15 अगस्त से पहले पाकिस्तान की बड़ी साजिश नाकाम, ISI के निशाने पर थे 4 शहर; 3 राज्यों से 12 संदिग्ध गिरफ्तार
स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पंजाब, पश्चिम बंगाल और ...और पढ़ें

सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया। फोटो: एआई जनरेटेड
HighLights
एक सप्ताह में 3 राज्यों से 12 संदिग्ध गिरफ्तार
दिल्ली, अमृतसर, तरनतारन, वर्धमान संभावित निशाने पर थे
ड्रोन से हथियार, हनी ट्रैप और रेकी की साजिश का खुलासा
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने का दावा किया है। एक सप्ताह के दौरान पंजाब, पश्चिम बंगाल और दिल्ली से जुड़े अलग-अलग ऑपरेशन में कुल 12 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इन मॉड्यूल का संचालन पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स और आतंकी शहजाद भट्टी के नेटवर्क के जरिए किया जा रहा था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि दिल्ली, अमृतसर, तरनतारन और पश्चिम बंगाल के वर्धमान संभावित निशाने पर थे।
तीन राज्यों में कार्रवाई, कई मॉड्यूल का खुलासा
जांच एजेंसियों के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में सक्रिय मॉड्यूल को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। कहीं हथियारों की सप्लाई और रेकी का काम हो रहा था तो कहीं स्थानीय युवाओं की भर्ती, संवेदनशील सूचनाएं जुटाने और प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही थी।
बंगाल मॉड्यूल: पाकिस्तान के नंबर, हनी ट्रैप का एंगल
31 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल के वर्धमान थाने में दर्ज एफआईआर में कई गंभीर खुलासे हुए हैं। जांच के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी मोहम्मद हमीम मंडल पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया अकाउंट और विदेशी व्हाट्सएप नंबरों के लगातार संपर्क में था।
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उसके मोबाइल से पाकिस्तान के +92 नंबरों के अलावा अमेरिका और ब्रिटेन के नंबर भी मिले हैं। एफआईआर में "राणा", "C9Uzhair" और "Abid Jutt" जैसे नामों का भी जिक्र है।
जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े लोगों और पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के संपर्क में था। मोबाइल से कथित तौर पर चैट, निर्देश और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं।
जांच के अनुसार, इस मॉड्यूल को स्थानीय युवाओं की भर्ती, हथियारों का इंतजाम, वीआईपी और सरकारी प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाने, राजनीतिक नेताओं तक पहुंच बनाने, हनी ट्रैप के जरिए प्रभावशाली लोगों को फंसाने और जरूरत पड़ने पर हत्या तथा अपहरण जैसी वारदातों की तैयारी का टास्क दिया गया था।
एफआईआर के मुताबिक, झारखंड की रहने वाली अर्पिता की भूमिका भी सामने आई है। पूछताछ में दावा किया गया है कि उसे हनी ट्रैप के जरिए पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हलकों तक पहुंच बनाने का काम सौंपा गया था।
जांच में यह भी दावा किया गया है कि उसे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री की हत्या और पुलिस की वर्दी पहनकर दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर माहौल बिगाड़ने का टास्क दिया गया था।
अमृतसर मॉड्यूल: जंतर-मंतर पहुंचे, कैमरे लगाए
पंजाब पुलिस ने अमृतसर में ISI समर्थित दो अलग-अलग मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए चार नाबालिगों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से तीन अवैध पिस्तौल, नौ कारतूस, चार पेट्रोल बम और चोरी की मोटरसाइकिल बरामद हुई।
पुलिस के अनुसार, पूछताछ में सामने आया कि यह समूह पहले दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच चुका था, जहां उन्हें स्थानीय स्तर पर मदद और कुछ हथियार भी उपलब्ध कराए गए थे। हालांकि, किसी वजह से वे अपनी योजना को अंजाम नहीं दे सके और वापस पंजाब लौट गए।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पुलिस प्रतिष्ठानों की रेकी कर रहे थे, सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रख रहे थे और रेलवे ट्रैक के पास कैमरे लगाकर उनकी लाइव फुटेज विदेश में बैठे हैंडलर्स को भेज रहे थे।
पुलिस के मुताबिक, कैमरे लगाने की पेमेंट ऑनलाइन की गई थी। इस मामले में जेल में बंद दो आरोपियों की भूमिका भी सामने आने के बाद उन्हें प्रोडक्शन वारंट पर गिरफ्तार किया गया।
तरनतारन मॉड्यूल: ड्रोन से पहुंचाए गए थे हथियार
तरनतारन पुलिस और बीएसएफ के संयुक्त ऑपरेशन में मनजीत सिंह को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, वह पाकिस्तान में बैठे हथियार तस्करों के सीधे संपर्क में था। उसके घर से 7 विदेशी पिस्तौल, एक MP-9 गन, बड़ी संख्या में कारतूस और मोबाइल फोन बरामद किए गए।
पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि ये हथियार पाकिस्तान से ड्रोन के जरिए भेजे गए थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन हथियारों का इस्तेमाल पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIO) और गैंगस्टरों के जरिए टारगेट किलिंग में किया जाना था।
आरोपी के मोबाइल से पाकिस्तान के 12 नंबर मिले हैं। इनमें दो नंबर 'चाचा' और 'रहमान' के नाम से सेव थे। पुलिस को शक है कि ये असली नाम नहीं बल्कि कोड नेम हो सकते हैं। अब एजेंसियां इनकी पहचान, बैंक खातों, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और मनी ट्रेल की जांच कर रही हैं।
जांच एजेंसियों के रडार पर पूरा नेटवर्क
सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल और अमृतसर मॉड्यूल का संचालन पाकिस्तान में बैठे आतंकी शहजाद भट्टी के नेटवर्क से किया जा रहा था। सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या 15 अगस्त से पहले किसी बड़े आतंकी हमले या टारगेट किलिंग की तैयारी की जा रही थी। फिलहाल तीनों मामलों में जांच जारी है।
जानिए जांच में अब तक सामने आए बड़े तथ्य
- एक सप्ताह में तीन राज्यों में कार्रवाई, 12 संदिग्ध गिरफ्तार।
- दिल्ली, अमृतसर, तरनतारन और वर्धमान संभावित निशाने पर होने का दावा।
- पाकिस्तान के +92 नंबरों के साथ अमेरिका और ब्रिटेन के संपर्क भी मिले।
- हनी ट्रैप, स्थानीय भर्ती और वीआईपी की जानकारी जुटाने की साजिश का दावा।
- जंतर-मंतर तक पहुंचने और रेलवे ट्रैक पर कैमरे लगाकर लाइव फुटेज भेजने का खुलासा।
- ड्रोन के जरिए पाकिस्तान से हथियार पहुंचने और टारगेट किलिंग की तैयारी का दावा।
- मोबाइल से 'चाचा' और 'रहमान' नाम के संदिग्ध संपर्क मिलने के बाद जांच तेज।
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