दिल्ली-NCR में धूल प्रदूषण पर सख्ती! CAQM ने दिए सख्त निर्देश, 1 अप्रैल से नए नियम लागू
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने एनसीआर में वायु प्रदूषण रोकने हेतु 1 अप्रैल से नए नियम लागू किए हैं। 'निर्देश संख्या 97' के तहत निर्माण और तोड़फो ...और पढ़ें
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CAQM ने एनसीआर में वायु प्रदूषण रोकने हेतु 1 अप्रैल से नए नियम लागू किए हैं। फाइल फोटो
HighLights
1 अप्रैल से निर्माण मलबे का वैज्ञानिक निपटान अनिवार्य।
कंप्लीशन सर्टिफिकेट के लिए कचरा रसीद दिखानी होगी।
GPS ट्रैकिंग और वेब पोर्टल से होगी कड़ी निगरानी।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने कमर कस ली है। शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान आयोग के तकनीकी सदस्य डा एस डी अत्री ने अपने ''निर्देश संख्या 97'' के सख्त कार्यान्वयन की घोषणा की।
इसमें एक अप्रैल से लागू होने वाले इस नियम के तहत निर्माण और तोड़फोड़ (सीएंडडी वेस्ट) से निकलने वाले मलबे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान अनिवार्य कर दिया गया है।
प्रमुख बदलाव और अनिवार्य शर्तें
अत्री ने स्पष्ट किया कि निर्माण क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे-
- एनसीआर के सभी नगर निकायों और विकास प्राधिकरणों को अपने अधिकार क्षेत्र में हर 5x5 किमी के दायरे में कम से कम एक ई कचरा संग्रहण केंद्र स्थापित करना होगा।
- 200 वर्ग मीटर अथवा उससे अधिक क्षेत्र वाली सभी निर्माण परियोजनाओं को बिल्डिंग प्लान की मंजूरी मिलने से पहले यह बताना होगा कि वहां से अनुमानित कितना कचरा निकलेगा।
- निर्माण या तोड़फोड़ के बाद कचरे को निर्धारित संग्रहण केंद्र पर जमा करना होगा, जहां से एक रसीद जारी की जाएगी। यदि प्रोजेक्ट संचालक यह रसीद दिखाने में विफल रहता है, तो उसे कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं दिया जाएगा और भारी पर्यावरणीय मुआवजा (ईसी) भी वसूला जाएगा।
डिजिटल निगरानी और ट्रैकिंग
- प्रणाली को पारदर्शी बनाने के लिए सीएक्यूएम ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है:-
- एनयीआर की सरकारों को एक एकीकृत वेब पोर्टल बनाने और सभी संग्रहण केंद्रों की जियो-टैगिंग करने का निर्देश दिया गया है।
- कचरा ले जाने वाले वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य होगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मलबा सड़क किनारे या खाली प्लाटों में न फेंककर सीधे प्रोसेसिंग सेंटर ही पहुंचे।
'सभी एजेंसियां कंप्लीशन या ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट जारी करने से पहले यह सत्यापित करेंगी कि कचरा सही जगह जमा किया गया है या नहीं। कचरे की मात्रा और क्षेत्र के आधार पर पर्यावरणीय मुआवजे की राशि तय की जाएगी।'
— एस.डी. अत्री, तकनीकी सदस्य, CAQM
आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में दिल्ली में ऐसे 122 संग्रहण केंद्र मौजूद हैं। हालांकि, नए नियमों के तहत इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी ताकि किसी भी बिल्डर या व्यक्ति को मलबा डालने के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। आयोग ने स्पष्ट किया कि यह कदम न केवल धूल से होने वाले प्रदूषण को रोकेगा, बल्कि कचरे के पुनर्चक्रण (Recycling) को भी बढ़ावा देगा।
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