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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 27, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    'AAP' सरकार में अधिकारियों के खिलाफ लंबित मामलों पर लगी रोक, आगे कार्रवाई न करने का प्रस्ताव पास

    Updated: Thu, 27 Mar 2025 11:12 PM (IST)

    दिल्ली विधानसभा ने अधिकारियों से जुड़े सभी मामलों पर आगे कार्रवाई न करने का प्रस्ताव पास कर दिया है। इस प्रस्ताव में दिल्ली के मुख्य सचिव एमएम कुट्टी ...और पढ़ें

    'AAP' सरकार में अधिकारियों के खिलाफ लंबित मामलों पर लगी रोक।
    'AAP' सरकार में अधिकारियों के खिलाफ लंबित मामलों पर लगी रोक।

    HighLights

    1. दिल्ली विधानसभा ने अधिकारियों से जुड़े सभी मामलों पर आगे कार्रवाई न करने का प्रस्ताव पास
    2. आप सरकार में लंबित मामलों को विधानसभा अध्यक्ष ने किया निपटान
    3. सरकार के कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों से संबंधित थे मामले

    राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। आप सरकार में वरिष्ठ आइएएस अधिकारियों से जुड़े मामलों में अब कोई कार्रवाई नहीं होगी। दिल्ली विधानसभा ने अधिकारियों से जुड़े सभी मामलों पर आगे कार्रवाई न करने का प्रस्ताव पास कर दिया है। इस प्रस्ताव में दिल्ली के मुख्य सचिव एमएम कुट्टी सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के मामले शामिल हैं।

    अधिकारियों से जुड़े मामलों में छठी और सातवीं विधानसभा की तीन समितियों (विशेषाधिकार समिति, याचिका समिति और प्रश्न एवं संदर्भ समिति) को जांच करनी थी। सातवीं विधानसभा के भंग होने पर जांच आठवीं विधानसभा को सौंपी गई थी। आठवीं विधानसभा में दिल्ली विधानसभा में मुख्य सचेतक अभय वर्मा के प्रस्ताव को पास कर लंबित मामलों पर आगे जांच करने पर रोक लगा दी गई है।

    कुछ मामलों के कारण दिल्ली उच्च न्यायालय में केस भी दायर

    विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि नियम-183 के अंतर्गत प्रावधान का उपयोग बहुत कम और केवल महत्वपूर्ण मामलों में किया जाता है, जहां समिति सदन के भंग होने से पहले काम पूरा नहीं कर सकती। जबकि अधिकांश लंबित मामलों की या तो समितियों द्वारा जांच ही नहीं की गई या उन्हें कई वर्षों तक कोई रिपोर्ट प्रस्तुत किए बिना लंबित रखा गया। जबकि दिल्ली सरकार के अधिकारियों से जुड़े कुछ मामलों के कारण दिल्ली उच्च न्यायालय में केस भी दायर हुए थे।

    सत्तारूढ़ दल द्वारा दिल्ली सरकार के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज

    विधानसभाध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि छठी विधानसभा के 59 मामले और सातवीं विधानसभा के 69 मामले विशेषाधिकार समिति द्वारा लंबित रखे गए थे। नियम-223 के अनुसार विशेषाधिकार समिति को आम तौर पर एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट दे देनी चाहिए। अधिकतर शिकायतें तात्कालीन सत्तारूढ़ दल के सदस्यों द्वारा दिल्ली सरकार के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई थीं। आदर्श रूप से, यदि शिकायत वास्तविक होती तो समितियों को इन मामलों की जांच करनी चाहिए थी और सदन को रिपोर्ट करनी चाहिए थी।

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    दिल्ली सरकार के अधिकारियों को निशाना बनाने का प्रयास

    इसी तरह, याचिका समिति के पास छठी विधानसभा के 107 मामले और सातवीं विधानसभा के 72 मामले लंबित थे। प्रश्न एवं संदर्भ समिति में भी सातवीं विधानसभा के 04 मामले लंबित हैं। इन समितियों में भी दिल्ली सरकार के अधिकारियों को निशाना बनाने का प्रयास किया गया। इन समितियों के समक्ष कुछ मामले वर्ष 2016 से ये लंबित है और उनकी जांच के लिए कोई मीटिंग नहीं हुई। कुछ अधिकारियों ने न्यायालयों से संरक्षण मांगा और इनमें से 08 केस अब दिल्ली उच्च न्यायालय में हैं।

    समितियों को साफ-सुथरी स्थिति से शुरुआत करनी चाहिए

    विधानसभाध्यक्ष ने कहा कि आठवीं विधानसभा की समितियों को साफ-सुथरी स्थिति से शुरुआत करनी चाहिए और ऐसे मामलों में नहीं उलझना चाहिए जो प्रेरित प्रतीत होते हैं। हमें इस बात पर विचार करना चाहिए कि अधिकारियों, जिनमें से कुछ अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, उनको तनाव में रखना विधानमंडल या उसकी समितियों को शोभा नहीं देता।

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