यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 10, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Rashtrapati Bhavan: 17 साल में बनकर तैयार हुआ था राष्ट्रपति भवन, तस्वीरों से लगाइए इसकी भव्यता का अंदाजा
Rashtrapati Bhavan नई दिल्ली में स्थित राष्ट्रपति भवन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के राष्ट्रपति का सरकारी आवास है। इसकी भव्यता देखते ही बनती है। यहां ...और पढ़ें

नई दिल्ली, जागरण डिजिटिल डेस्क। भारत का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक होने के साथ साथ भारतीय सशस्त्र बलों के कमांडर इन चीफ भी होता है। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में स्थित राष्ट्रपति भवन दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के राष्ट्रपति का सरकारी आवास है।

राष्ट्रपति भवन की भव्यता देखते ही बनती है। इस भवन का वास्तुशिल्प दुनियाभर के लोगों को मंत्रमुग्ध कर देता है। यहां कई ऐसी चीजें हैं, जिनके बारे में शायद ही आप जानते होंगे। आइए राष्ट्रपति भवन के बारे में जानते हैं कुछ रोचक तथ्य।

इस विशाल भवन की चार मंजिलें हैं और इसमें 340 कमरे बने हैं। 2 लाख वर्ग फीट में फैले इस भवन के निर्माण में 700 मिलियन ईंटों और तीन मिलियन क्यूबिक फीट पत्थर का इस्तेमाल किया गया था। इस विशालकाय भवन में करीब 200 लोग काम करते हैं।

आकार, विशालता और इसकी भव्यता के लिहाज से, दुनिया के कुछ ही राष्ट्राध्यक्षों के सरकारी आवासीय परिसर इस राष्ट्रपति भवन की बराबरी कर पाएंगे। मौजूदा राष्ट्रपति भवन पहले ब्रिटिश वायसराय का निवास स्थान था। इसके वास्तुकार एडविन लैंडसीयर लुट्येन्स थे।
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इस भवन के लिए 400000 पौंड की राशि मंजूर की गई थी। हालांकि इस इमारत के निर्माण में 17 साल का लंबा समय लगा, जिससे इसकी लागत बढ़कर 877,136 पौंड (उस समय 12.8 मिलियन) हो गयी। इस इमारत के अलावा, मुगल गार्डन तथा कर्मचारियों के आवास पर आया खर्च 14 मिलियन था।

दिलचस्प बात यह है कि जिस भवन का निर्माण पूरा करने की समय-सीमा चार वर्ष थी, उसे बनने में 17 वर्ष लगे और इसके निर्मित होने के 18वें साल भारत आजाद हो गया।

राष्ट्रपति भवन की एक विशेषता यह भी है कि इसके खंभों में भारतीय मंदिरों की घंटियों का प्रयोग किया गया है। मालूम है कि मंदिरों की घंटियां हमारी सामासिक संस्कृति, खासकर हिंदू, बौद्ध तथा जैन परंपराओं का अभिन्न अंग है। खास बात यह है कि इस तरह की घंटियां नार्थ ब्लॉक, साउथ ब्लाक तथा संसद भवन में मौजूद नहीं हैं।

बता दें कि राष्ट्रपति भवन के खंभों में इस तरह की घंटियों के इस्तेमाल का विचार कर्नाटक के मुदाबिदरी नामक स्थान पर स्थित एक जैन मंदिर से लिया गया है।
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उल्लेखनीय है कि देश के मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल आगामी 24 जुलाई को समाप्त हो रहा है। इसी के मद्देनजर निर्वाचन आयोग ने नए राष्ट्रपति के लिए चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। चुनाव आयोग के मुताबिक, राष्ट्रपति चुनाव के लिए 18 जुलाई को वोट डाले जाएंगे और 21 जुलाई को मतगणना होगी। वहीं, 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति शपथ ले सकते हैं।
साभार- तस्वीरें @rashtrapatibhvn से ली गई हैं।