कार्ति चिदंबरम के खिलाफ ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से दिल्ली HC का इनकार, CBI से मांगा जवाब
दिल्ली हाई कोर्ट ने कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम की चीनी वीजा घोटाले में आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सीबीआई से ...और पढ़ें

सांसद कार्ति पी चिदंबरम ने चीनी वीजा घोटाले के जुड़े मामले में आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दी है।
HighLights
हाई कोर्ट ने कार्ति की याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा
ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से हाई कोर्ट का इनकार
चीनी वीजा घोटाले में कार्ति पर आरोप तय करने को चुनौती
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। चीनी वीजा घोटाले के संबंध में आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली कांग्रेस सांसद कार्ति पी चिदंबरम की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई से जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी किया। हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार करते हुए राहत देने से संबंधी कार्ति के आवेदन पर जवाब मांगाा।
सुनवाई के दौरान कार्ति चिदंबरम की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि यह मामला चार फरवरी को ट्रायल कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, जबकि उनके खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है।
इस पर पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि इस पर रोक नहीं लगाई जा सकती। अदालत का मानना है कि कार्यवाही पर रोक नहीं लगानी चाहिए और ट्रायल को पटरी से नहीं उतारना चाहिए। साथ ही अदालत ने आदेश दिया कि 12 फरवरी से पहले माले पर संक्षिप्त स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जाए।
सीबीआई ने अदालत को सूचित किया कि यह मामला चार फरवरी को ट्रायल कोर्ट में सिर्फ कुछ प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं के लिए लिस्टेड था।
वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि 50 लाख रुपये की रिश्वत के मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-आठ और नौ के तहत आरोप लगने के बावजूद, किसी भी सरकारी कर्मचारी को आरोपित नहीं बनाया गया है या उसकी पहचान नहीं की गई है।
उन्होंने कहा कि पूरा मामला एक गवाह के बयान पर आधारित है और किसी भी रिश्वत की मांग या स्वीकार करने का कोई सुबूत नहीं है। 23 दिसंबर 2025 को एक ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में कार्ति चिदंबरम और छह अन्य के खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप तय करने का आदेश दिया था।
अदालत ने कहा था कि प्रथमदृष्टया कार्ति चिदंबरम के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-आठ (भ्रष्ट या अवैध साधनों से लोक सेवक को प्रभावित करने के लिए रिश्वत लेना) और धारा-नौ (लोक सेवक पर व्यक्तिगत प्रभाव डालने के लिए रिश्वत लेना) के तहत मूल अपराध के लिए आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।
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वहीं, याचिका में कहा गया है कि जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए आरोपों के विपरीत न तो कोई रिश्वतखोरी हुई और न ही कोई साजिश रची गई। सीबीआई ने 2022 में की गई प्राथमिकी में दो साल की जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया था।
जिसमें उसने आरोप लगाया था कि पंजाब स्थित टीएसपीएल 1980 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट स्थापित कर रही थी और काम चीनी कंपनी शेडोंग इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन कार्प (एसईपीसीओ) को आउटसोर्स किया गया था।
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