दिल्ली के मिरांडा हाउस कॉलेज में खुला भारत का पहला कार्बन गार्डन, प्रदूषण से लड़ने में करेगा मदद
मिरांडा हाउस कॉलेज ने दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ एक अहम पहल करते हुए 'कार्बन गार्डन' का उद्घाटन किया है। यह भारत का पहला कार्बन गार्डन है।

मिरांडा हाउस में कार्बन गार्डन का उद्घाटन करती प्राचर्य बिजयालक्ष्मी नंदा व प्रो. दीनबंधू साहू व अन्य
HighLights
मिरांडा हाउस कॉलेज में 'कार्बन गार्डन' का उद्घाटन, पर्यावरण संरक्षण की पहल।
यह भारत का पहला कार्बन गार्डन है, प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन से लड़ने में सहायक।
50 प्रजातियों के पौधे लगाए गए, छात्रों के लिए 'लिविंग लैबोरेटरी' बनेगा।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और बदलते पर्यावरण के बीच दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में अहम पहल की है।
कॉलेज परिसर में सोमवार को ‘कार्बन गार्डन’ का उद्घाटन किया गया। इसका उद्देश्य वातावरण में कार्बन के अवशोषण को बढ़ाने के साथ जैव विविधता को बढ़ावा देना और प्रकृति आधारित समाधानों के जरिए जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूकता पैदा करना है।
भारत का पहला कार्बन गार्डन
गार्डन का उद्घाटन भारत के पहले कार्बन गार्डन के संस्थापक और दिल्ली विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रमुख और रिसर्च, इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप काउंसिल के अध्यक्ष प्रो. दीनबंधु साहू ने किया।
उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव भारतीय संस्कृति और परंपराओं का हिस्सा रहा है। अब इस पारंपरिक जुड़ाव को आधुनिक विज्ञान और पर्यावरणीय समझ के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।
कार्बन गार्डन के क्या है फायदे?
प्रो. साहू ने कहा कि दिल्ली जैसे शहरों में हरित क्षेत्रों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। कार्बन गार्डन न केवल पर्यावरण संरक्षण में योगदान देगा, बल्कि छात्रों को प्रकृति से जोड़ने के साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण में भी मदद करेगा। उन्होंने युवाओं की पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी पर भी जोर दिया।
50 प्रजातियों के लगाए गए पौधे
मिरांडा हाउस की प्राचार्या प्रो. बिजयालक्ष्मी नंदा ने कहा कि कॉलेज पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लेता है। उम्मीद है कि यह पहल छात्रों को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय कदम उठाने के लिए प्रेरित करेगी।
‘एमएच-कार्बन गार्डन’ में करीब 50 अलग-अलग प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं।
इनमें हाइड्रोफाइट्स, जेरोफाइट्स और मेसोफाइट्स के साथ अमरूद और सहजन जैसी स्थानीय प्रजातियां भी शामिल हैं। यह गार्डन छात्रों और शोधार्थियों के लिए ‘लिविंग लैबोरेटरी’ के रूप में काम करेगा, जहां वे कार्बन अवशोषण, पारिस्थितिकी तंत्र और सतत पर्यावरणीय प्रथाओं को समझ सकेंगे।
