किरण बेदी ने PM मोदी और अमित शाह को दिया खास सुझाव, CJP प्रदर्शन में छात्र-पुलिस टकराव टालने पर क्या कहा?
पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने पीएम मोदी और अमित शाह को सीजेपी प्रदर्शनों से निपटने के लिए एक नया सुझाव दिया है। उन्होंने पुलिस से पहले सिविल डिफें ...और पढ़ें

पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने कहा, पुलिस को सीधे सामने लाने की बजाय पहले सिविल डिफेंस को तैनात किया जाए। फाइल फोटो
HighLights
किरण बेदी ने सीजेपी प्रदर्शनों पर नया सुझाव दिया
पुलिस से पहले सिविल डिफेंस को तैनात करने की सलाह
छात्र-पुलिस टकराव टालने और तनाव कम करने का लक्ष्य
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने केंद्र सरकार को सीजेपी प्रदर्शन से निपटने के लिए एक नया विचार दिया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि पुलिस को सीधे सामने लाने की बजाय पहले सिविल डिफेंस को तैनात किया जाए।
बताया, पुलिस को कब करें आगे?
बेदी ने सीमा सुरक्षा से तुलना करते हुए कहा कि जिस तरह सीमा पर सेना से आगे बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) को तैनात किया जाता है, उसी तरह छात्र प्रदर्शनों के समय पुलिस से पहले सिविल डिफेंस के जवानों को लगाया जाए। पुलिस को केवल तभी आगे आना चाहिए जब जान-माल की रक्षा की सख्त जरूरत हो।
पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को किया टैग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को टैग करते हुए बेदी ने एक वीडियो संदेश में कहा कि इस व्यवस्था से पुलिस और छात्रों के बीच सीधा टकराव टाला जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिविल डिफेंस के कर्मचारियों के पास केवल केन शील्ड, बॉडी आर्मर और हेलमेट जैसा सुरक्षा उपकरण होना चाहिए, लाठी-डंडा या कोई हथियार नहीं। किरण बेदी ने कहा है कि सिविल डिफेंस पहले स्थिति संभाले। पुलिस को दूरी पर रखा जाए और वह केवल जान-माल बचाने के लिए आगे आए। इससे आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति कम होगी।
क्यों उचित है किरण बेदी का यह सुझाव?
यह सुझाव जंतर मंतर पर सीजेपी प्रदर्शनकारियों और दिल्ली पुलिस के बीच पिछले कुछ दिनों में हुई बार-बार की झड़पों के बीच आया है। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगाया है, जबकि कई पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए हैं। बेदी का मानना है कि यह मॉडल तनाव कम कर सकता है, छात्रों और पुलिस दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है और कानून व्यवस्था के अधिक मानवीय चेहरे को सामने ला सकता है।
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सरकार इस सुझाव पर कितना गौर करती है फिलहाल इसकी कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, बेदी का यह विचार युवा आंदोलन के मध्य चर्चा का विषय बन गया है।