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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 31, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Lok Sabha Election 2024: चुनाव में बढ़ी उड़नखटोले की मांग, किराया छू रहा आसमान

    Updated: Sun, 31 Mar 2024 09:12 AM (IST)

    Lok Sabha Election 2024 के चलते चुनाव प्रचार के लिए हेलीकॉप्टर की मांग बढ़ गई है। इससे हेलीकॉप्टर का किराया काफी बढ़ जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि चुनाव ...और पढ़ें

    Lok Sabha Election 2024: चुनाव में बढ़ी उड़नखटोले की मांग, किराया छू रहा आसमान
    Lok Sabha Election 2024: चुनाव में बढ़ी उड़नखटोले की मांग, किराया छू रहा आसमान

    HighLights

    1. चुनाव के दौरान हेलीकॉप्टर की मांग हो जाती है अधिक
    2. हेलीकाप्टर सेवा देने वाली कंपनियों के लिए चुनाव का समय है कमाई का मौका

    गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। चुनाव प्रचार के दौरान जम्मू कश्मीर से तमिलनाडु और मेघालय से गुजरात की दूरी तय करने के लिए नेता उड़नखटोले का इस्तेमाल करेंगे। लोकसभा चुनाव को देखते हुए इन दिनों आलम यह है कि हर छोटी या बड़ी राजनीतिक पार्टियां चार्टर्ड हेलीकॉप्टर या विमान सेवा की सेवा उपलब्ध कराने वाले ऑपरेटरों से संपर्क साध रही हैं।

    सबसे अधिक मांग हेलीकॉप्टर की है, लेकिन देश में नान शेड्यूल ऑपरेटरों के पास सीमित संख्या में ही हेलीकॉप्टर हैं। ऐसे में, मांग और आपूर्ति में संतुलन बनाना इस क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों के लिए एक बड़ी चुनौती है। चार्टर्ड हेलीकॉप्टर और विमान उपलब्ध कराने से जुड़ी कंपनी फ्लाइंग बर्ड्स एविएशन के सीईओ आशीष कुमार ने बताया कि देश में हेलीकॉप्टर बहुत ही सीमित संख्या में हैं।

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    सरकारी और अर्ध सरकारी विभागों को छोड़ दें, तो निजी क्षेत्र के पास करीब 160 हेलीकॉप्टर ही हैं। इस संख्या का अधिकांश हिस्सा बड़े कारपोरेट घरानों के पास है। ऐसे में, हेलीकॉप्टरों की संख्या सीमित है।

    देखा जाए, तो करीब 40 हेलीकॉप्टर ही निजी ऑपरेटरों के पास बचते हैं। नेता यदि अपने निजी संबंधों के बल पर कारपोरेट घरानों से हेलीकॉप्टर उपलब्ध करा लें, तो बात दूसरी है, लेकिन यदि निजी ऑपरेटरों के पास आएंगे, तो सीमित विकल्प ही हैं।

    चुनाव का समय है कमाई का मौका

    हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने वाली कंपनियों से जुड़े लोगों का कहना है कि यह कमाने का मौसम है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि मांग और आपूर्ति में काफी असंतुलन की चुनावी मौसम में स्थिति रहती है।

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    सामान्य मौसम के मुकाबले इस मौसम में हेलीकॉप्टर का भाड़ा कम से कम दो गुना बढ़ ही जाता है। मांग करने वालों को इस मौसम में यह कीमत भी कम नजर आती है। भाड़े के तौर पर मुंह मांगी कीमत देने को लोग तैयार रहते हैं। आमतौर पर हेलीकॉप्टर का भाड़ा घंटे के हिसाब से तय होता है।

    चुनाव के दौरान भाड़ा करीब पांच लाख रुपये तक पहुंच जाती है। ज्यादातर मांग डबल इंजन वाले हेलीकॉप्टर की होती है। ऐसे में, भाड़ा डेढ़ से दो गुना अधिक भी वसूल किया जाता है। हालांकि प्रति घंटे 1.5 से 2.5 लाख रुपये तक का किराया हेलीकॉप्टर का किराया सामान्य तौर पर होता है।

    हेलीकॉप्टर की मांग क्यों हो जाती है अधिक?

    हवाई जहाज के उतरने या उड़ान भरने के लिए एयरपोर्ट जरूरी है। चुनाव प्रचार के दौरान नेताओं को अनेक ऐसे दूरदराज के इलाके में जाना पड़ता है, जहां आसपास एयरपोर्ट नहीं होता है। नजदीक के एयरपोर्ट पर उतरकर भी गंतव्य तक जाने का प्रयास करेंगे तो कई किलोमीटर का सफर तय करना पड़ सकता है। जिसमें समय लगेगा।

    ऐसी जगहों के लिए हेलीकॉप्टर काफी उपयोगी साबित होता है। इसकी लैंडिंग कहीं भी की जा सकती है। आमतौर पर नेता यदि दिल्ली से किसी दूरदराज के क्षेत्र की यात्रा पर निकलते हैं, तो उनकी कोशिश होती है कि संबंधित राज्य की राजधानी तक हवाई जहाज से जाएं और वहां से हेलीकॉप्टर से प्रचार स्थल के लिए रवाना हों।