भीषण गर्मी की मार झेलने वाले देशों में भारत सबसे ऊपर, 2050 तक हालात होंगे बेकाबू
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक स्टडी के अनुसार, यदि वैश्विक तापमान 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ता है, तो भारत को 2050 तक भीषण गर्मी का सबसे अधिक खतरा होगा। ...और पढ़ें
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भारत को 2050 तक भीषण गर्मी का सबसे अधिक खतरा होगा। जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक नई स्टडी ने क्लाइमेट चेंज और बढ़ते ग्लोबल टेम्परेचर को लेकर भारत के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। स्टडी के मुताबिक, अगर ग्लोबल टेम्परेचर प्री-इंडस्ट्रियल लेवल से 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ जाता है, तो भारत उन देशों में से होगा जो बहुत ज्यादा गर्मी के सबसे ज्यादा खतरे में होंगे।
2050 आधी आबादी खतरे में
"नेचर सस्टेनेबिलिटी" जर्नल में छपी इस स्टडी के मुताबिक, 2050 तक दुनिया की लगभग 41 परसेंट आबादी (लगभग 3.8 बिलियन लोग) बहुत ज़्यादा गर्मी के साये में रहने को मजबूर होगी। 2010 में यह आंकड़ा सिर्फ़ 23 परसेंट था। रिसर्चर्स का कहना है कि भारत की बड़ी आबादी और पहले से ही गर्म क्लाइमेट इसे बहुत ज्यादा खतरे में डालते हैं।
भारत के लिए मुख्य चुनौतियां
कूलिंग की बढ़ती मांग: स्टडी के मुख्य लेखक, डॉ. जीसस लिजाना के अनुसार, भारत में "कूलिंग डिग्री डेज़" (गर्मी से बचने के लिए ज़रूरी एनर्जी) में काफी बढ़ोतरी होगी। इसका मतलब है कि आने वाले सालों में, घरों और ऑफ़िस को ठंडा रखने के लिए काफ़ी मात्रा में बिजली और एयर कंडीशनिंग (AC) की जरूरत होगी।
हेल्थ और खेती पर असर: ऑक्सफोर्ड प्रोफेसर राधिका खोसला ने चेतावनी दी है कि 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज़्यादा तापमान बढ़ने से शिक्षा, हेल्थ, खेती और विस्थापन पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा। बहुत ज्यादा गर्मी से फसलों को नुकसान होने और हीटस्ट्रोक जैसी बीमारियों के बढ़ने का खतरा होता है।
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अगले पांच साल बहुत जरूरी: साइंटिस्ट का कहना है कि इस गर्मी का असर 1.5 डिग्री की सीमा पार होने से पहले ही दिखने लगेगा। अगले पांच सालों में, लाखों घरों को कूलिंग सिस्टम की जरूरत पड़ सकती है, जिससे एनर्जी की माँग और कार्बन एमिशन दोनों बढ़ जाएंगे।
कौन से देश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे?
भारत के अलावा, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश और फिलीपींस जैसे ज्यादा आबादी वाले देश इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं। वहीं, ब्राजील और साउथ सूडान जैसे देशों में तापमान में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
Solution यह क्या है?
स्टडी इस बात पर जोर देती है कि सरकारों को जल्द से जल्द नेट जीरो एमिशन हासिल करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। इसके अलावा, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और इमारतों को बढ़ती गर्मी को झेलने और एनर्जी की खपत कम करने के लिए डिज़ाइन किया जाना चाहिए।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह स्टडी भारत जैसे विकासशील देशों के लिए एक "वेक-अप कॉल" है, जहां गर्मी अब सिर्फ मौसम की बात नहीं बल्कि एक पब्लिक हेल्थ संकट बन गई है।
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