दिल्ली के इस इलाके में लगेंगे 16 हजार स्मार्ट वॉटर मीटर, हजारों स्ट्रीटलाइट्स भी बदलेंगे NDMC
एनडीएमसी लुटियंस दिल्ली में पुराने पानी के मीटरों और पारंपरिक स्ट्रीट लाइटों को बदलने की तैयारी में है। परिषद 16,000 यांत्रिक और खराब पानी के मीटरों क ...और पढ़ें
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एनडीएमसी लुटियंस दिल्ली में पुराने पानी के मीटरों और पारंपरिक स्ट्रीट लाइटों को बदलने की तैयारी में है। एआई जेनरेटेड सांकेतिक तस्वीर
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। पुराने पारंपरिक पानी के मीटर आने वाले दिनों में लुटियंस दिल्ली में बीते जमाने की बात होगी। इसके स्थान पर नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) नए मीटर लगाने जा रही है। सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो अगामी काउंसिल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी जाएगी।
पानी के मीटर के साथ ही बिजली के पुराने पारंपरिक लाइटों को भी बदलने का प्रस्ताव आएगा। इसके तहत पांच हजार पारंपरिक स्ट्रीट लाइटों को भी बदला जाएगा।
एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत चहल ने कहा कि हम स्वच्छ जल देने के साथ जल वितरण की पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। इसी के तहत पानी के पुराने मीटरों के स्थान पर नए मीटर आधुनिक तकनीक युक्त स्मार्ट मीटर लगाने का प्रस्ताव हमने बनाया है। इसके तहत हम 16 हजार मैकैनिकल व खराब पानी के मीटरों को बदलेंगे। यह परियोजना प्रस्ताव पारित होने के एक वर्ष के भीतर पूरी की जाएगी।
उन्होंने बताया कि स्मार्ट मीटर अल्ट्रासोनिक आटोमैटिक मीटर रीडिंग तकनीक से युक्त है। जिनसे छेड़छाड़ भी नहीं की जा सकेगी बल्कि मीटर रीडिंग के लिए भी रीडर की जरुरत नहीं होगी। इससे एनडीएमसी के संसाधनों के साथ समय की भी बचत होगी। वही, नागरिकों को भी समय पर बिल मिलेगा। उन्होंने बताया कि
“इन मीटरों में पानी के संपर्क में आने वाला कोई मूविंग पार्ट नहीं है, जिससे ओवरबिलिंग की शिकायतें खत्म हो जाती हैं। ये मैग्नेटिकली सील हैं और इनकी बैटरी लाइफ लगभग 15 साल है। इस परियोजना की लागत 13.24 करोड़ अनुमानित है।
चहल ने बताया कि पुराने पानी के मीटर के साथ ही हम पुरानी पारंपरिक स्ट्रीट लाइटों को भी बदलेंगे। फिलहाल 5500 स्ट्रीट लाइट को बदलने की योजना है। इसे 240 दिन में बदला जाएगा। यह स्ट्रीट लाइट बिजली की खपत को भी कम करेगी। साथ ही हर मौसम में केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से चलाई जा सकेगी।
इसमें लाइटिंग सिस्टम होगा जो कि केंद्रीय नियंत्रण कक्ष को यह जानकारी देगा कि कितनी ऊर्जा स्ट्रीट लाइट ने खपत की और कितनी स्ट्रीट लाइटें जल रही है और कितनी खराब हैं।
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