क्या दिल्ली पुलिस के सवालों पर चुप रहे साैरभ दास-आशुतोष रांका? हिंसा से 1 दिन पहले के Video ने खोला राज
जंतर-मंतर पर 20 जुलाई की हिंसा से एक दिन पहले का वीडियो सामने आया है, जिसमें दिल्ली पुलिस के अधिकारी CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका से उनके प्लान ...और पढ़ें

19 जुलाई को संसद मार्च की अनुमति लेने की बात कहते संयुक्त आयुक्त दीपक पुरोहित और डीसीपी सचिन शर्मा। सौजन्य: सोशल मीडिया
HighLights
हिंसा से एक दिन पहले का वीडियो अब प्रसारित हुआ।
पुलिस अधिकारियों ने CJP नेताओं से उनके प्लान पर सवाल किए।
आयोजकों ने पुलिस की चेतावनियों को लगातार नजरअंदाज किया।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुई हिंसा से एक दिन पहले का एक नया वीडियो सामने आया है। यानी 19 जुलाई का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है, जिसमें काकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका नजर आ रहे हैं।
वीडियो में दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त दीपक पुरोहित और नई दिल्ली जिले के डीसीपी सचिन शर्मा, सीजेपी के दो कार्यकर्ताओं से बातचीत करते दिख रहे हैं। उस वक्त प्रदर्शन स्थल पर भीड़ लगातार बढ़ रही थी।
पुलिस ने पूछा, आपका क्या प्लान है?
वीडियो में दोनों वरिष्ठ पुलिस अधिकारी सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास से पूछ रहे हैं कि आपका प्लान क्या है? आप इसको ऑर्गेनाइज कैसे करोगे? ऑर्गेनाइज करना पड़ेगा... हर हाल में ऑर्गेनाइज करना पड़ेगा।
बढ़ती भीड़ पर चिंता जताते हुए अधिकारियों ने उन्हें कहा कि इस भीड़ से कौन बात करेगा? मैं तो कब से बुला रहा हूं और बात करने की कोशिश कर रहा हूं।
आप वालंटियर्स के नाम बताइए हालांकि, पुलिस के इन सवालों पर सीजेपी के दोनों कार्यकर्ता कोई स्पष्ट जवाब देने के बजाय टालमटोल करते नजर आए।
पुलिस ने पहले ही दी थी चेतावनी
पुलिस अधिकारी के मुताबिक 16 जुलाई से ही पुलिस अधिकारी लगातार जंतर-मंतर पहुंचकर आयोजकों से लिखित अनुमति लेने का आग्रह कर रहे थे।
पुलिस ने संसद मार्च के लिए तय किए जाने वाले रूटों की जानकारी मांगी थी और उन्हें बार-बार संसद की ओर बढ़ने से रोका भी था। इसके बावजूद आयोजकों ने पुलिस की चेतावनियों को नजरअंदाज किया और बिना लिखित अनुमति के ही संसद मार्च करने पर अड़े रहे।
इसी असहयोग और नियमों के उल्लंघन के कारण पुलिस ने संसद मार्ग थाने में दोनों के खिलाफ सात डीडी एंट्री दर्ज की थीं।
सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद भड़की हिंसा
20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू थी। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के तहत पूरे क्षेत्र को 15 जोन में बांटा गया था, और हर जोन की कमान डीसीपी स्तर के अधिकारी के हाथों में थी।
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इसके बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े, जिसके बाद भीषण हिंसा भड़क उठी। हिंसा के दो हफ्ते बीत जाने के बाद भी यह मामला अभी शांत होता नहीं दिख रहा है।
साजिश या तात्कालिक गुस्सा, जांच में जुटी पुलिस
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह उपद्रव प्रदर्शनकारियों के तात्कालिक गुस्से का नतीजा था या इसके पीछे कोई गहरी सुनियोजित साजिश थी?
सीसीटीवी और मोबाइल डाटा की हो रही जांच
20 जुलाई को हिरासत में लिए गए करीब 70 लोगों को प्राथमिक पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था। फिलहाल इस मामले में कोई नई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
दिल्ली पुलिस की विशेष टीमें अब सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल डाटा, सीडीआर और इंटरनेट मीडिया गतिविधियों की गहन जांच कर रही हैं, ताकि 20 जुलाई की हिंसा की पूरी कड़ी को जोड़ा जा सके।
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THE COPS SAW THE DANGER. DID CJP LOOK AWAY? NEW VIRAL VIDEO DOING THE ROUNDS appears to show New Delhi DCP Sachin Sharma and Joint CP Deepak Purohit repeatedly warning CJP leaders Saurabh Das and Abhishek Ranka that the Jantar Mantar protest was spiralling out of control. The… pic.twitter.com/WRtw9DeLeV
— Rahul Shivshankar (@RShivshankar) August 3, 2026