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चेस में 15 वर्षीय वंदन का बड़ा कारनामा, वर्ल्ड नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को हराकर बोला- 'उनसे माउस स्लिप हुआ'  

Published: Wed, 26 Aug 2026 10:32 PM (IST)

15 वर्षीय भारतीय शतरंज खिलाड़ी वंदन अलंकार सवाई ने ऑनलाइन ब्लिट्ज में दुनिया के नंबर-1 मैग्नस कार्लसन को हराया। वंदन ...और पढ़ें

चेस में वर्ल्ड नंबर वन मैगनस कार्लसन को वंदन ने हराया। फोटो: आर्काइव

चेस में वर्ल्ड नंबर वन मैगनस कार्लसन को वंदन ने हराया। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. 15 वर्षीय वंदन ने ऑनलाइन ब्लिट्ज में कार्लसन को हराया

  2. जीत को 'माउस स्लिप' बताया, पर कोचों ने खेल सराहा

  3. वंदन का लक्ष्य इंटरनेशनल मास्टर बनना, पढ़ाई में भी अव्वल

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दुनिया के नंबर-1 शतरंज खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को हराना किसी भी खिलाड़ी के लिए जश्न मनाने वाली बड़ी उपलब्धि हो सकती है, लेकिन 15 वर्षीय वंदन अलंकार सवाई के लिए 18 अगस्त की रात बिल्कुल सामान्य रही।

ऑनलाइन ब्लिट्ज टूर्नामेंट में कार्लसन को मात देने के बाद भी वंदन ने न तो कोई खास जश्न मनाया और न ही परिवार को अपनी इस जीत के बारे में बताया। चार राउंड खेलने के बाद कमरे से बाहर आए और मां डा. माधुरी अलंकार सवाई से बस इतना कहा- तीन गेम जीते और एक में हार मिली।

पिता ने चेस.काम प्रोफाइल देखी तो खुला राज

वंदन की बड़ी जीत का पता परिवार को तब चला, जब उनके पिता ने बाद में चेस.काम पर उनकी प्रोफाइल देखी। प्रोफाइल में कार्लसन के खिलाफ मुकाबला देखकर उन्होंने वंदन से पूछा तो उसका जवाब भी उतना ही सहज था।

वंदन ने कहा कि कार्लसन के खिलाफ खेल के दौरान माउस स्लिप हो गई थी और उनसे गलत चाल चल गई। हालांकि, वंदन के कोच गुरप्रीत पाल सिंह और कुशाग्र कानेत्कर ने मैच का विश्लेषण करने के बाद उसके खेल की तारीफ की।

जीत को सिर्फ गलती का नतीजा कहना सही नहीं

कोचों के अनुसार वंदन ने पूरे मुकाबले में मजबूत और आत्मविश्वास भरा खेल दिखाया। ऐसे में उसकी जीत को सिर्फ कार्लसन की गलती का नतीजा मानना सही नहीं होगा। कार्लसन दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हैं और उनके खिलाफ जीत वंदन के युवा करियर की अब तक की बड़ी उपलब्धियों में शामिल हो गई है।

साढ़े सात साल की उम्र में शुरू किया शतरंज

वंदन ने महज साढ़े सात साल की उम्र में शतरंज और पजल से शुरुआत की थी। फिलहाल वह 10वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं। टूर्नामेंट के कारण स्कूल छूटने के बावजूद पढ़ाई में वह अपनी कक्षा के टापर रहे हैं।

शतरंज में भी उनका प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है। वह दिल्ली स्टेट एज-कैटेगरी प्रतियोगिताओं में जीत हासिल कर चुके हैं और दुबई ओपन में तीसरे स्थान पर रहे हैं। उनकी रेटिंग 2200 से अधिक है।

अब इंटरनेशनल मास्टर बनने का लक्ष्य

कार्लसन को हराने के बाद वंदन का अगला लक्ष्य इंटरनेशनल मास्टर (आईएस) बनना है। हालांकि, वह अभी यह तय नहीं कर पाए हैं कि भविष्य में शतरंज को ही पूर्णकालिक करियर बनाएंगे या नहीं।

वंदन की रुचि इतिहास और राजनीति विज्ञान जैसे विषयों में भी है। उनका कहना है कि इस उम्र में कई खिलाड़ी ग्रैंडमास्टर (जीएम) बन चुके हैं, इसलिए वह अभी अपने भविष्य को लेकर निश्चित नहीं हैं।

कार्लसन पर जीत को मंजिल नहीं मानते वंदन

दुनिया के शीर्ष शतरंज खिलाड़ी को हराने के बावजूद वंदन इस जीत को अपनी मंजिल नहीं मानते। उनके लिए यह अब तक के सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। खास बात यही है कि इतनी बड़ी उपलब्धि के बाद भी उनका सहज अंदाज और खेल के प्रति नजरिया नहीं बदला है।