्ली क ...और पढ़ें

यमुना की तलहटी में जमी गाद के कारण जलधारण क्षमता कम हो गई है। फाइल फोटो
HighLights
यमुना में गाद से जलधारण क्षमता हुई कम, बाढ़ का खतरा।
आईआईटी दिल्ली करेगा गाद हटाने की व्यवहार्यता अध्ययन।
आधुनिक मशीनों से गाद हटाकर नदी को मिलेगा नया जीवन।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। यमुना की तलहटी में जमी हुई गाद के कारण इसकी जलधारण क्षमता कम होती जा रही है। यही कारण है कि मानसून के दिनों में हरियाणा के हथनी कुंड बैराज से पहले की तुलना में कम पानी छोड़े जाने के बाद भी इसका जलस्तर बढ़ जाता है और दिल्ली में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
वहीं, मानसून के बाद नदी में पानी की कमी हो जाती है। वर्ष, 2023 में बाढ़ आने के बाद ही नदी से गाद निकालने की घोषणा हुई थी, परंतु अभी तक यह काम शुरू नहीं हुआ है। सरकार अब आइआइटी दिल्ली के सहयोग से इसका समाधान करने का निर्णय लिया है।
आइआइटी व्यवहार्यता अध्ययन कर सरकार को रिपोर्ट देगी। इसके अंतर्गत नदी तल पर जमा गाद का आकलन, कितनी खोदाई की आवश्यकता, इससे जलधारण क्षमता में कितनी वृद्धि होगी और बाढ़ का खतरा कितना होगा का पता लगाया जाएगा। इसके अनुरूप काम किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि गाद की समस्या हल होने से नदी की जलधारण क्षमता बढ़ेगी, जिससे बाढ़ की संभावना कम होगी, प्रदूषण कम होने के साथ ही जल आपूर्ति के लिए कच्चे पानी की उपलब्धता बढ़ेगी।
यमुना दिल्ली से होकर लगभग 52 किमी बहती है, जिसमें वजीराबाद और ओखला के बीच का 22 किमी का हिस्सा अत्यधिक प्रदूषित है। गंदगी की वजह से गाद की समस्या बढ़ रही है। नदी और इसमें गिरने वाले बड़े नालों से गाद निकालने के लिए फिनलैंड से एम्फीबियस वाटर मास्टर मशीन सहित कई आधुनिक मशीने खरीदी गई है।
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इससे प्रत्येक मौसम में और नदी के बीच से भी गाद निकालने का काम किया जा सकता है। अभी इससे नजफगढ़ ड्रेन की सफाई हो रही है।
अधिकारियों का कहना है कि 1978 की तुलना में यमुना की जल-धारण क्षमता मात्र 50 प्रतिशत रह गई है। दिल्ली विश्वविद्यालय और भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आइआइएसईआर) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार वर्ष 1799 में दिल्ली में नदी की चौड़ाई 658 मीटर तक थी जो कम होकर 210 मीटर रह गई है।
इससे अनुमानित जल प्रवाह 30 हजार घन मीटर प्रति सेकेंड से घटकर मात्र 3900 घन मीटर प्रति सेकेंड रह गया है।
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