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CJP Protest के बाद जंतर-मंतर पर फिर शुरू हुआ प्रदर्शन का दौर, CP समेत आसपास के बाजारों में लौटी रौनक

Published: Tue, 28 Jul 2026 05:25 AM (IST)

जंतर-मंतर 36 दिनों के विरोध प्रदर्शन के बाद सामान्य स्थिति में लौट आया है, जहां दुकानें और रेस्तरां फिर से ...और पढ़ें

राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करती राष्ट्रीय महिला आरक्षण गठबंधन की महिला कार्यकर्ता। जागरण

राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करती राष्ट्रीय महिला आरक्षण गठबंधन की महिला कार्यकर्ता। जागरण

HighLights

  1. जंतर-मंतर 36 दिनों के विरोध प्रदर्शन के बाद हुआ सामान्य।

  2. दुकानें, रेस्तरां फिर से खुले; कनॉट प्लेस में लौटी रौनक।

  3. युवा अब विरोध से ज्यादा रील्स बनाने में व्यस्त।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जंतर- मंतर रोड, टालस्टाय और संसद मार्ग के साथ आस- पास की अन्य सड़को व बाजारों के दुकानदारों ने पिछले 36 दिनों में जो देखा और सहा है, उसे शायद ही कोई भूल पाए।

नारों की गूंज, आंसू गैस के धुएं का अहसास, भारी पुलिस बल की मौजूदगी और हजारों युवाओं के आक्रोश से उबलता क्षेत्र... सोमवार को फिर अपने पुराने रूप में लौट आया है।

काकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के खत्म होने के बाद दो दिन तक शांति पसरी रही। सोमवार को जंतर-मंतर फिर से आम धरना-प्रदर्शनों और लोगों से गुलजार रहा। यहां तीन धरना प्रदर्शन हुए। शाम को पुलिस ने फिर पूरे क्षेत्र को अपने कब्जे में ले लिया।

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वैसे, सड़कों से आंदोलनकारियों का हुजूम छंटने के बावजूद युवाओं की आवाजाही जारी है। जनपथ और टालस्टाय मार्ग के मोड़ पर जयपुर से आए 20 साल के छात्र अनमोल और उनके दोस्त उस जगह को देखकर चकित हो रहे थे, जिसने हफ्तों तक पूरे देश की सांसें थामे रखीं।

रील और सेल्फी का हॉटस्पॉट

अनमोल का कहना था कि वह सिर्फ उस इतिहास को अपनी आंखों से देखने आए हैं, जिसे उन्होंने अब तक सिर्फ मोबाइल स्क्रीन पर देखा था। वैसे, अब यह सड़क मांगों की लड़ाई का मैदान नहीं, बल्कि इंटरनेट मीडिया की रील और सेल्फी का एक नया हाटस्पाट बन चुकी है।

दूसरी ओर जंतर-मंतर अपनी पुरानी रंगत में लौटने की ओर है। हरियाली को लौटाने व टाइल्स को ठीक करने के साथ अन्य कार्य जारी है। सीमेंट से रोड डिवाइडरों को दोबारा जोड़ा जा रहा है।

सड़कों पर बिखरी प्लास्टिक की कुर्सियां, पोस्टर, टूटी मच्छरदानियां सब हटाई जा चुकी हैं। हफ्ते भर से बंद पड़ी दुकानें और दक्षिण भारतीय रेस्त्रां अब धीरे- धीरे सांस ले रहे हैं।

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इंटरनेट और मेट्रो स्टेशन बंद होने और सड़कों पर नाकेबंदी के चलते जिनका कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो गया था, उन्होंने उम्मीद भरी नजरों से सोमवार को अपनी दुकानों के शटर उठाए और राहत की सांस ली।

चाय विक्रेता अशोक शर्मा अपनी चाय की केतली से उठते धुएं के बीच मुस्कुराते हुए कहते हैं कि अन्ना आंदोलन का दौर अलग था, इस बार के युवा विरोध जताने से ज्यादा रील्स बनाने और वीडियो रिकार्ड करने में व्यस्त दिखे।

कनॉट प्लेस में लौटे जायकों के कद्रदान

सबसे खूबसूरत बदलाव कनाट प्लेस और जनपथ के बाजारों में दिखा। यहां की दुकानों, रेस्त्रां व आउटलेट्स में एक हफ्ते से छाया डर और अनिश्चितता के बादल छंट चुके हैं।

कनाट प्लेस जो दिल्ली का दिल और लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है, सोमवार को एक बार फिर ठहाकों और चहल- पहल से गुलजार हो उठा। सुरक्षा बल और रैपिड एक्शन फोर्स की मुस्तैद गश्त के बीच लोग फिर से इस ऐतिहासिक कोने में मस्ती करने, मिलने-जुलने और चाय की चुस्कियां लेने लौटे हैं।

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कई लोग ऐसे मिले जो मन मसोस कर नहीं आ पा रहे थे। कई के लिए कनाट प्लेस की शाम दिनचर्या में शामिल है। वह लौटे और दोस्तों के साथ ठहाके लगाए। परिवार के साथ भी लोग पहुंचे और पसंदीदा रेस्त्रां का स्वाद लिया। इसी तरह आउटलेट्स में भी खरीदारों की होड़ रही।

एनडीटीए के संयुक्त सचिव अमित गुप्ता कहते हैं कि संघर्ष के शोर के बाद मुस्कुराती यह दिल्ली बताती है कि वक्त चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, जिंदगी फिर से अपनी राह ढूंढ ही लेती है।

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