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    दिल्ली हाई कोर्ट में 'भूल जाने के अधिकार' के फैसले को इंडिया कानून की चुनौती, 21 जुलाई को होगी मामले की सुनवाई

    Updated: Tue, 14 Jul 2026 05:26 PM (IST)

    इंडिया कानून ने दिल्ली हाई कोर्ट के 'भूल जाने के अधिकार' को मान्यता देने वाले फैसले को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि यह फैसला सूचना के अधिकार ...और पढ़ें

    इंडिया कानून ने दिल्ली हाई कोर्ट के 'भूल जाने के अधिकार' को मान्यता देने वाले फैसले को चुनौती दी है। फाइल फोटो

    इंडिया कानून ने दिल्ली हाई कोर्ट के 'भूल जाने के अधिकार' को मान्यता देने वाले फैसले को चुनौती दी है। फाइल फोटो

    HighLights

    1. इंडिया कानून ने 'भूल जाने के अधिकार' फैसले को चुनौती दी।

    2. फैसला सूचना के अधिकार और ओपन न्याय के खिलाफ।

    3. यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है, याचिका में कहा।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। एक व्यक्ति के भूल जाने के अधिकार को मान्यता देने के निर्णय को इंडिया कानून ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनाैती दी है। इंडिया कानून ने याचिका दायर कर कहा है कि एकल पीठ के 29 मई के फैसले में सामान्य और अस्पष्ट निर्देश हैं, जो सूचना के अधिकार और ओपन न्याय व्यवस्था के उद्देश्यों के खिलाफ हैं।

    इसमें कहा गया है कि फैसले ने सेंसरशिप का दायरा बढ़ा दिया है और नाम-आधारित खोजों को डी-इंडेक्स और डिसेबल करने के लिए एक मनमाना मानक तय किया है, जो संविधान के अनुच्छेद 19 (एक)(जी) के तहत व्यापार, व्यवसाय और पेशे की स्वतंत्रता के प्लेटफॉर्म के अधिकार का उल्लंघन करता है। मंगलवार को अधिवक्ताओं के कार्य से विरत होने के कारण मामले की सुनवाई 21 जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर दी।

    डी-इंडेक्सिंग का मतलब है किसी सर्च इंजन के डेटाबेस से किसी खास वेब पेज या वेबसाइट को हटाना। अपील में कहा गया है कि एकल पीठ ने सुप्रीम कोर्ट की नौ-जजों की पीठ द्वारा निजता के अधिकार पर दिए गए के एस पुट्टास्वामी फैसले को गलत समझा।

    इसमें कहा गया है कि उस अहम फैसले में, शीर्ष अदालत ने इस अवधारणा पर चर्चा तो की, लेकिन न्यायिक रिकार्ड से भूल जाने का अधिकार जैसा कोई बिना शर्त अधिकार नहीं दिया। इंडिया कानून ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म व्यापक जनहित का काम करता है और किसी व्यक्ति की अपने मुकदमे के इतिहास को मिटाने की इच्छा भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे अन्य मौलिक अधिकारों को सीमित करने का आधार नहीं बन सकती।

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    29 मई को एकल पीठ ने भूल जाने के अधिकार को मान्यता देते हुए निर्णय सुनाया था कि गूगल जैसे सर्च इंजन को नाम से सर्च करने पर निजी प्रकरण में बरी, आरोप से मुक्त होने के साथ मामला रद होने की स्थिति में मामलों के अदालती रिकॉर्ड हमेशा दिखाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

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