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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 31, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

न्यायाधीशों के फोन टैप करने के आरोपों से गृह मंत्रालय का इंकार

By Amit MishraEdited By:
Updated: Tue, 01 Nov 2016 07:51 AM (IST)

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता कुलदीप सिंह धातवालिया ने कहा, ‘गृह मंत्रालय ने मीडिया की उन रिपोर्टों से पूरी तरह से इंकार किया है जिनमें यह आरोप लगाया गया है कि कुछ न्यायाधीशों के टेलीफोन टैप किये जा रहे हैं।

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नई दिल्ली [जेएनएन]। सरकार ने कुछ न्यायाधीशों के फोन टैप किये जाने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसी सभी रिपोर्ट ‘आधारहीन और अकारण’ हैं। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता कुलदीप सिंह धातवालिया ने कहा, ‘गृह मंत्रालय ने मीडिया की उन रिपोर्टों से पूरी तरह से इंकार किया है जिनमें यह आरोप लगाया गया है कि कुछ न्यायाधीशों के टेलीफोन टैप किये जा रहे हैं। इन खबरों में कोई सचाई नहीं है। ये रिपोर्ट आधारहीन और अकारण हैं।’

इससे पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने यह कहकर विवाद पैदा कर दिया कि इस बात का डर ‘व्यापक तौर पर’ फैला हुआ है कि जजों के फोन टैप किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह बात सच है तो यह न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सबसे बड़ा हमला है।

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केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के लिए न्यायपालिका की स्वतंत्रता मूलभूत है और इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

केजरीवाल ने ये बातें दिल्ली उच्च न्यायालय की स्वर्ण जयंती समारोह के दौरान कही, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधान न्यायाधीश टी एस ठाकुर ने भी शिरकत की। टेलीफोन टैप करने की मंजूरी देने के लिए सक्षम प्राधिकार केंद्रीय गृह सचिव हैं और ऐसे सभी आदेशों को बाद में कैबिनेट सचिव के नेतृत्व वाले उच्च स्तरीय समिति की मंजूरी लेनी होती है।

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