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जंतर-मंतर हिंसा में दिल्ली पुलिस के FRS पर उठे सवाल, जेल में बंद 25 अपराधियों की भी कर दी पहचान

Published: Fri, 04 Sep 2026 09:50 PM (IST)

जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस के फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) द्वारा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोगों की ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. जंतर-मंतर प्रदर्शन में FRS से 2,873 लोगों की पहचान हुई।

  2. पहचाने गए 25 लोग पहले से दिल्ली की जेलों में बंद थे।

  3. पुलिस ने कहा FRS केवल सुराग, अंतिम साक्ष्य नहीं।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में पुलिस के फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) से आपराधिक पृष्ठभूमि वाले 2,873 लोगों की पहचान किए जाने के दावे पर अब सवाल उठने लगे हैं।

रिकार्ड की पड़ताल में सामने आया है कि इनमें कम से कम 25 ऐसे अपराधियों की पहचान की गई, जो उस समय दिल्ली की जेलों में बंद थे। ऐसे में एफआरएस से हुई पहचान की सटीकता शक के घेरे में आ गई है।

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन से संबंधित सभी एफआइआर रद कर दीं। हालांकि, कोर्ट ने सरकार को उन 2,873 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति दी, जिनके बारे में पुलिस ने आपराधिक रिकार्ड होने का दावा किया है।

दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि केवल एफआरएस से हुई पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाएगी। पहले फील्ड वेरिफिकेशन और अन्य तथ्यों की पुष्टि की जाएगी।

रिकार्ड के अनुसार, एफआरएस से पहचाने गए 25 अपराधियों में 17 हत्या, चार दुष्कर्म और चार हत्या के प्रयास के मामलों में जेल में थे। दुष्कर्म के चार आरोपितों में दो के मामले पाक्सो कानून से जुड़े थे।

इन सभी को तिहाड़, मंडोली और रोहिणी जेलों में रखा गया था। इनमें तीन लोगों की पहचान 24 जुलाई, 21 की 25 जुलाई और एक की 26 जुलाई को हुई थी।

ये अपराधी हैं जेलों बंद

हत्या के मामलों में किशन, मुश्ताक, अंकित कुमार, योगेश, प्रताप सिंह सिसोदिया, अर्जुन, सोनू कुमार, विजय, राकेश, भोला उर्फ श्याम कुमार, राजा, विक्की उर्फ मनोज ठाकुर, फराज, मनीष, धरमेंद्र यादव, सोनू और रायल मैसी नामक अपराधी जेलों में बंद हैं।

वहीं दुष्कर्म के मामलों में अंकित उर्फ मोगली, सुनील कुमार, हीरा सिंह और कुंदन भी जेल में हैं। हत्या के प्रयास के मामलाें में महेश, बाबी, जीशान अहमद इदरीसी और अन्नू गिलोडिया उर्फ पहलवाल भी सलाखों के पीछे हैं।

पुलिस डेटाबेस में उपलब्ध रिकार्ड से मेल खाती थीं तस्वीरें

पुलिस के 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के मुताबिक, प्रदर्शन स्थल पर एफआरएस के जरिये ऐसे लोगों की पहचान की गई, जिनकी तस्वीरें सरकारी पुलिस डेटाबेस में उपलब्ध रिकार्ड से मेल खाती थीं।

इनमें 2,402 लोगों की पहचान दिल्ली पुलिस के बायोमेट्रिक डेटाबेस ''''क्राइम कुंडली'''' के जरिये और 471 लोगों की पहचान आपराधिक रिकार्ड के आधार पर किए जाने का दावा किया गया है।

2,873 लोगों का मिला था आपराधिक रिकार्ड

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान 2,873 लोगों की पहचान ऐसे व्यक्तियों के रूप में हुई, जिनका प्रारंभिक तौर पर आपराधिक रिकार्ड मिला। हालांकि, पुलिस के अनुसार इन सभी मामलों में आगे जांच और फील्ड वेरिफिकेशन किया जाना बाकी है।

दिल्ली पुलिस बोली- तकनीक केवल एक सुराग, अंतिम साक्ष्य नहीं

दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि 20 से 26 जुलाई के बीच हिंसक प्रदर्शन और उपद्रव के दौरान नई दिल्ली क्षेत्र में एफआरएस द्वारा चिन्हित किए गए 2,873 संदिग्धों में से किसी भी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति के खिलाफ इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई नहीं की गई है।

स्थानीय पुलिस इस सिस्टम द्वारा पहचान किए गए लोगों की मौजूदगी का सत्यापन करने के लिए विशेष जांच अभियान चलाती लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में होने के कारण अब तक फील्ड वर्क शुरू नहीं किया गया।

पुलिस ने शुरू में ही सुप्रीम कोर्ट में दिए गए हलफनामे में यह बात कही है कि 2873 संदिग्धों की प्राथमिक तौर पर पहचान की गई है, यह अंतिम सत्य नहीं है। एडिशनल पुलिस कमिश्नर और दिल्ली पुलिस प्रवक्ता राजीव रंजन सिंह का कहना है कि एफआरएस साफ्टवेयर तस्वीरों और वीडियो फुटेज का विश्लेषण करता है और पहले से मौजूद डाटाबेस से चेहरों का मिलान करता है।

दिल्ली पुलिस के पास वर्तमान में देश भर के तीन लाख से अधिक अपराधियों का डाटाबेस मौजूद है। जांचकर्ता जब वीडियो फुटेज से एक स्पष्ट फ्रेम या तस्वीर निकालते हैं, तो उसे आफआरएस साफ्टवेयर में अपलोड किया जाता है।

साफ्टवेयर चेहरे के विभिन्न मापदंडों का विश्लेषण करता है और समानता के आधार पर संभावित नामों की सूची तैयार करता है। जांच की आवश्यकता के अनुसार, पुलिस अधिकारी 80 से 60 प्रतिशत तक का सिमिलरिटी स्कोर सेट कर सकते हैं।

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