Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 17, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    DUSU Election Interview: 23 सितंबर को सुबह आठ बजे शुरू होगी मतगणना, 12 बजे घोषित होंगे महामुकाबले के परिणाम

    By Edited By: Abhi Malviya
    Updated: Sun, 17 Sep 2023 06:38 PM (GMT+05:30)

    DUSU Election दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के लिए 22 सितंबर को मतदान होना है। प्रत्याशियों की घोषणा हो चुकी है। प्रचार अभियान जोरों पर ...और पढ़ें

    दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के लिए 22 सितंबर को मतदान होना है।
    दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के लिए 22 सितंबर को मतदान होना है।

    HighLights

    1. चुनाव को लेकर तीखे सवालों के प्रो. चंद्रशेखर ने दिए बेबाक जवाब
    2. दैनिक जागरण के उदय जगताप ने की खास बातचीत

    नई दिल्ली, उदय जगताप। DUSU Election: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के लिए 22 सितंबर को मतदान होना है। प्रत्याशियों की घोषणा हो चुकी है। प्रचार अभियान जोरों पर चल रहा है। ऐसे में लिंगदोह समिति की ओर से बनाए गए नियम टूटते दिखाई भी दे रहे हैं। इनको रोकने के लिए डीयू ने क्या कदम उठाए हैं।

    दिल्ली विश्वविद्यालय ने चुनाव के लिए क्या तैयारी की है। सुरक्षा व्यवस्था कैसी होगी और कितनी ईवीएम चुनाव में लगाई जाएंगी। वोट की गिनती कब से होगी और परिणाम कब आएंगे। ऐसे तमाम सवालों पर दैनिक जागरण के उदय जगताप ने डूसू चुनाव अधिकारी प्रो. चंद्रशेखर से विस्तृत चर्चा की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश।

    प्रश्न-मतदान को एक हफ्ता बचा है, विश्वविद्यालय की क्या तैयारी है।

    -दिल्ली विश्वविद्यालय पूरी तैयारी में है। ईवीएम आ चुकी हैं। इनकी टेस्टिंग की जा रही है। टेस्टिंग के लिए चुनाव आयोग के अधीन कार्य करने वाली संस्था इलेक्ट्रोनिक्स कार्पोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड की टीम के सदस्य हैदराबाद से आए हैं। वे मशीन की जांच कर रहे हैं।

    जांच के बाद ही मशीनों की संख्या तय होगी। अतिरिक्त मशीनें चुनाव आयोग से मिल नहीं सकी थीं। हर कालेज को मशीनों का आवंटन किया जाएगा। मशीनों में कुछ खराबी आती है तो इसके लिए अतिरिक्त मशीनें रखी जाएंगी। जिससे मतदान प्रभावित न हो।

    खबरें और भी

    प्रश्न-चुनाव परिणाम कब घोषित किए जाएंगे।

    -मतदान के बाद मशीनें उसी दिन रात में मतगणना कार्यालय पहुंच जाएंगी। 23 सितंबर को सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू की जएगी। दोपहर 12 बजे नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे।

    प्रश्न-चुनाव में सुरक्षा के इंतजाम कैसे किए जाएंगे।

    -सुरक्षा के लिए पुलिस से पहले ही बात हो गई है। जहां-जहां मतदान होगा वहां पुलिस की कड़ी सुरक्षा रहेगी। जो ईवीएम कालेज में भेजी जाएंगी। उसके साथ डूसू चुनाव अधिकारी के साथ कालेज का चुनाव अधिकारी और पुलिस के जवान तैनात रहेंगे। प्रत्याशियों को हर ईवीएम की टेस्टिंग करा दी गई है। उनके बैलेट नंबर भी बता दिए गए हैं। पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है।

    प्रश्न-चुनाव में लगातार लिंगदोह की सिफारिशों का उल्लंघन देखने को मिल रहा है, इसके लिए क्या कदम उठाए हैं।

    -सभी नियमों का पालन करने की हिदायत छात्र संगठनों को पहले ही दी जा चुकी है। जो पोस्टर चिपकाए जा रहे हैं। प्रत्याशी उन्हें लगाने से इन्कार कर रहे हैं। उन पर प्रीटिंग प्रेस का नाम नहीं है। ऐसे में कार्रवाई करना मुश्किल हो रहा है। अभी तक हिंसा की खबर नहीं आई है। कालेज परिसर के बाहर हिंसा के लिए विश्वविद्यालय जिम्मेदार नहीं है। कालेज परिसर में कुछ होता है तो सक्षम अधिकारी उसकी शिकायत पुलिस से करने के लिए स्वतंत्र हैं। पुलिस को सभी पर समान रूप से कड़ी कार्रवाई करने के लिए पहले ही कहा जा चुका है।

    यह भी पढ़ें: DUSU Election: DU की राजनीति से निकल सियासी फलक पर चमके कई सितारे, अरुण जेटली समेत दिग्गज नेताओं का नाम शामिल

    प्रश्न-चुनाव को लेकर छात्रों ने आपसे शिकायत की है।

    -कालेजों से नामांकन रद होने की शिकायतें मिली थीं। नामांकन जांचना कालेज का दायित्व है। वहां का चुनाव अधिकारी पूरी तरह सक्षम है। डूसू नामांकन के वक्त दो छात्रों के पर्चे रद हुए थे। उन्होंने काफी हंगामा किया था। लेकिन, उन्होंने पूरा फार्म नहीं भरा था।

    अधिकतर के नामांकन शपथ पत्र पर गलत हस्ताक्षर करने के चलते निरस्त हुए हैं। इसके लिए चुनाव अधिकारी क्या कर सकते हैं। अलग से कोई रियायत तो दी नहीं जा सकती। छात्रों के लिए शिकायत निवारण समिति भी बनाई गई है। वहां शिकायत की जा सकती है। कालेजों में जहां जरूरत पड़ी है, डूसू चुनाव अधिकारी व प्राक्टर ने सहायता की है।

    यह भी पढ़ें- DUSU Election: कई कॉलेजों में निर्विरोध जीते प्रत्याशी, मतदान पर पड़ेगा असर; छात्र संगठनों की बढ़ी मुश्किलें