MCD के 15 हजार अनुबंधित कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! अब 60 की उम्र तक पक्की हुई नौकरी, वेतन भी बढ़े
महापौर प्रवेश वाही की पहल पर एमसीडी के अनुबंधित कर्मचारियों को 60 साल तक नौकरी की गारंटी मिलेगी। उन्हें समान कार्य के लिए समान वेतन और अन्य लाभ भी मिल ...और पढ़ें

महापौर प्रवेश वाही की पहल पर एमसीडी के अनुबंधित कर्मचारियों को 60 साल तक नौकरी की गारंटी मिलेगी।
HighLights
एमसीडी अनुबंधित कर्मचारियों को 60 साल तक नौकरी की गारंटी।
महापौर प्रवेश वाही ने की है इस पहल की शुरुआत।
समान कार्य के लिए समान वेतन, 15000 कर्मचारियों को लाभ।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। कई वर्षों से निगम के साथ अनुबंध के तौर पर काम करने वाले एमसीडी के कर्मचारियों से भविष्य को लेकर अनिश्चितता की तलवार हटने जा रही है। सब-कुछ ठीक-ठाक रहा तो अगामी वित्त वर्ष से किसी भी अनुबंधित कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी। उन्हें 60 साल तक एमसीडी में नौकरी की गारंटी मिलेगी।
इसके लिए महापौर प्रवेश वाही ने पहल शुरू की है। ए से लेकर सी समूह के एमसीडी से सीेधे अनुबंध पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को नौकरी से नहीं निकाला जाएगा। साथ ही उन्हें समान कार्य और समान वेतन मिलेगा। फिलहाल कई कर्मचारी न्यूनतम मजदूरी दर के हिसाब से वेतन ले रहे हैं। जिससे कर्मचारियों का वेतन दोगुना भी हो जाएगा। इसके लिए महापौर प्रवेश वाही ने निगमायुक्त संजीव खिरवार को पत्र लिखकर 15 दिन में कार्ययोजना मांगी है।
महापौर प्रवेश वाही ने पत्र में कहा है कि निगम द्वारा सीधे भर्ती किए गए बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी लंबे समय से नियमित पदों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। इनमें कई कर्मचारी भर्ती नियमों के अनुसार आवश्यक शैक्षणिक एवं अन्य योग्यताएं भी रखते हैं। अनेक कर्मचारी अपनी सेवा के दौरान अन्य सरकारी नौकरियों की अधिकतम आयु सीमा भी पार कर चुके हैं या उसके निकट पहुंच गए हैं। ऐसे में उनके भविष्य की सुरक्षा पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी निर्णय को सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों, संवैधानिक प्रावधानों और प्रचलित भर्ती नियमों के अनुरूप ही लागू किया जाएगा, ताकि कोई कानूनी बाधा उत्पन्न न हो। साथ ही हरियाणा सरकार और एनडीएमसी द्वारा संविदा कर्मचारियों के हित में लिए गए निर्णयों का भी अध्ययन करने का सुझाव दिया गया है।
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वाही ने आयुक्त को निर्देश दिया है कि सभी विभागों में कार्यरत पात्र संविदा कर्मचारियों की विभागवार पहचान की जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि संबंधित कर्मचारी स्वीकृत एवं रिक्त पदों के विरुद्ध कार्यरत हों, भर्ती नियमों के अनुरूप योग्य हों तथा उनकी प्रारंभिक नियुक्ति किसी अवैध प्रक्रिया से न हुई हो।
पत्र में यह भी सुझाव दिया गया है कि जहां नियमित पद उपलब्ध नहीं हैं, वहां विधिक और वित्तीय स्वीकृति के अधीन सुपरन्यूमरेरी पद सृजित करने की संभावना का परीक्षण किया जाए। इसके अलावा पात्र कर्मचारियों को एकमुश्त नियमितीकरण अथवा कम से कम नियमित पद की सेवानिवृत्ति आयु तक सेवा में बनाए रखने के विकल्प पर भी विचार करने को कहा गया है।
महापौर ने समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत के अनुरूप नियमित कर्मचारियों के बराबर प्रवेश स्तर का वेतन, महंगाई भत्ता, अवकाश, कर्मचारी कल्याण योजनाओं और अन्य सेवा लाभ देने की संभावनाओं पर भी विचार करने का सुझाव दिया है।
उन्होंने कहा कि वर्षों से समर्पण के साथ सेवा दे रहे कर्मचारियों के हितों की रक्षा करना निगम की प्राथमिकता है और इस दिशा में विधिसम्मत एवं न्यायसंगत समाधान खोजने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि इस योजना से कम से कम 15000 कर्मचारियों को सीधा लाभ होगा क्योंकि 3500 के करीब डीबीसी कर्मचारी हैं जबकि 3000 हजार ही अनुबंधित शिक्षक हैं। इसी प्रकार एमटीएस समेत कई विभागों में ए और बी ग्रुप पर भी बड़ी संख्या में अनुबंध पर कार्य करते हैं।