दिल्ली एयरपोर्ट में कार्गो चेकिंग का नया सिस्टम लागू, अब सिर्फ 5 घंटे में क्लियरेंस; कई शहरों में होगी शुरुआत
नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो के 'नो री-स्क्रीनिंग' एयर कार्गो ट्रांसशिपमेंट ट्रायल के उत्साहजनक नतीजे सामने आए हैं। इससे दिल्ली एयरपोर्ट पर ट्रांजिट समय में 80% की कमी आई है और कार्गो वॉल्यूम भी बढ़ा है।

दिल्ली एयरपोर्ट पर कार्गों चेकइन का नया सिस्टम लागू। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
चेन्नई-दिल्ली-फ्रैंकफर्ट मार्ग पर कार्गो वॉल्यूम बढ़कर दोगुना हुआ
दिल्ली एयरपोर्ट पर कार्गो ट्रांजिट समय 80% तक घटा
भारत को वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब बनाने में मिलेगी मदद
गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। भारतीय विमानन क्षेत्र को दुनिया का प्रमुख लाॅजिस्टिक्स और ट्रांसशिपमेंट हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार का बड़ा नीतिगत बदलाव रंग लाने लगा है। नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो द्वारा शुरू किए गए 'नो री-स्क्रीनिंग' एयर कार्गो ट्रांसशिपमेंट के ट्रायल के शुरुआती नतीजे दिल्ली एयरपोर्ट पर बेहद उत्साहजनक सामने आए हैं।
इस नई व्यवस्था के तहत घरेलू शहरों से आने वाले अंतरराष्ट्रीय कार्गो को दिल्ली जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर ट्रांजिट के दौरान दोबारा खोलकर सुरक्षा जांच (पीस-लेवल री-स्क्रीनिंग) नहीं करनी पड़ रही है।
90-दिवसीय पायलट प्रोजेक्ट के तहत चेन्नई-दिल्ली-फ्रैंकफर्ट मार्ग पर 20 जून से जारी इस प्रयोग के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए सरकार अब इसका विस्तार देश के अन्य प्रमुख शहरों में किया जा रहा है। फिलहाल इस 90-दिवसीय पायलट प्रोजेक्ट को लागू करने का जिम्मा एअर इंडिया के पास है।
कार्गो वाल्यूम दोगुने से अधिक, ट्रांजिट टाइम 80 प्रतिशत घटा
90-दिवसीय ट्रायल के शुरुआती आंकड़ों ने इस नीतिगत बदलाव की सफलता साबित कर दी है। चेन्नई-दिल्ली-फ्रैंकफर्ट रूट पर दैनिक कार्गो वाल्यूम 2.2 टन से बढ़कर सीधे 4.5 टन प्रति दिन पहुंच गया है। इसके अलावा समय की भी भारी बचत हो रही है।
दिल्ली एयरपोर्ट पर जहां पहले कनेक्टिंग फ्लाइट के लिए सामान को 36 से 48 घंटे रोके रखना पड़ता था, वहीं अब यह ट्रांजिट टाइम घटकर महज 5 से 8 घंटे रह गया है यानी समय में लगभग 80 प्रतिशत की सीधी कटौती दर्ज की गई है।
इन उत्साहजनक नतीजों को देखते हुए अब अहमदाबाद, बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई से आने वाले माल को भी दिल्ली के रास्ते कोपेनहेगन, फ्रैंकफर्ट और लंदन (हीथ्रो) भेजने के लिए प्रक्रिया का विस्तार किया जा रहा है।
सीलबंद कंटेनर से बिना री-स्क्रीनिंग भेजा जा रहा माल
दरअसल, अब तक भारत के किसी शहर (जैसे चेन्नई या मुंबई) से विदेश जाने वाले सामान को जब आईजीआई एयरपोर्ट पर कनेक्टिंग फ्लाइट में शिफ्ट किया जाता था, तो वहां कस्टम और सुरक्षा कारणों से पूरे माल को अनपैक करके एक-एक पैकेट जांचना पड़ता था।
इस झंझट, देरी और सामान खराब होने या चोरी होने के डर से भारतीय निर्यातक अपना माल दुबई या दोहा जैसे विदेशी ट्रांसशिपमेंट हब्स के जरिए भेजते थे।
लेकिन नए सिस्टम में अगर माल सुरक्षित 'यूनिट लोड डिवाइस' यानी सीलबंद एयरलाइन्स कंटेनर में आ रहा है, तो उसे दिल्ली में बिना खोले सीधे अंतरराष्ट्रीय उड़ान में लोड कर दिया जाता है।
दिल्ली एयरपोर्ट की क्षमता से विदेशी हब पर निर्भरता घटेगी
विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रायल के ये सफल नतीजे भारत की लॉजिस्टिक्स क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाएंगे। अकेले दिल्ली एयरपोर्ट में 95 से अधिक अंतरराष्ट्रीय कार्गो कारिडोर के माध्यम से सालाना 20 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त ट्रांसशिपमेंट संभालने की क्षमता है।
इससे न केवल निर्यातकों की लागत घटेगी, बल्कि दुबई और दोहा जैसे विदेशी एयरपोर्ट्स पर भारत की निर्भरता भी खत्म होगी। सरकार की योजना इस नीति को तीन चरणों (घरेलू-से-अंतरराष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय-से-घरेलू और अंतरराष्ट्रीय-से-अंतरराष्ट्रीय) में लागू करने की है।
हालांकि शुरुआती नतीजे मजबूत हैं, लेकिन व्यापक रोल-आउट से पहले देश भर के अन्य एयरपोर्ट्स पर इसके अनुरूप इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना और सुरक्षा प्रोटोकॉल को बिना किसी चूक के बनाए रखना नागरिक उड्डयन मंत्रालय के लिए मुख्य परीक्षा होगी।
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