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    लोकनायक अस्पताल के IVF सेंटर पर बड़ा खुलासा, 4 साल से बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था; ART कानून की उड़ीं धज्जियां

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 08:45 PM (IST)

    लोकनायक अस्पताल का आईवीएफ एवं प्रजनन जीवविज्ञान केंद्र एआरटी अधिनियम लागू होने के बाद भी लगभग चार साल तक बिना पंजीकरण के संचालित होता रहा। विशेषज्ञों ...और पढ़ें

    लोकनायक अस्पताल का आईवीएफ सेंटर बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था। फोटो: आर्काइव

    लोकनायक अस्पताल का आईवीएफ सेंटर बिना रजिस्ट्रेशन चल रहा था। फोटो: आर्काइव

    HighLights

    1. लोकनायक आईवीएफ केंद्र चार साल बिना पंजीकरण चला

    2. एआरटी प्राधिकरण ने विशेषज्ञों की पात्रता पर आपत्ति जताई थी

    3. आपत्तियों के बावजूद मार्च 2026 में केंद्र का पंजीकरण हुआ

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। लोकनायक अस्पताल के IVF एवं प्रजनन जीवविज्ञान केंद्र को करीब चार वर्षों तक बिना पंजीकरण के ही चलाया गया। उस दौरान इसकी व्यवस्था और मानकों में कमी को लेकर एआरटी प्राधिकरण ने आपत्ति भी जताई थी।

    बावजूद इसके लोकनायक अस्पताल में वर्ष 2008 में स्थापित इस सरकारी IVF केंद्र का सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (एआरटी) अधिनियम लागू होने के लगभग चार वर्ष बाद मार्च 2026 में पंजीकरण कराया गया।

    जबकि कानून के तहत एआरटी सेवाएं देने वाले केंद्रों को कानून लागू होने के तुरंत बाद पंजीकरण कराना अनिवार्य था। पर, ऐसा नहीं हो सका क्योंकि मानक पूर नहीं थे, जिसे लेकर 10 मार्च 2025 को जारी नोटिस में एआरटी प्राधिकरण ने IVF केंद्र में कार्यरत विशेषज्ञों की पात्रता को लेकर कड़ी आपत्ति की थी।

    अनुमति न मिलने पर भी चलता रहा 

    कहा था कि आवेदन में दर्शाए गए विशेषज्ञ एआरटी अधिनियम व नियमों में निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं करते। इस आधार पर केंद्र को पंजीकरण की स्वीकृति नहीं दी गई पर, केंद्र संचालित होता रहा। पर, 17 मार्च 2026 को एआरटी स्तर-दो केंद्र के रूप में इसका पंजीकरण कर दिया गया। अब इसे लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

    सवाल उठाए जा रहे हैं कि 2025 में पात्रता संबंधी कमियां थीं तो मार्च 2026 में ऐसा क्या बदल गया कि केंद्र को पंजीकरण की स्वीकृति दे दी गई। प्रश्न यह भी है कि एआरटी अधिनियम लागू होने के बाद केंद्र को नियमों के अनुरूप बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए और नियामकीय आपत्तियों के बावजूद पंजीकरण किस आधार पर प्रदान किया गया।

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    स्वास्थ्य विभाग ने साध रखी है चुप्पी

    इन प्रश्नों के उत्तर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। सरकार, एआरटी प्राधिकरण और स्वास्थ्य विभाग सभी इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। नियमों के अनुसार IVF केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं बल्कि अत्यंत संवेदनशील टीम आधारित उपचार है।

    जिसमें गायनेकोलाजिस्ट, एम्ब्रायोलाजिस्ट और अन्य विशेषज्ञों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। एआरटी कानून निर्धारित पात्रता मानकों का पालन मरीजों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा विषय है, आरोप है कि इसका पालन यहां नहीं हो रहा।

    लोकनायक अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार केंद्र की स्थापना उस समय हुई थी जब एआरटी क्षेत्र को विनियमित करने वाला कोई केंद्रीय कानून अस्तित्व में नहीं था।

    2021 में लागू हुआ था ART एक्ट

    हालांकि उस समय केंद्र में आवश्यक विशेषज्ञ उपलब्ध थे और सेवाएं नियमित रूप से संचालित हो रही थीं। पर, दिसंबर 2021 में एआरटी अधिनियम लागू होने और जून 2022 में नियम अधिसूचित होने के बाद स्थिति बदल गई।

    नए कानून के तहत केंद्रों को निर्धारित मानकों के अनुरूप पंजीकरण कराना और योग्य विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक हो गया। इस मामले में सरकार का पक्ष जानने को स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. पंकज सिंह को फोन किया गया तो फोन नहीं उठा, उन्हें वाट्सअप संदेश भी भेजा गया उसका भी उत्तर नहीं मिला।

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