देश में पनप रही आतंकियों की 'नई पौध', कट्टरपंथी बनाने के लिए इंटरनेट की मदद; सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चिंता
आईएसआई भारतीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए इंटरनेट और अंडरवर्ल्ड का इस्तेमाल कर रही है, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा को नया खतरा पैदा हो गया है। सु ...और पढ़ें

भारतीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए इंटरनेट और अंडरवर्ल्ड का इस्तेमाल कर रही है।
HighLights
आईएसआई इंटरनेट, अंडरवर्ल्ड से युवाओं को कर रही कट्टरपंथी।
पैसों और विदेश में बसने का लालच देकर बना रही आतंकी।
सुरक्षा एजेंसियां एआई, वित्तीय निगरानी से कर रही मुकाबला।
राकेश कुमार सिंह, नई दिल्ली। देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक ट्रेंड सामने आ रहा है। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई भारतीय युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें आतंकी गतिविधियों में धकेलने के लिए लगातार नए-नए और शातिराना पैंतरे अपना रही है।
सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट पर पिछले कुछ माह के दौरान राज्यों की आतंकवाद निरोधक यूनिटों द्वारा बड़ी संख्या में आईएसआई से जुड़े विभिन्न माड्यूल के आतंकी पकड़े जा चुके हैं। जांच से पता चला है कि आईएसआई, इंटरनेट मीडिया के जरिए स्थानीय युवाओं को तरह-तरह के प्रलोभन देकर आतंकियों की एक 'नई पौध' तैयार कर रही है। इस नए ट्रेंड ने देश की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं साथ ही इस तरह के मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता भी बढ़ा दी है।
आईएसआई के हैंडलर्स ने भारतीय युवाओं को पैसों का लालच दिया
लंबे समय तक स्पेशल सेल में रहे सेवानिवृत्त संयुक्त आयुक्त अशोक चांद का कहना है कि आईएसआई ने देश में अशांति फैलाने के लिए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। शुरु में आईएसआई के हैंडलर्स ने भारतीय युवाओं को पैसों का लालच दिया। उनसे देश के बेहद संवेदनशील इलाकों, सैन्य ठिकानों, प्रमुख रेलवे स्टेशनों और भीड़भाड़ वाले बाजारों के आसपास गुप्त रूप से सीसीटीवी कैमरे लगवाए। इन कैमरों का एक्सेस सीधे सीमा पार बैठे हैंडलर्स को दिया गया ताकि वे लाइव मानिटरिंग और जासूसी कर सकें।
जब सुरक्षा एजेंसियों ने इस डिजिटल चाल को डिकोड कर कई मॉड्यूल पकड़े, तो आइएसआइ ने अपना नया मोहरा 'अंडरवर्ल्ड और गैंग्सटर्स' को बनाया। पाकिस्तान में रहने वाला पाकिस्तानी गैंग्सटर शहजाद भट्टी, अंडरवर्ल्ड डान दाऊद इब्राहिम, उसका राइट हैंड मुन्ना झिंगाड़ा और अजमल गुर्जर (ये तीनों पहले भारत में सक्रिय थे और अब पाकिस्तान में पनाह लिए हुए हैं) इस नेटवर्क को आपरेट कर रहे हैं। ये गैंग्सटर इंटरनेट मीडिया के जरिए युवाओं को आसान पैसा, हथियार और विदेश में सेटल करने का लालच देकर आतंक के रास्ते पर धकेल रहे हैं।
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आईएसआई स्थानीय अपराधियों और बेरोजगार युवाओं को चुन रही
इस तरह के मामले पर स्पेशल सेल के एक आला अधिकारी का मानना है कि यह ''हाइब्रिड और प्राक्सी वार'' का सबसे खतरनाक रूप है। उनका कहना है कि ट्रेडिशनल आतंकी संगठनों (जैसे लश्कर या जैश) के बजाय अब आईएसआई स्थानीय अपराधियों और बेरोजगार युवाओं को चुन रही है। इनका पिछला कोई आतंकी रिकॉर्ड नहीं होता, जिससे इन्हें ''लोन वोल्फ'' हमलों या रेकी के लिए इस्तेमाल करना आसान होता है। ऐसे युवा जल्द सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर नहीं आ पाते हैं, इंटरनेट मीडिया के जरिये युवा अपना अपना मकसद पूरा करने के लिए युवा आसानी से आइएसआइ के चंगुल में फंस जाते हैं।
दरअसल मौजूदा समय में युवा वर्ग इंटरनेट पर बहुत ज्यादा समय बिताता है। गेमिंग एप्स, एन्क्रिप्टेड चैट एप्स (टेलीग्राम, सिग्नल) और डार्क वेब के जरिए युवाओं का ब्रेनवाश करना और उन्हें रिक्रूट करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस नई पौध में शामिल अधिकतर युवा किसी कड़े वैचारिक प्रभाव में नहीं, बल्कि रातों-रात अमीर बनने, कर्ज चुकाने या गैंग्सटरों के रसूख से प्रभावित होकर आतंकी दलदल में फंस रहे हैं।
देश के भीतर होने वाले ऐसे संदिग्ध ट्रांजक्शन्स पर नजर रखनी होगी
स्पेशल सेल के एक डीसीपी का कहना है कि इस उभरते खतरे से निपटने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाना होगा। सुरक्षा एजेंसियों को इंटरनेट मीडिया और संदिग्ध आनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और प्रेडिक्टिव इंटेलिजेंस टूल्स को और मजबूत करना होगा, ताकि रिक्रूटमेंट (भर्ती) के स्तर पर ही इन्हें दबोचा जा सके। चूंकि इन युवाओं को फंडिंग क्रिप्टोकरेंसी या हवाला नेटवर्क के जरिए की जा रही है, इसलिए फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट को देश के भीतर होने वाले ऐसे संदिग्ध ट्रांजक्शन्स पर कड़ी नजर रखनी होगी।
युवाओं को इस जाल से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। स्थानीय स्तर पर कम्युनिटी पुलिसिंग को मजबूत करना होगा, ताकि अगर कोई युवा अचानक संदिग्ध गतिविधियों या अचानक आए पैसों के जाल में फंसता दिखे, तो परिवार और समाज समय रहते सचेत हो सके। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और राज्यों की आतंकवाद निरोधक यूनिटों को मिलकर जेलों के भीतर से चल रहे अपराधियों के नेटवर्क और विदेशों में बैठे गैंग्सर्स की संपत्तियों को कुर्क कर उनके पूरे इकोसिस्टम को ध्वस्त करना होगा।
सुरक्षा एजेंसियां यह मान रही है कि आने वाले समय में चुनौती सीमा पर से ज्यादा 'डिजिटल स्पेस' और ''स्थानीय अपराधी नेक्सस'' से है। अगर समय रहते इस नई पौध की जड़ों पर प्रहार नहीं किया गया, तो यह आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन सकता है।