दिल्ली एयरपोर्ट के पास ऊंची इमारतों के निर्माण नियमों की हुई समीक्षा, शहरी विकास को मिलेगा बढ़ावा
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने घोषणा की है कि सरकार हवाई अड्डों के पास ऊंची इमारतों ...और पढ़ें

केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने घोषणा की है कि सरकार हवाई अड्डों के पास ऊंची इमारतों के निर्माण पर लगी रोक की समीक्षा कर रही है। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, वेस्ट दिल्ली। देश भर में अलग-अलग एयरपोर्ट के पास ऊंची इमारतों के कंस्ट्रक्शन में आ रही रुकावटें जल्द ही दूर हो सकती हैं। यूनियन सिविल एविएशन मिनिस्टर के. राम मोहन नायडू ने शुक्रवार को यशोभूमि में हुए एक इवेंट में कहा कि सरकार एविएशन सेफ्टी से कॉम्प्रोमाइज किए बिना बिल्डिंग की ऊंचाई पर रोक का रिव्यू कर रही है।
इसके लिए ग्लोबल एविएशन बॉडी ICAO (इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन) की मदद ली जा रही है। यूनियन मिनिस्टर यशोभूमि में नेशनल अर्बन एंड रियल एस्टेट डेवलपमेंट कॉन्क्लेव 2026 को एड्रेस कर रहे थे।
एविएशन मिनिस्टर ने माना कि मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में एयरपोर्ट के पास ऊंची इमारतों के कंस्ट्रक्शन पर लगी रोक एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि हमारा सिविल एविएशन सेक्टर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन ऊंचाई पर लगी रोक शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के डेवलपमेंट में रुकावट डाल रही है। हम इसका सॉल्यूशन ढूंढने के लिए एक्टिवली काम कर रहे हैं। ICAO की टीम अभी सभी बड़े शहरों का दौरा कर रही है।
यह टीम एविएशन ऑपरेशन और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी की स्टडी कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सेफ फ्लाइट बनाए रखते हुए कितनी ऊंचाई बढ़ाई जा सकती है। सभी स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक इकट्ठा करने के बाद एक डिटेल्ड रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर आगे की पॉलिसी तय की जाएंगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अभी दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते सिविल एविएशन मार्केट में से एक है। अभी देश में 165 ऑपरेशनल एयरपोर्ट हैं। अगले पांच सालों में 50 नए एयरपोर्ट बनाने का काम चल रहा है। एविएशन सेक्टर का यह विस्तार देश के रियल एस्टेट सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित होगा और इन्वेस्टमेंट के मौके पैदा करेगा।
रियल एस्टेट सेक्टर की ग्रोथ पोटेंशियल पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा कि 2030 तक इसकी कीमत $1 ट्रिलियन होने का अनुमान है। 2047 तक इसकी कीमत $5 से $7 ट्रिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है, जो आजादी का नतीजा होगा।
बढ़ते एयर पॉल्यूशन और शहरीकरण की चुनौतियों के बीच उन्होंने स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग और क्वालिटी ऑफ लाइफ दोनों पर फोकस करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एसेट्स बनाना सिर्फ पैसा बनाने के बारे में नहीं होना चाहिए बल्कि इसे नागरिकों की भलाई से जोड़ा जाना चाहिए।
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