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    लुटियंस दिल्ली की सड़कों पर कूड़े का अंबार, स्वच्छ सर्वेक्षण में एनडीएमसी की रैंकिंग पर खतरा

    Updated: Mon, 16 Mar 2026 08:05 PM (IST)

    नई दिल्ली में स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 की तैयारी के बावजूद लुटियंस दिल्ली की सड़कों पर कूड़े के ढेर चिंताजनक स्थिति दर्शा रहे हैं। जंतर-मंतर, अशोक रोड ...और पढ़ें

    बाबा खड़क सिंह मार्ग पर स्टेट एंपोरियम के पास पार्क के बाहर जमा कूड़ा। हरीश कुमार

    बाबा खड़क सिंह मार्ग पर स्टेट एंपोरियम के पास पार्क के बाहर जमा कूड़ा। हरीश कुमार


    शशि ठाकुर, नई दिल्ली। स्वच्छ सर्वेक्षण- 2025-26 की प्रक्रिया तेज है, जिसके मद्देनजर सिविक एजेंसियां अपनी रैंकिंग सुधारने की कोशिशों में जुटी हैं, लेकिन देश की सत्ता के केंद्र के गलियारों वाली लुटियंस दिल्ली की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जिन सड़कों की सफाई की मिसाल दी जाती है।

    वर्तमान में वहां बिखरा कूड़ा न सिर्फ स्वच्छता के प्रति नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) की गंभीरता, बल्कि सर्वेक्षण को लेकर तैयारियों तथा उसके दावों की हवा निकाल रहा है। हालात ऐसे हैं कि लुटियंस की सड़कें, एमसीडी के उन पुराने दिनों की याद दिला रही हैं, जब सफाई व्यवस्था वहां बदहाल थी।

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    जंतर मंतर रोड पर कूड़े की ट्रॉली के पास फैला कूड़ा। जागरण

    बात चाहे जंतर-मंतर की हो, अशोक रोड और अतुल ग्रोव मार्ग की, सभी में सफाई की स्थिति चिंताजनक मिली। जंतर- मंतर जहां देशभर से लोग अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने आते हैं। देशी- विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं। उस सड़क किनारे भरे कूड़ेदान तथा उसके आस-पास भरा बिखरा कूड़ा एनडीएमसी की स्वच्छता को लेकर गंभीरता की वास्तविक तस्वीर पेश कर रहा है।

    यही हाल, अशोक रोड का है, यहां फुटपाथ पर फैली गंदगी स्वच्छ भारत अभियान के मूल उद्देश्यों को मुंह चिढ़ा रही है। समय पर कूड़ेदान खाली न होने से गंदगी सड़कों पर बिखरी पड़ी है, जिससे राहगीरों का पैदल चलना दूभर हो गया है।

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    अशोक रोड पर रोयल प्लाजा होटल के पास जमा कूड़ा। जागरण

    इसी तरह अतुल ग्रोव रोड हो या फिर बाबा खड़क सिंह मार्ग स्टेट एम्पोरियम के पीछे पार्क व गेट के साथ लुटियंस दिल्ली की कई सड़कों व बैकलेन में स्वच्छता अभियान की चौंकाने वाली तस्वीर पेश कर रही है। कनाट प्लेस के दुकानदार तो पहले से ही अवैध रेहड़ी-पटरी व उसके चलते होती गंदगी की शिकायत करते आ रहे हैं।

    बजट भारी, व्यवस्था लाचार

    एनडीएमसी हर वर्ष मैकेनिकल स्वीपिंग और स्मार्ट डस्टबिन जैसी अत्याधुनिक तकनीक पर भारी-भरकम बजट खर्च कर रही है। इसके बावजूद अगर लुटियंस दिल्ली जैसे- जैसे संवेदनशील और अति विशिष्ट इलाके में कचरे का ढेर है, तो यह सिविक एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल है।

    स्वच्छ सर्वेक्षण में एनडीएमसी का शानदार रहा है रिकॉर्ड

    वैसे, स्वच्छता के मामले में एनडीएमसी की यह लापरवाही समझ से परे हैं। क्योंकि, स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 के लिए तैयारी शुरू हो चुकी है। जल्द ही सर्वेक्षण शुरू होगा। एनडीएमसी का पिछला रिकार्ड काफी अच्छा है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 में परिषद ने देश भर में सातवां स्थान हासिल किया था और इसे फाइव-स्टार गारबेज फ्री सिटी का गौरव प्राप्त हुआ था।

    2022 में नौवें पायदान से छलांग लगाकर सातवें पर आना एक बड़ी उपलब्धि थी। जबकि, पिछले वर्ष के स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 में 50 हजार से तीन लाख की आबादी वाली श्रेणी में उसने प्रतिष्ठित सुपर स्वच्छता लीग सिटी अवार्ड जीता था, लेकिन वर्तमान जमीनी हकीकत इस उपलब्धि को कमतर कर सकती है।

    कनॉट प्लेस के साथ ही लुटियंस दिल्ली की सफाई व्यवस्था ठीक नहीं है। दिल्ली के दिल में बड़ी संख्या में रेहड़-पटरी वालों का कब्जा है, जिसके चलते गंदगी फैलती है। गलियारों से लेकर हरित पट्टी तक खराब स्थिति में हो जाता है। जिसकी कई बार शिकायत की गई है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती है।

    - विक्रम बधवार, महासचिव, नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन (एनडीटीए)

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