दिल्ली के उपराज्यपाल संधू ने 'रीइमैजिनिंग दिल्ली' पर दिया जोर, बताया साझा जिम्मेदारी
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने जेएनयू में 'रीइमैजिनिंग दिल्ली' कार्यक्रम में कहा कि दिल्ली को नया स्वरूप देना सबकी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने तेजी स ...और पढ़ें
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दिल्ली को नया स्वरूप देना सबकी साझा जिम्मेदारी: LG संधू
HighLights
दिल्ली को नया स्वरूप देना सबकी साझा जिम्मेदारी।
उपराज्यपाल संधू ने जेएनयू में कार्यक्रम को संबोधित किया।
शहरीकरण, पर्यावरण चुनौतियों पर सामूहिक प्रयास आवश्यक।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने शुक्रवार जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के स्कूल आफ इंटरनेशनल स्टडीज में आयोजित कार्यक्रम रीइमैजिनिंग दिल्ली में कहा कि दिल्ली केवल देश की राजधानी नहीं, बल्कि भारत की विविधता, जीवंतता और आकांक्षाओं का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण, पर्यावरणीय दबाव, जनसंख्या वृद्धि और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। उपराज्यपाल ने कहा कि दिल्ली को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध, आर्थिक रूप से मजबूत और तकनीकी रूप से प्रगतिशील शहर बनाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की है।
संधू ने जेएनयू से अपने पुराने जुड़ाव को भी याद किया
उन्होंने कहा रीइमैजिनिंग दिल्ली एक साझा जिम्मेदारी है। हमें मिलकर ऐसी दिल्ली बनानी होगी जो मानवीय मूल्यों के साथ विकास की नई मिसाल पेश करे। कार्यक्रम के दौरान संधू ने जेएनयू से अपने पुराने जुड़ाव को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इस परिसर में लौटना उनके लिए बेहद भावुक और व्यक्तिगत अनुभव रहा। उन्होंने कहा कि जेएनयू केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि ऐसा स्थान है जहां विचारों को नई दिशा मिलती है और व्यक्तित्व का निर्माण होता है।
विचार-विमर्श और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने की अपील
संधू ने अपने छात्र जीवन को याद करते हुए कहा कि जेएनयू में बिताए गए वर्षों ने उनके सोचने और दुनिया को देखने के नजरिए को आकार दिया। उन्होंने छात्रों से संवाद, विचार-विमर्श और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने की अपील भी की।
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कार्यक्रम में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की बड़ी संख्या मौजूद रही। रीइमैजिनिंग दिल्ली विषय पर आयोजित इस चर्चा में राजधानी के भविष्य, विकास और चुनौतियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। वहीं इस दौरान जेएनयू की कुलगुरु शांतिश्री डी पंडित भी उपस्थित रही।